मुंबई में नॉनवेज चॉकलेट पर शाकाहारी निशान लगाने का आरोप, फूड स्क्वायर के मैनेजर और लेबलिंग कर्मचारियों पर मामला दर्ज
मुंबई के सांताक्रूज पश्चिम स्थित खाद्य उत्पादों के एक स्टोर में चॉकलेट की गलत लेबलिंग का मामला सामने आया है। आरोप है कि ऐसी चॉकलेट, जिसमें मांसाहारी सामग्री होने की बात कही गई है, उसे हरे शाकाहारी निशान वाले आवरण में बेचा गया। इस मामले में सांताक्रूज पुलिस ने लिंकिंग रोड स्थित फूड स्क्वायर के मैनेजर और लेबलिंग विभाग से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। शिकायत एक 29 वर्षीय महिला ने की थी, जिसने आरोप लगाया कि पैकेट पर बने हरे निशान के कारण उसने चॉकलेट को शाकाहारी समझकर खरीदा था। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
खरीदारी से शिकायत तक, क्या है पूरा मामला?
प्राप्त समाचार रिपोर्टों के अनुसार, अंधेरी के जेबी नगर में रहने वाली 29 वर्षीय वकील सिमरन चिराग जैन ने 4 अक्टूबर 2026 को सांताक्रूज पश्चिम के लिंकिंग रोड स्थित फूड स्क्वायर से चॉकलेट खरीदी थी। उनका आरोप है कि पैकेट पर हरा शाकाहारी निशान बना होने के कारण उन्होंने उत्पाद को शाकाहारी समझा और इसी आधार पर उसे खरीदा। शिकायत के मुताबिक, 8 अक्टूबर को उनके पति चिराग ने चॉकलेट के पैकेट पर लिखी सामग्री की सूची देखी। इस दौरान उन्हें कथित तौर पर पता चला कि उत्पाद में ऐसी सामग्री शामिल थी, जिसे शिकायतकर्ता ने मांसाहारी माना। इसके बाद महिला ने पुलिस से संपर्क किया और आरोप लगाया कि उत्पाद पर शाकाहारी निशान होने से उन्हें उसकी वास्तविक सामग्री के बारे में भ्रम हुआ।
पुलिस ने शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर 9 अक्टूबर को मामला दर्ज किया। इसमें स्टोर के मैनेजर और लेबलिंग विभाग से जुड़े अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। हालांकि, अभी यह साबित नहीं हुआ है कि गलत निशान जानबूझकर लगाया गया था या यह किसी उत्पादन, पैकेजिंग अथवा लेबलिंग संबंधी त्रुटि का परिणाम था। इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
खाद्य पदार्थों पर हरे और भूरे निशान का क्या है नियम?
इस मामले की गंभीरता को समझने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के खाद्य पदार्थों की लेबलिंग संबंधी नियमों को जानना जरूरी है। पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर शाकाहारी या मांसाहारी होने की जानकारी देना उपभोक्ताओं को सही विकल्प चुनने में मदद करता है।
हरा निशान- शाकाहारी खाद्य पदार्थ- पैकेट पर हरे रंग से भरा वृत्त और उसके चारों ओर हरे रंग का वर्गाकार निशान शाकाहारी खाद्य पदार्थ की पहचान है।
भूरा निशान- मांसाहारी खाद्य पदार्थ- भूरे रंग से भरा त्रिकोण और उसके चारों ओर भूरे रंग का वर्गाकार निशान मांसाहारी खाद्य पदार्थ की पहचान करता है। इसमें अंडे, मांस, मछली या उनसे प्राप्त सामग्री वाले उत्पाद भी शामिल हो सकते हैं।
क्या कहते हैं FSSAI के नियम
FSSAI के लेबलिंग नियमों के अनुसार, पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर संबंधित श्रेणी का निशान निर्धारित तरीके से प्रदर्शित करना आवश्यक है। इसलिए यदि किसी उत्पाद में मांसाहारी सामग्री होने के बावजूद उस पर शाकाहारी निशान लगा हो, तो यह लेबलिंग नियमों के उल्लंघन का मामला बन सकता है। इस मामले में जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी होगा कि चॉकलेट में वास्तव में कौन-सी सामग्री मौजूद थी, उसके पैकेट पर क्या घोषणा की गई थी और उत्पाद की लेबलिंग की जिम्मेदारी किसकी थी। केवल शिकायत के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन जानबूझकर किया गया।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सांताक्रूज पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) तथा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 52 और 26(2)(ii) के तहत मामला दर्ज किया है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 धोखाधड़ी से संबंधित है। इसकी उपधारा (4) ऐसे मामलों से जुड़ी है, जिनमें धोखाधड़ी के जरिए किसी व्यक्ति को संपत्ति सौंपने या मूल्यवान प्रतिभूति बनाने, बदलने अथवा नष्ट करने के लिए बेईमानी से प्रेरित किया जाता है। इस मामले में इस धारा का इस्तेमाल किन तथ्यों के आधार पर किया गया है, यह पुलिस की जांच और आगे की कानूनी कार्यवाही से स्पष्ट होगा।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 52 गलत ब्रांडिंग या भ्रामक लेबलिंग से संबंधित दंड का प्रावधान करती है। वहीं, धारा 26(2)(ii) खाद्य कारोबार संचालकों की उस जिम्मेदारी से जुड़ी है, जिसके तहत उन्हें यह सुनिश्चित करना होता है कि उनके नियंत्रण में मौजूद खाद्य पदार्थ अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुरूप हों। यह ध्यान रखना जरूरी है कि मामला दर्ज होने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। आरोपियों की भूमिका, उत्पाद की वास्तविक संरचना और लेबलिंग में हुई कथित गड़बड़ी की जिम्मेदारी जांच के बाद ही तय की जा सकती है।
उपभोक्ताओं के अधिकारों से जुड़ा मामला
खाद्य पदार्थों की सही जानकारी केवल औपचारिकता नहीं है। अनेक लोग धार्मिक मान्यताओं, व्यक्तिगत पसंद या खानपान संबंधी प्रतिबद्धताओं के कारण शाकाहारी भोजन चुनते हैं। ऐसे में यदि किसी उत्पाद पर गलत निशान लगा हो, तो उपभोक्ता अनजाने में अपनी पसंद के विपरीत खाद्य पदार्थ खरीद सकता है। चॉकलेट जैसे उत्पादों में भी सामग्री की सूची और शाकाहारी-मांसाहारी पहचान महत्वपूर्ण होती है। किसी उत्पाद का नाम, उसका रंग, स्वाद या आकर्षक पैकेजिंग उसकी वास्तविक श्रेणी की पुष्टि नहीं करते। उपभोक्ता के लिए पैकेट पर दी गई सामग्री की सूची और निर्धारित पहचान चिह्न दोनों उपयोगी हैं। इस तरह की शिकायतें यह सवाल भी उठाती हैं कि खाद्य उत्पादों की आपूर्ति, पैकेजिंग, लेबलिंग और खुदरा बिक्री की अलग-अलग प्रक्रियाओं में गुणवत्ता नियंत्रण कितना प्रभावी है। यदि किसी स्तर पर गलती होती है, तो उसका असर सीधे उपभोक्ता के भरोसे पर पड़ता है।
अब आगे क्या हो सकता है?
इस मामले में पुलिस की जांच के दौरान चॉकलेट के पैकेट, उस पर छपी सामग्री की सूची, खरीदारी से संबंधित दस्तावेजों और लेबलिंग की प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। संबंधित उत्पाद का नमूना लेकर उसकी सामग्री की पुष्टि करना और जरूरत पड़ने पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की सहायता लेना भी जांच के लिए उपयोगी होगा। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इन सभी कदमों के पूरा हो जाने की पुष्टि नहीं है। जांच में यह भी स्पष्ट करना होगा कि कथित गलत निशान निर्माता या पैकेजिंग के स्तर पर लगाया गया था अथवा खुदरा बिक्री से जुड़ी किसी प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि संबंधित लोगों की व्यक्तिगत और व्यावसायिक जिम्मेदारी क्या बनती है। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन साबित होता है, तो लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई हो सकती है। दूसरी ओर, आरोपियों को अपना पक्ष रखने और कानून के तहत बचाव करने का अधिकार भी प्राप्त है।
उपभोक्ता ऐसी स्थिति में क्या करें?
खाद्य पदार्थ खरीदते समय पैकेट पर बने शाकाहारी या मांसाहारी निशान के साथ सामग्री की सूची, निर्माता का नाम, बैच नंबर, निर्माण और समाप्ति की तारीख तथा अन्य जरूरी घोषणाएं देखना बेहतर है। यदि पैकेट पर दिए गए निशान और सामग्री की सूची में विरोधाभास दिखाई दे, तो पैकेट और खरीदारी की रसीद सुरक्षित रखनी चाहिए। ऐसी शिकायत खाद्य सुरक्षा विभाग के समक्ष भी उठाई जा सकती है। शिकायत करते समय उत्पाद का नाम, बैच नंबर, खरीदारी की तारीख और पैकेट की स्पष्ट तस्वीर उपलब्ध कराने से मामले की जांच में मदद मिल सकती है। फिलहाल, मुंबई के फूड स्क्वायर से जुड़ा यह मामला कथित गलत लेबलिंग और उपभोक्ता को भ्रमित किए जाने के आरोपों पर आधारित है। पुलिस ने मैनेजर और लेबलिंग विभाग से जुड़े लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, लेकिन उत्पाद में मौजूद सामग्री, गलती के कारण और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है। मामले का नतीजा जांच और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।
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