दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर बड़ा एक्शन, सर्दियों से पहले ही शुरू हुई तैयारी

The CSR Journal Magazine

सर्दियों से पहले की तैयारी तेज

दिल्ली-एनसीआर में अक्टूबर के महीने आते ही वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने लगता है। इस बार प्रशासन ने प्रदूषण बढ़ने का इंतजार करने के बजाय पहले से तैयारियों को तेज कर दिया है। शहर में प्रदूषण से निपटने के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया गया है, जिसे प्रभावी ढंग से लागू करने की योजना बनाई गई है। मुख्य रूप से सड़क पर जमा धूल, गाड़ियों के धुएं, कंस्ट्रक्शन का मलबा और खुले में कचरा जलाने के कारण वायु गुणवत्ता खराब होती है।

धूल पर मशीनों का प्रभाव

हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के बीच हुई मीटिंग में एनसीआर की वायु गुणवत्ता सुधारने की योजनाओं पर चर्चा हुई। इसके तहत उत्तर प्रदेश के एनसीआर के 8 जिलों में सड़क की धूल को साफ करने के लिए मशीनों का उपयोग किया जाएगा। यह उठाया गया कदम स्पॉट पर धूल को हटाने के बजाय गहरे स्तर पर सफाई करेगा ताकि हवा में धूल न उड़ सके।

पराली जलाने की घटनाओं में कमी

हर साल अक्टूबर और नवंबर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के संदर्भ में पराली जलाने का मामला सामने आता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है। 2021 में पराली जलाने की घटनाएं 78,550 थीं, जो 2025 में घटकर केवल 6,080 रह गईं। इसके बावजूद, दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ है। इसलिए, अन्य स्रोतों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।

इंडस्ट्री में प्रदूषण की निगरानी

उत्तर प्रदेश के एनसीआर जिलों में औद्योगिक प्रदूषण की रीयल टाइम मॉनिटरिंग को बढ़ावा दिया गया है। अब औद्योगिक इकाइयों में ऑनलाइन कंटिन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) लगाए जाएंगे, जिससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कौन सी इकाई कितना प्रदूषण फैला रही है। यह डेटा यह निर्धारित करेगा कि प्रदूषण की वृद्धि का कारण धूल है, ट्रैफिक है, या फिर उद्योगों का प्रदूषण।

नई रणनीतियाँ और कदम

कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में नया ग्रैंड रेगुलेटरी एक्शन प्लान (GRAP) तैयार किया है। यह योजना मौसम और एयर क्वालिटी के पूर्वानुमान के आधार पर कुछ कदम उठाने की तैयारी में है। इनमें आवश्यकता होने पर पार्किंग फीस बढ़ाना, वर्क फ्रॉम होम का सुझाव देना, कंस्ट्रक्शन पर रोक लगाना और गाड़ियों पर पाबंदियां शामिल हैं।

सहमति की आवश्यकता

इस बार रणनीति का तरीका बदलने की कोशिश की गई है। पहले हवा खराब होने का इंतज़ार करने के बजाय, इसे रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, मशीनों और मॉनिटरिंग सिस्टम के बावजूद सवाल यह है कि प्रदूषण पैदा होने से पहले उसे रोकने में कितनी सफलता मिली है। इसलिए, प्रशासन को अब ये सुनिश्चित करना होगा कि सड़कें साफ रहें और खुले में कचरा न जलाया जाए।

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