महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में चुनावी तस्वीर हुई साफ
Maharashtra Municipal Elections 2026 में अब चुनावी रण पूरी तरह साफ हो गया है। नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख खत्म होते ही यह स्पष्ट हो गया कि राज्य की कई नगर निगमों में अंदरूनी बगावत थमी नहीं है। टिकट वितरण से नाराज कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मैदान में डटे हुए हैं, जिससे कई वार्डों में सीधी लड़ाई के बजाय अब त्रिकोणीय और कहीं-कहीं चौफेर मुकाबले तय हो गए हैं।
Maharashtra Municipal Elections: बागी बने कार्यकर्ता
लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों में टिकट को लेकर असंतोष सामने आया है। जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी से उम्मीद थी, लेकिन नामांकन नहीं मिला, उन्होंने निर्दलीय या बागी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। इससे पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि बगावत का सीधा नुकसान अधिकृत उम्मीदवारों को हो सकता है।
मनाने के प्रयास, लेकिन हर जगह सफलता नहीं
नामांकन वापसी से पहले कई इलाकों में बैठकों का दौर चला। वरिष्ठ नेताओं ने खुद मैदान में उतरकर बागी उम्मीदवारों को मनाने की कोशिश की। कहीं भविष्य में पद का आश्वासन दिया गया, तो कहीं संगठन में जिम्मेदारी देने की बात हुई। कुछ जगहों पर दबाव और राजनीतिक समझाइश की भी चर्चा रही। बावजूद इसके, कई बागी उम्मीदवार पीछे हटने को तैयार नहीं हुए।
प्रलोभन और बैठकों की भी चर्चा
चुनावी गलियारों में यह चर्चा भी तेज रही कि कुछ वार्डों में नामांकन वापसी के लिए प्रलोभन दिए गए। आखिरी क्षण तक बंद कमरों में बैठकें होती रहीं, लेकिन सभी प्रयास नाकाम साबित हुए। नतीजतन, कई सीटों पर मुकाबला और रोचक व कड़ा हो गया है।
रणनीति से बदले राजनीतिक समीकरण
कुछ नगर निगमों में प्रमुख दलों ने ऐसे उम्मीदवार उतारे हैं, जिनकी पहले उम्मीद नहीं की जा रही थी। इस रणनीतिक चाल से विरोधी दलों की गणित बिगड़ती नजर आ रही है। कई वार्डों में पुराने समीकरण टूटे हैं और नए गठजोड़ बनते दिख रहे हैं।
Maharashtra Municipal Elections: प्रचार में आएगी तेजी
अब जब नामांकन वापसी के बाद अंतिम तस्वीर सामने आ चुकी है, तो चुनाव प्रचार और तेज होगा। नगर निगमों में सत्ता हासिल करने के लिए पार्टियों की प्रतिष्ठा दांव पर है। बगावत से होने वाले नुकसान को कम करना और मतदाताओं को साधना, आने वाले दिनों में नेताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहने वाली है।
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