मुंबई को मिलेंगे दो और रिंग रोड, MMRDA ने तैयार किया 307 किलोमीटर का नया नेटवर्क

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MMRDA की 307 किमी की बड़ी योजना, 2029 तक मजबूत होगा कनेक्टिविटी नेटवर्क, सात से बढ़कर नौ होंगे रिंग रोड

मुंबई महानगर क्षेत्र में लगातार बढ़ते यातायात दबाव और शहर की सड़कों पर बढ़ती भीड़ को कम करने के लिए मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने रिंग रोड नेटवर्क को और विस्तार देने की योजना बनाई है। इसके तहत मौजूदा सात प्रस्तावित रिंग रोड के नेटवर्क में दो और रिंग रोड जोड़े जाएंगे। इन दोनों नए मार्गों की कुल लंबाई करीब 307 किलोमीटर होगी। खास बात यह है कि MMRDA पूरे 307 किलोमीटर के नए रास्ते नहीं बनाएगा, बल्कि मौजूदा सड़कों, समुद्री पुलों, तटीय मार्गों, सुरंगों और निर्माणाधीन परियोजनाओं को आपस में जोड़कर लगातार चलने वाले दो बड़े यातायात चक्र तैयार करेगा।

मुंबई ट्रैफिक को सुधारने की योजना

MMRDA के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य केवल मुंबई शहर के भीतर यातायात को बेहतर करना नहीं है, बल्कि मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, भिवंडी और उत्तरी उपनगरों को एकीकृत सड़क नेटवर्क से जोड़ना है। इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहनों को शहर के भीतरी और पहले से व्यस्त मार्गों पर जाने की जरूरत कम होगी। दोनों नए रिंग रोड को वर्ष 2029 तक पूरी तरह परिचालन में लाने का लक्ष्य रखा गया है।

सात से नौ होंगे रिंग रोड

MMRDA की नई योजना के बाद मुंबई महानगर क्षेत्र में प्रस्तावित रिंग रोड की संख्या सात से बढ़कर नौ हो जाएगी। इनमें से आठवां रिंग रोड करीब 197 किलोमीटर और नौवां रिंग रोड करीब 110 किलोमीटरलंबा होगा। आठवां मार्ग मुख्य रूप से ठाणे और नवी मुंबई को जोड़ते हुए मुंबई से जुड़ेगा, जबकि नौवां मार्ग दक्षिण मुंबई से पश्चिमी उपनगरों, बोरीवली और ठाणे होते हुए फिर पूर्वी मार्गों से दक्षिण मुंबई तक लौटेगा। MMRDA महानगर आयुक्त संजय मुखर्जी के मुताबिक, इस योजना का मूल विचार अलग-अलग सड़क परियोजनाओं को स्वतंत्र परियोजना मानने के बजाय पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र को एक एकीकृत सड़क नेटवर्कके रूप में विकसित करना है। यानी एक सड़क या पुल का फायदा केवल उसके आसपास के इलाके तक सीमित न रहे, बल्कि वह दूसरे बड़े मार्गों से जुड़कर लंबी दूरी के यातायात को भी वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराए।

आठवां रिंग रोड: सेवड़ी से नवी मुंबई और ठाणे तक

प्रस्तावित आठवां रिंग रोड सेवड़ी से शुरू होगा। इसका महत्वपूर्ण हिस्सा मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक यानी अटल सेतु से जुड़ेगा। इसके बाद यह ईस्टर्न फ्रीवे और ठाणे की ओर निर्माणाधीन उसके विस्तार का इस्तेमाल करेगा। ठाणे पहुंचने के बाद मार्ग आनंद नगर-साकेत ऊंचे मार्ग से आगे बढ़ेगा और फिर मुंबई-वडोदरा द्रुतगति मार्ग तथा राष्ट्रीय राजमार्ग-4बी के रास्ते चिर्ले की ओर जाएगा। वहां से यह मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक के माध्यम से वापस सेवड़ी से जुड़ जाएगा। इस तरह करीब 197 किलोमीटर का यह मार्ग मुंबई–ठाणे–नवी मुंबई के बीच एक बड़ा यातायात चक्र तैयार करेगा। इस रिंग रोड का एक बड़ा फायदा मालवाहक वाहनों और औद्योगिक यातायात को मिलने की उम्मीद है। एमएमआरडीए के अनुसार इससे ठाणे, नवी मुंबई और भिवंडी के बीच सीधा संपर्क मजबूत होगा तथा जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह क्षेत्र और दूसरे प्रमुख माल एवं विकास केंद्रों तक पहुंच बेहतर हो सकती है। ठाणे के अमाने जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिलने की संभावना है।

नौवां रिंग रोड: दक्षिण मुंबई से बोरीवली, ठाणे और फिर दक्षिण मुंबई

दूसरा यानी नौवां रिंग रोड करीब 110 किलोमीटर लंबा होगा। इसकी शुरुआत दक्षिण मुंबई के नरीमन प्वाइंट से होगी। यहां से मार्ग पश्चिमी तटीय सड़क नेटवर्क के जरिये उत्तर की ओर बढ़ेगा। यह मार्ग बांद्रा-वर्ली सी लिंक, वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक और उत्तरी तटीय मार्गों का इस्तेमाल करते हुए बोरीवली तक जाएगा। बोरीवली से यह ठाणे-बोरीवली जुड़वां सुरंग के माध्यम से ठाणे पहुंचेगा। इसके बाद ठाणे तटीय मार्ग, आनंद नगर-साकेत ऊंचे मार्ग और ईस्टर्न फ्रीवे के विस्तार के जरिये पूर्वी मुंबई की ओर बढ़ेगा। अंत में प्रस्तावित ऑरेंज गेट–मरीन ड्राइव सुरंग के जरिये यह मार्ग फिर नरीमन प्वाइंट से जुड़ जाएगा। इसका अर्थ यह है कि भविष्य में दक्षिण मुंबई से बोरीवली जाने वाले वाहन के लिए केवल पश्चिमी उपनगरों से होकर जाने का विकल्प नहीं रहेगा। वाहन बोरीवली से ठाणे की ओर जाकर पूर्वी सड़क नेटवर्क के माध्यम से फिर दक्षिण मुंबई लौट सकेंगे। इससे मुंबई और ठाणे के बीच यातायात के लिए एक वैकल्पिक चक्र उपलब्ध होगा।

कई बड़ी परियोजनाएं एक नेटवर्क में जुड़ेंगी

इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि रिंग रोड का बड़ा हिस्सा अलग से नई सड़क बनाने के बजाय पहले से मौजूद अथवा निर्माणाधीन परियोजनाओं को जोड़कर तैयार होगा। इसमें समुद्री पुल, तटीय सड़क, सुरंग, ऊंचे मार्ग और द्रुतगति मार्ग शामिल हैं। इस नेटवर्क में MMRDA के साथ-साथ बृहन्मुंबई महानगरपालिका, महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जैसी विभिन्न एजेंसियों की परियोजनाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इस तरह पहली बार अलग-अलग एजेंसियों की सड़क परियोजनाओं को एक बड़े क्षेत्रीय यातायात चक्र के रूप में देखने की कोशिश की जा रही है। MMRDA के मौजूदा परियोजना ढांचे में कल्याण रिंग रोड, ईस्टर्न फ्रीवे का छेड़ा नगर से ठाणे तक विस्तार, ठाणे तटीय मार्ग और कई अन्य क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाएं भी शामिल हैं। MMRDA की परियोजना सूची के मुताबिक कल्याण रिंग रोड का उद्देश्य बाहरी और लंबी दूरी के यातायात को कल्याण-डोंबिवली की आंतरिक सड़कों से हटाकर वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना है।

80 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति

दोनों प्रस्तावित रिंग रोड को नियंत्रित प्रवेश वाले मार्ग के रूप में विकसित करने की योजना है। इन पर डिजाइन गति करीब 80 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। प्रवेश और निकास बिंदुओं की संख्या सीमित रखी जाएगी और कुछ हिस्सों पर शुल्क वसूले जाने की संभावना है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि 307 किलोमीटर का पूरा नेटवर्क एक साथ तैयार हो जाएगा। इन रिंग रोड की सफलता उन कई परियोजनाओं पर निर्भर करेगी जो अभी निर्माणाधीन हैं या योजना के स्तर पर हैं। अलग-अलग परियोजनाओं के बीच सुचारु संपर्क के लिए नए रैंप, जोड़ मार्ग, चौराहों में सुधार और इंटरचेंज बनाने होंगे। इनका अंतिम स्वरूप विस्तृत तकनीकी और यातायात अध्ययन के बाद तय किया जाएगा।

कुछ मौजूदा मार्गों को भी चौड़ा करना पड़ सकता है

MMRDA इस बात का भी अध्ययन कर रहा है कि भविष्य के यातायात को देखते हुए कुछ मौजूदा मार्गों की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता होगी या नहीं। ईस्टर्न फ्रीवे और शिवड़ी-वर्ली संपर्क मार्ग जैसे कुछ हिस्सों में फिलहाल दोनों दिशाओं में दो-दो लेन हैं। यातायात अध्ययन, तकनीकी व्यवहार्यता और उपलब्ध भूमि के आधार पर इन मार्गों को भविष्य में चौड़ा करने पर विचार किया जा सकता है।

मुंबई की यातायात समस्या के लिए क्यों महत्वपूर्ण है योजना?

मुंबई में यातायात की बड़ी समस्या केवल वाहनों की संख्या बढ़ने से नहीं है। समस्या यह भी है कि शहर में आने-जाने वाला लंबी दूरी का यातायात कई बार ऐसे मार्गों से गुजरता है जो मूल रूप से स्थानीय आवागमन के लिए बनाए गए हैं। परिणामस्वरूप प्रमुख चौराहों, उपनगरों और शहर के भीतर की सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है। रिंग रोड की अवधारणा इसी समस्या को दूर करने की कोशिश करती है। यदि वाहन को शहर के बीच से होकर गुजरने के बजाय शहर के बाहर या किनारे से वैकल्पिक मार्ग मिल जाए, तो आंतरिक सड़कों पर यातायात का दबाव कम किया जा सकता है। MMRDA का कहना है कि नए नेटवर्क का उद्देश्य लंबी दूरी के यातायात को मुंबई और महानगर क्षेत्र की भीतरी भीड़भाड़ वाली सड़कों से हटाना है।

केवल सड़क नहीं, पूरे महानगर की नई परिवहन संरचना

MMRDA का रिंग रोड विस्तार उसकी व्यापक परिवहन रणनीति का हिस्सा है। प्राधिकरण के व्यापक परिवहन अध्ययन में महानगर क्षेत्र के लिए सड़क, मेट्रो, उपनगरीय रेल, बस, माल परिवहन और बहु-माध्यमीय संपर्क को एक साथ विकसित करने की आवश्यकता बताई गई है। अध्ययन में 2041 तक के लिए बड़े पैमाने पर परिवहन अवसंरचना विस्तार की सिफारिश की गई है। इसी क्रम में सुरंग आधारित सड़क नेटवर्क पर भी काम चल रहा है। MMRDA ने मुंबई में भूमिगत सड़क संपर्क के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसका उद्देश्य तटीय सड़क, बांद्रा-कुर्ला परिसर, हवाई अड्डे और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों के बीच यातायात संपर्क को बेहतर करना है।

असली चुनौती होगी समय पर परियोजनाओं का पूरा होना

रिंग रोड का नक्शा महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब इससे जुड़ी सभी परियोजनाएं समय पर पूरी हों। एक हिस्से के तैयार होने और दूसरे हिस्से के अधूरे रहने पर पूरा चक्र लगातार चलने वाले मार्ग में तब्दील नहीं हो सकेगा। इसके अलावा अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय, भूमि उपलब्धता, पर्यावरणीय मंजूरियां, यातायात प्रबंधन, निर्माण के दौरान मौजूदा सड़कों पर दबाव और परियोजनाओं की लागत भी महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी। MMRDA ने स्वयं माना है कि विभिन्न गलियारों के मिलन बिंदुओं पर संपर्क व्यवस्था और इंटरचेंज की अंतिम योजना विस्तृत तकनीकी तथा यातायात अध्ययन के बाद तय होगी।

2029 का लक्ष्य, मुंबई के लिए लंबी दूरी की नई राह

अगर प्रस्तावित दोनों रिंग रोड निर्धारित समयसीमा के अनुसार पूरे होते हैं, तो मुंबई महानगर क्षेत्र में सड़क संपर्क की तस्वीर काफी बदल सकती है। दक्षिण मुंबई, पश्चिमी उपनगर, बोरीवली, ठाणे, भिवंडी और नवी मुंबई को जोड़ने वाले ये चक्र शहर के भीतर से गुजरने वाले लंबी दूरी के यातायात के लिए वैकल्पिक रास्ते तैयार कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि मुंबई को केवल अलग-अलग पुलों, सुरंगों या सड़कों का समूह बनाने के बजाय एक आपस में जुड़ा हुआ क्षेत्रीय सड़क नेटवर्क मिले। MMRDA की नई योजना इसी सोच की ओर बड़ा कदम है। हालांकि 2029 का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है और इसकी सफलता निर्माणाधीन परियोजनाओं, अंतर-विभागीय समन्वय और समय पर तैयार होने वाले संपर्क मार्गों पर निर्भर करेगी।

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