मुंबई में ‘सुविधा केंद्र’ की नई सौगात: 24 घंटे शौचालय, स्नान, शुद्ध पानी और लॉन्ड्री; 150 रुपये में मिलेगा पारिवारिक पास
महानगर में स्वच्छता और बुनियादी जनसुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत दहिसर पूर्व के सावरपाड़ा में नया ‘सुविधा केंद्र’ शुरू किया गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री तथा उत्तर मुंबई के सांसद पीयूष गोयल ने इस केंद्र का उद्घाटन वर्चुअल माध्यम से किया। यह मुंबई का 26वां सुविधा केंद्र बताया गया है, जहां स्थानीय नागरिकों को स्वच्छ शौचालय, स्नान, कपड़े धोने और शुद्ध पेयजल जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। सबसे खास बात यह है कि केंद्र 24 घंटे संचालित होगा। पांच सदस्यों वाले एक परिवार को 150 रुपये प्रति माह में असीमित शौचालय उपयोग की सुविधा मिलेगी। हालांकि 150 रुपये की राशि में सभी सेवाएं शामिल नहीं हैं—आरओ-फिल्टर्ड पेयजल 1 रुपये प्रति लीटर और 7 किलो कपड़ों की लॉन्ड्री 70 रुपये में उपलब्ध होगी।
29 टॉयलेट सीट और 6 लॉन्ड्री मशीनें
सावरपाड़ा स्थित इस आधुनिक सुविधा केंद्र में कुल 29 टॉयलेट सीट, 6 लॉन्ड्री मशीनें और जल शुद्धीकरण की व्यवस्था की गई है। यहां रहने वाले लोगों को विशेष रूप से उन बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिलेगा, जिनके लिए पहले उन्हें अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ता था। शहरी इलाकों, विशेषकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में, स्वच्छ और सुरक्षित सार्वजनिक शौचालयों की उपलब्धता लंबे समय से एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है। ऐसे में शौचालय, स्नान, कपड़े धोने और शुद्ध पेयजल की सेवाओं को एक ही परिसर में उपलब्ध कराने वाला यह मॉडल नागरिक सुविधाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
CSR और PPP मॉडल से तैयार हुआ केंद्र
यह सुविधा केंद्र कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP)मॉडल के तहत तैयार किया गया है। इस पहल में Hindustan Unilever Limited, HSBC India, JSW Foundation और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की भागीदारी बताई गई है। इस मॉडल का उद्देश्य केवल सरकारी संसाधनों पर निर्भर रहने के बजाय निजी क्षेत्र, सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय प्रशासन की साझेदारी से नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
पर्यावरण और टिकाऊ निर्माण पर भी जोर
सावरपाड़ा सुविधा केंद्र को पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ डिजाइन के आधार पर तैयार किया गया है। निर्माण में ग्रीन स्टील और ग्रीन सीमेंट का उपयोग किया गया है। इसके अलावा केंद्र में रूफटॉप सोलर सिस्टम और ग्रेवॉटर रिसाइक्लिंग जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं। मुंबई में मानसून और जलभराव की समस्या को ध्यान में रखते हुए केंद्र को जमीन से करीब तीन फीट ऊंचा बनाया गया है, ताकि बाढ़ या जलभराव की स्थिति में सुविधा केंद्र की सेवाएं प्रभावित होने की संभावना कम हो।
उत्तर मुंबई में 100 सुविधा केंद्र बनाने की बात
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि उत्तर मुंबई के प्रत्येक व्यक्ति को स्वच्छ शौचालय, शुद्ध पानी, स्नान और अन्य आधुनिक बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच मिलनी चाहिए। उन्होंने जरूरत पड़ने पर उत्तर मुंबई में 100 तक ऐसे सुविधा केंद्र विकसित करने की बात कही। उन्होंने यह भी बताया कि पहले से शुरू किए गए एक सुविधा केंद्र का प्रतिदिन 1,500 से अधिक लोग उपयोग कर रहे हैं। गोयल ने ऐसे केंद्रों के संचालन और रखरखाव में स्थानीय समुदायों, खासकर महिला स्वयं सहायता समूहों, की बड़ी भूमिका होने पर जोर दिया।
महिलाओं और स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर जोर
सार्वजनिक सुविधाओं का निर्माण जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी उनका नियमित रखरखाव भी है। इसीलिए स्थानीय समुदाय और महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी को इस मॉडल का अहम हिस्सा माना जा रहा है। महिला समूहों के माध्यम से संचालन होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हो सकती है। साथ ही, सुविधा केंद्रों की सफाई, सुरक्षा और नियमित रखरखाव में समुदाय की सीधी भागीदारी संभव होगी।
स्वच्छता को ‘सम्मान और गरिमा’ से जोड़ने की पहल
पीयूष गोयल ने अपने संबोधन में सार्वजनिक स्वच्छता को नागरिकों की गरिमा से जुड़ा विषय बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का उल्लेख किया, जिसमें खुले में शौच की समस्या को प्रमुखता से उठाया गया था। उन्होंने कहा कि इसके बाद देश में स्वच्छता को लेकर सोच में बड़ा बदलाव आया और शौचालयों की उपलब्धता को बुनियादी आवश्यकता के रूप में देखा जाने लगा।
मुंबई के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सुविधा केंद्र?
मुंबई जैसे अत्यधिक घनी आबादी वाले महानगर में लाखों लोगों के लिए साफ-सुथरे सार्वजनिक शौचालय, स्नानघर, पेयजल और कपड़े धोने की सुविधाएं रोजमर्रा की जरूरत हैं। कम आय वाले और सीमित जगह वाले घरों में रहने वाले परिवारों के लिए ऐसी सामुदायिक सुविधाएं विशेष रूप से उपयोगी हो सकती हैं। 150 रुपये का मासिक शुल्क पांच सदस्यीय परिवार के लिए असीमित शौचालय उपयोग की सुविधा प्रदान करता है, जबकि पानी और लॉन्ड्री के लिए अलग शुल्क तय किया गया है। यह मॉडल सार्वजनिक सुविधाओं को अपेक्षाकृत किफायती और व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराने की दिशा में एक प्रयास है।
उत्तर मुंबई के तालाबों की सफाई का भी जिक्र
कार्यक्रम के दौरान गोयल ने उत्तर मुंबई में चल रहे पर्यावरण और स्वच्छता अभियानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में नौ तालाबों की सफाई और सौंदर्यीकरण का काम किया जा रहा है, जिसमें एक तालाब का काम पूरा होने और अगले पर कार्य शुरू होने की जानकारी दी गई। उन्होंने युवाओं से भी अपने क्षेत्रों की सफाई और पर्यावरण संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर टीम बनाकर आगे आने की अपील की।
मुंबई की सार्वजनिक स्वच्छता मुहिम
दहिसर के सावरपाड़ा में शुरू हुआ नया ‘सुविधा केंद्र’ मुंबई की सार्वजनिक स्वच्छता व्यवस्था में एक नई कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। 24 घंटे उपलब्ध सेवा, 29 टॉयलेट सीट, 6 लॉन्ड्री मशीनें, शुद्ध पेयजल, स्नान की सुविधा और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण इसे सामान्य सार्वजनिक शौचालय से अलग बनाते हैं। यदि इस तरह के केंद्रों का संचालन और रखरखाव प्रभावी ढंग से किया गया तथा इन्हें मुंबई के अन्य घनी आबादी वाले क्षेत्रों तक विस्तार दिया गया, तो लाखों नागरिकों को स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं का बेहतर लाभ मिल सकता है। फिलहाल सावरपाड़ा का यह केंद्र मुंबई के नागरिक सुविधा मॉडल में एक महत्वपूर्ण प्रयोग के तौर पर सामने आया है।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!
App Store – https://apps.apple.com/in/ app/newspin/id6746449540
Google Play Store – https://play.google.com/

