मुंबई के ट्रैफिक को मिलेगा बड़ा विकल्प, मार्च 2027 से बन सकता है विरार-अलीबाग कॉरिडोर, 22 हजार करोड़ की जमीन अधिग्रहण लागत
मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के परिवहन ढांचे को बदलने वाली बहुप्रतीक्षित विरार-अलीबाग मल्टी-मॉडल कॉरिडोर परियोजना के निर्माण की दिशा में अब महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। केंद्र सरकार से परियोजना के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding-VGF) को मंजूरी मिलने की स्थिति में इसका निर्माण मार्च 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य मुंबई महानगर क्षेत्र के पश्चिमी, उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के बीच तेज और सीधी संपर्क व्यवस्था तैयार करना है। परियोजना के लिए केंद्र से कुल लागत के करीब 17 प्रतिशत के बराबर VGF की आवश्यकता बताई गई है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद परियोजना को निर्माण-संचालन-हस्तांतरण (Build-Operate-Transfer-BOT) मॉडल पर आगे बढ़ाने की योजना है। यानी निजी क्षेत्र परियोजना के निर्माण और निर्धारित अवधि तक उसके संचालन में भूमिका निभाएगा और तय व्यवस्था के अनुसार बाद में परियोजना का हस्तांतरण किया जाएगा।
जुड़ेंगे आर्थिक और परिवहन केंद्र
विरार-अलीबाग कॉरिडोर को केवल एक सड़क परियोजना के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसका मकसद मुंबई महानगर क्षेत्र में विकसित हो रहे कई बड़े आर्थिक और परिवहन केंद्रों को एक-दूसरे से जोड़ना है। कॉरिडोर के जरिए जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT), नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और अटल सेतुजैसे प्रमुख ढांचागत केंद्रों तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है। इससे मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में माल तथा यात्री यातायात के लिए वैकल्पिक मार्ग भी विकसित होगा।
17 प्रतिशत VGF पर टिकी परियोजना की अगली रफ्तार
विरार-अलीबाग मल्टी-मॉडल कॉरिडोर जैसी बड़ी परियोजनाओं में निर्माण लागत बहुत अधिक होने के कारण केवल यातायात से मिलने वाले संभावित राजस्व के आधार पर निजी निवेश आकर्षित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी वजह से VGF का प्रावधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। VGF मूल रूप से ऐसी सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता का माध्यम है, जिनका सामाजिक और आर्थिक महत्व तो बड़ा होता है, लेकिन उनसे मिलने वाला संभावित राजस्व परियोजना की पूरी लागत के अनुरूप नहीं होता। ऐसे मामलों में सरकार परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता बेहतर बनाने के लिए सहायता उपलब्ध कराती है। विरार-अलीबाग परियोजना के लिए प्रस्तावित VGF परियोजना लागत का लगभग 17 प्रतिशत बताया जा रहा है। केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद परियोजना को निजी भागीदारी के साथ आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में तेजी आ सकती है। इसी आधार पर मार्च 2027 के आसपास निर्माण शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
मुंबई महानगर क्षेत्र को मिलेगा नया संपर्क मार्ग
मुंबई महानगर क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में तेजी से फैल रहा है। मुंबई शहर के अलावा ठाणे, पालघर, नवी मुंबई, रायगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में आवासीय, औद्योगिक, वाणिज्यिक तथा परिवहन ढांचा तेजी से विकसित हुआ है। इसके साथ ही सड़क यातायात पर दबाव भी बढ़ा है। विरार-अलीबाग कॉरिडोर का प्रमुख उद्देश्य इसी बढ़ते दबाव को ध्यान में रखते हुए महानगर क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों के बीच एक वैकल्पिक और तेज संपर्क मार्ग तैयार करना है। विरार क्षेत्र मुंबई महानगर के उत्तरी-पश्चिमी हिस्से में स्थित है, जबकि अलीबाग रायगढ़ जिले में मुंबई के दक्षिण-पूर्वी हिस्से से जुड़ा हुआ है। वर्तमान में इन दोनों क्षेत्रों के बीच सीधा और तेज संपर्क सीमित है। प्रस्तावित कॉरिडोर इस दूरी को कम करने के साथ-साथ रास्ते में आने वाले कई महत्वपूर्ण औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों को भी जोड़ने का काम करेगा। इससे मुंबई के भीतर जाने की जरूरत कम हो सकती है और महानगर क्षेत्र के बाहरी हिस्सों के बीच सीधे आवागमन के विकल्प बढ़ सकते हैं। हालांकि, वास्तविक यात्रा समय में कितनी कमी आएगी, यह परियोजना की अंतिम संरचना, चरणबद्ध निर्माण और यातायात व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
JNPT, नवी मुंबई एयरपोर्ट और अटल सेतु से जुड़ाव
इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका उन बड़े बुनियादी ढांचा केंद्रों से जुड़ना है, जो आने वाले वर्षों में मुंबई क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और परिवहन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं। जवाहरलाल नेहरू पोर्ट देश के प्रमुख कंटेनर बंदरगाहों में शामिल है। बंदरगाह से निकलने वाले माल को मुंबई महानगर क्षेत्र, महाराष्ट्र के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों और देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने के लिए मजबूत सड़क संपर्क की आवश्यकता होती है। इसी तरह नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास आने वाले वर्षों में बड़ी मात्रा में यात्री और माल यातायात विकसित होने की संभावना है। एयरपोर्ट तक बेहतर क्षेत्रीय संपर्क उपलब्ध कराने में बड़े सड़क गलियारों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। दूसरी ओर अटल सेतु मुंबई और नवी मुंबई के बीच संपर्क को नया आयाम दे चुका है। ऐसे में विरार-अलीबाग कॉरिडोर को अटल सेतु और नवी मुंबई क्षेत्र के मौजूदा तथा प्रस्तावित सड़क नेटवर्क से जोड़ने से महानगर क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों के बीच यातायात के नए रास्ते विकसित हो सकते हैं। इसका फायदा केवल निजी वाहन चालकों को ही नहीं, बल्कि औद्योगिक माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी मिल सकता है।
आधे से ज्यादा जमीन का अधिग्रहण पूरा
इतनी बड़ी सड़क परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक भूमि अधिग्रहण होता है। विरार-अलीबाग कॉरिडोर के मामले में राहत की बात यह है कि परियोजना के लिए आवश्यक कुल जमीन में से आधे से अधिक भूमि का अधिग्रहण पहले ही किया जा चुका है। हालांकि, शेष भूमि का अधिग्रहण अभी भी महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। परियोजना की कुल भूमि अधिग्रहण लागत करीब 22,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। इतनी बड़ी राशि से स्पष्ट है कि कॉरिडोर के निर्माण में केवल सड़क और पुलों का निर्माण ही खर्च का बड़ा हिस्सा नहीं होगा, बल्कि जमीन की व्यवस्था भी परियोजना की कुल लागत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भूमि अधिग्रहण पूरा होने की गति सीधे निर्माण कार्य की प्रगति को प्रभावित कर सकती है। जिन हिस्सों में जमीन उपलब्ध होगी, वहां काम शुरू करना अपेक्षाकृत आसान होगा, जबकि शेष हिस्सों में अधिग्रहण पूरा होने तक निर्माण कार्यक्रम को चरणबद्ध करना पड़ सकता है।
BOT मॉडल में बनेगा कॉरिडोर
परियोजना को BOT मॉडल के तहत लागू करने की योजना है। इस व्यवस्था में निजी कंपनी या निजी समूह परियोजना के निर्माण में निवेश करता है और तय अवधि तक सड़क का संचालन तथा रखरखाव करता है। इस दौरान परियोजना से मिलने वाले राजस्व के माध्यम से निवेश की भरपाई की जाती है। तय अवधि समाप्त होने के बाद परियोजना संबंधित सरकारी प्राधिकरण को हस्तांतरित की जाती है। लेकिन इतनी बड़ी परियोजना में निजी निवेश आकर्षित करने के लिए परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता महत्वपूर्ण होती है। यही कारण है कि VGF को परियोजना के लिए अहम माना जा रहा है। सरकार की वित्तीय सहायता से परियोजना का वित्तीय अंतर कम किया जा सकता है और निजी निवेशकों के लिए परियोजना अधिक व्यवहार्य बन सकती है। केंद्र की मंजूरी इसलिए निर्माण शुरू होने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण अगला कदम होगी।
केवल सड़क नहीं, पूरा परिवहन गलियारा
‘मल्टी-मॉडल कॉरिडोर’ का अर्थ केवल एक सामान्य राजमार्ग से अधिक व्यापक है। इसका उद्देश्य विभिन्न परिवहन माध्यमों और प्रमुख आर्थिक केंद्रों को एकीकृत संपर्क देना है। विरार-अलीबाग परियोजना को भी इसी व्यापक दृष्टिकोण से विकसित करने की योजना है। मुंबई महानगर क्षेत्र में आने वाले वर्षों में सड़क, रेल, मेट्रो, बंदरगाह और हवाई परिवहन का विस्तार होना है। ऐसे में किसी एक परिवहन माध्यम पर निर्भरता कम करना और विभिन्न क्षेत्रों के बीच संपर्क बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा। विरार-अलीबाग कॉरिडोर इस दृष्टि से क्षेत्रीय संपर्क की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है। विशेष रूप से नवी मुंबई, रायगढ़ और पालघर क्षेत्र में विकसित हो रहे औद्योगिक और शहरी केंद्रों को आपस में जोड़ने में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
माल ढुलाई के लिए भी महत्वपूर्ण
मुंबई महानगर क्षेत्र देश के सबसे बड़े आर्थिक क्षेत्रों में से एक है। यहां बंदरगाह, हवाई अड्डे, औद्योगिक क्षेत्र, गोदाम और वितरण केंद्र तेजी से विकसित हो रहे हैं। इन सभी के बीच माल की आवाजाही के लिए तेज सड़क संपर्क जरूरी है। JNPT और नवी मुंबई क्षेत्र से निकलने वाला माल यदि महानगर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों से होकर गुजरने के बजाय बाहरी संपर्क मार्गों से आगे बढ़ सके, तो लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में सुधार हो सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव परियोजना पूरी होने और उससे जुड़ने वाले अन्य सड़क नेटवर्क के संचालन के बाद ही स्पष्ट होगा। विरार और पालघर क्षेत्र में भी औद्योगिक तथा आवासीय विकास बढ़ रहा है। इसलिए यह कॉरिडोर उत्तर और दक्षिण के बीच माल तथा यात्री यातायात के लिए एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध करा सकता है।
मुंबई के यातायात दबाव को कम करने की उम्मीद
मुंबई महानगर क्षेत्र में यातायात की समस्या का एक बड़ा कारण यह है कि कई क्षेत्रों के बीच यात्रा के लिए वाहन मौजूदा प्रमुख मार्गों पर निर्भर रहते हैं। शहर के भीतर से होकर गुजरने वाले यातायात का एक हिस्सा यदि बाहरी क्षेत्रीय मार्गों की ओर स्थानांतरित किया जा सके तो कुछ प्रमुख सड़कों पर दबाव कम किया जा सकता है। विरार-अलीबाग कॉरिडोर का पूरा नेटवर्क तैयार होने के बाद इसका प्रभाव केवल इस मार्ग पर ही नहीं, बल्कि इससे जुड़े अन्य राजमार्गों और संपर्क सड़कों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, यातायात का वास्तविक वितरण परियोजना के पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
मार्च 2027 की समयसीमा कितनी महत्वपूर्ण?
परियोजना के निर्माण को मार्च 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य केंद्र से VGF मंजूरी मिलने पर निर्भर है। इसके अलावा BOT व्यवस्था के तहत निजी भागीदार का चयन, वित्तीय समझौते, शेष भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण और अन्य आवश्यक अनुमतियां तथा निर्माण की विस्तृत योजना जैसे कई चरण पूरे करने होंगे। इसलिए मार्च 2027 को फिलहाल संभावित निर्माण शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि परियोजना के निर्माण शुरू होने की अंतिम और निश्चित तारीख के रूप में। केंद्र की वित्तीय मंजूरी और उसके बाद की प्रशासनिक प्रक्रिया इसकी दिशा तय करेगी।
मुंबई क्षेत्र के भविष्य के लिए अहम परियोजना
मुंबई महानगर क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचा विकास हुआ है। अटल सेतु, नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, मेट्रो नेटवर्क, नए एक्सप्रेसवे और क्षेत्रीय सड़क परियोजनाएं मिलकर महानगर की परिवहन व्यवस्था को नया रूप दे रही हैं। विरार-अलीबाग मल्टी-मॉडल कॉरिडोर इसी व्यापक नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनने की योजना है। इसके जरिए मुंबई के उत्तरी-पश्चिमी हिस्से को रायगढ़ और नवी मुंबई के दक्षिणी हिस्से से बेहतर तरीके से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। करीब 22,000 करोड़ रुपये के भूमि अधिग्रहण खर्च, 17 प्रतिशत VGF की प्रस्तावित सहायता और BOT मॉडल के कारण यह परियोजना वित्तीय तथा प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बड़ी परियोजना है। आधे से अधिक भूमि अधिग्रहण पूरा हो जाना इसकी प्रगति का महत्वपूर्ण संकेत है, लेकिन शेष जमीन, वित्तीय मंजूरी और निजी भागीदारी से जुड़े चरण अभी महत्वपूर्ण हैं।
यदि केंद्र से VGF प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है और बाकी प्रक्रियाएं निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो मार्च 2027 से निर्माण शुरू होने की दिशा में परियोजना आगे बढ़ सकती है। पूरा होने के बाद यह कॉरिडोर मुंबई महानगर क्षेत्र में यातायात के मौजूदा ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ बंदरगाह, हवाई अड्डे और प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच संपर्क को नया विकल्प दे सकता है।
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