दिवालिया कोचिंग संस्थान के संचालक की सिफारिश से BMC में खड़ा हुआ विवाद, मेयर ने बताई फर्जी

The CSR Journal Magazine
मुंबई की मेयर रितु तावड़े के एक सिफारिशी पत्र को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। आरोप लगाया गया है कि इस पत्र के जरिए दिवालिया हो चुके कोचिंग संस्थान के संचालक की नियुक्ति करने का अनुरोध किया गया। हालांकि, मेयर ने इस पत्र को पूरी तरह से फर्जी करार दिया है। विपक्षी नेता किशोरी पेडनेकर ने मेयर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

पत्र की सच्चाई पर बहस

महीनों से विवादों का सामना कर रही मेयर रितु तावड़े ने इस पत्र को अपने खिलाफ एक साजिश बताया है। उनका दावा है कि उनका नाम और सिग्नेचर का गलत इस्तेमाल कर उन्हें फंसाने की कोशिश की गई है। तावड़े ने पत्र की जांच कराने का भी वादा किया है और इस मामले को गंभीरता से लेने का संकेत दिया है।

शिक्षा समिति के अध्यक्ष का बयान

इस बीच, शिक्षा समिति की अध्यक्ष राजश्री शिरवाडकर ने कहा है कि पत्र उन्हें मेयर कार्यालय से ही मिला था। इससे मेयर के दावों पर सवाल उठते हैं। इसके आधार पर उन्होंने बीएमसी प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए अपने कवरिंग लेटर के माध्यम से निर्देश भी दिए हैं। इस पर दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।

विपक्ष ने उठाए आरोप, महापौर की लागत पर सवाल

किशोरी पेडनेकर ने आरोप लगाया है कि मेयर रितु तावड़े पदभार ग्रहण करने के बाद से निरंतर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उन्होंने कहा कि मेयर ने बिना किसी जांच के इस संदिग्ध व्यक्ति को सिफारिश की है। रितु तावड़े का कार्यकाल कई विवादों में घिरा रहा है, जिससे मुंबई की महापौर के पत्राचार की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। रितु तावड़े की कार्यशैली पर विपक्षी दलों में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। उदाहरण के लिए, उन्होंने लगभग 35 लाख रुपये की आलिशान कार की मांग की थी, जिसे विपक्ष ने जनता के धन की बर्बादी कहा। इसके अलावा, भायकला में उनकी रिहायशी बंगले का नवीनीकरण भी एक बड़ा विवाद बना है।

सोशल मीडिया खर्च पर बवाल

दूसरी ओर, महापौर के कार्यालय द्वारा सोशल मीडिया प्रबंधन पर लगभग 25 लाख रुपये खर्च करने का प्रस्ताव भी चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पर न केवल विपक्ष ने सवाल उठाए, बल्कि सत्ताधारी गठबंधन में भी असंतोष जता गया। महापौर ने कहा है कि यह सेवा पिछले कुछ वर्षों से चल रही है और इसमें उनका कोई निजी लाभ नहीं है।

भविष्य की चुनौतियाँ

इन सभी विवादों ने मुंबई नगर निगम के प्रशासन की कार्यशैली पर गहरे सवाल खड़े किए हैं। महापौर पर लगे आरोपों से स्पष्ट होता है कि वे राजनीतिक दृष्टि से एक कठिन दौर से गुजर रही हैं। इस समय, शिक्षा और विकास के मुद्दे भी सख्त निगरानी में हैं, जिनका बुरा प्रभाव होने की आशंका बनी हुई है।

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