नई दिल्ली (Mobile Science Program India). विज्ञान सिर्फ किताबों और चार दीवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे आस-पास की हर घटना में छिपा हुआ है। लेकिन देश के कई गांवों में बच्चों ने कभी सही से साइंस लैब नहीं देखी है। उनके लिए विज्ञान सिर्फ कुछ फॉर्मूले और परिभाषाएं बनकर रह गया है। इस खाई को पाटने के लिए ‘मोबाइल साइंस प्रोग्राम’ जैसी पहल शुरू की गई है।
सपनों की दुनिया, पहियों पर चलती लैब
मोबाइल साइंस प्रोग्राम कोई साधारण बस नहीं है, बल्कि यह एक चलती-फिरती लैब है जो बच्चों के पास जाकर उन्हें विज्ञान का अनुभव कराती है। जब यह वैन गांवों में पहुंचती है, तो बच्चों की आंखों में चमक देखने लायक होती है। इस प्रोग्राम के तहत आधुनिक उपकरणों से लैस वैन या बस गांवों का दौरा करती है, जहां बच्चे खुद अपने हाथों से साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट करते हैं।
क्यों जरूरी है मोबाइल साइंस प्रोग्राम?
इस प्रोग्राम से न केवल रटने की आदत छूटती है, बल्कि बच्चों की विषयों की समझ भी गहराई से विकसित होती है। रॉकेट साइंस के बेसिक फंडे हों या गणित के कठिन नियम, सब कुछ खेल-खेल में सिखाया जाता है। जानिए यह चलती-फिरती लैब कैसे काम करती है और इससे शिक्षा की तस्वीर कैसे बदल रही है।
कैसे काम करता है मोबाइल साइंस प्रोग्राम?
मोबाइल साइंस प्रोग्राम एक अनूठी व्यवस्था है, जिसमें विज्ञान के सभी जरूरी उपकरण, मॉडल और प्रोजेक्ट्स को विशेष रूप से डिजाइन की गई बस या वैन में रखा जाता है। यह गाड़ी अलग-अलग गांवों और सरकारी स्कूलों तक जाती है। वहां पहुंचकर वैन के दरवाजे खुलते ही चलती-फिरती आधुनिक लैब सामने आ जाती है। प्रशिक्षित शिक्षक बच्चों को इन उपकरणों के जरिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के एक्सपेरिमेंट लाइव करके दिखाते हैं।
प्रैक्टिकल लर्निंग पर जोर
शिक्षा प्रणाली में आज भी थ्योरी रटने पर ज्यादा जोर दिया जाता है। बच्चे परीक्षा पास करने के लिए फॉर्मूले याद तो कर लेते हैं, लेकिन उनके पीछे की साइंस नहीं समझ पाते। मोबाइल साइंस प्रोग्राम इस कमी को दूर करता है। जब बच्चा खुद अपने हाथ से चुंबक के खेल देखता है या माइक्रोस्कोप से पानी की बूंद में जीव देखता है, तो उसका दिमाग तेजी से काम करना शुरू कर देता है।
नई उम्मीद ग्रामीण बच्चों के लिए
देश के कई ग्रामीण स्कूलों में बजट की कमी के कारण पक्की लैबोरेटरी और महंगे उपकरण होना सपना है। ऐसे में मोबाइल साइंस वैन उन बच्चों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। यह बच्चों को बराबरी का मंच देती है, जो संसाधनों के अभाव में पीछे छूट जाते हैं। जब कोई ग्रामीण बच्चा शहर के कॉन्वेंट स्कूल के बच्चों की तरह रोबोटिक्स और बेसिक साइंस के मॉडल खुद छूकर देखता है, तो उसका आत्मविश्वास आसमान छूने लगता है।
शिक्षकों के लिए भी सहारा
मोबाइल साइंस प्रोग्राम सिर्फ छात्रों के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षकों के लिए भी एक बड़ा सपोर्ट सिस्टम है। कई बार शिक्षकों के पास भी आधुनिक तरीकों से पढ़ाने के साधन नहीं होते। जब मोबाइल साइंस टीम स्कूल पहुंचती है, तो वे शिक्षकों को भी नए एक्सपेरिमेंट करने और आसान तरीकों से कठिन विषय समझाने के गुर सिखाती है। इससे पूरे स्कूल का शैक्षणिक माहौल बदल जाता है।
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