नागपुर के गोधनी में क्लोरीन गैस लीक से हड़कंप, 52 लोग अस्पताल में भर्ती, 900 किलो के क्लोरीन सिलेंडर से रिसाव की आशंका
महाराष्ट्र के नागपुर में सोमवार तड़के क्लोरीन गैस के रिसाव से हड़कंप मच गया। गोधनी इलाके के एक जल उपचार संयंत्र में हुई गैस रिसाव की घटना के बाद आसपास के रिहायशी इलाकों में गैस फैल गई और कई लोगों को खांसी, आंखों में जलन तथा सांस लेने में परेशानी की शिकायत हुई। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक कम से कम 52 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें चार नाबालिग भी शामिल हैं। इनमें से 12 लोगों को उपचार के बाद छुट्टी दी जा चुकी है और भर्ती मरीजों की स्थिति स्थिर बताई गई है। घटना के बाद प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। नागपुर नगर निगम की दमकल टीम, पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और Orange City Water (OCW) के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। सुरक्षा को देखते हुए संयंत्र के आसपास करीब 200 मीटर के दायरे को खाली कराया गया और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई।
रात करीब एक बजे हुआ गैस रिसाव
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसा रविवार और सोमवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे हुआ। गोधनी के जल उपचार संयंत्र में रखे करीब 900 किलोग्राम क्षमता वाले क्लोरीन सिलेंडर/टैंक से गैस का रिसाव शुरू हुआ। गैस तेजी से संयंत्र के आसपास के रिहायशी इलाकों तक पहुंच गई। देखते ही देखते लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कई परिवार घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे। स्थानीय लोगों ने खांसी और सांस लेने में परेशानी की शिकायत की। प्रभावित लोगों को नागपुर के मायो अस्पताल और आसपास के निजी अस्पतालों में ले जाया गया। शुरुआती रिपोर्टों में करीब 40 लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की बात सामने आई थी, जबकि बाद की रिपोर्टों में यह संख्या बढ़कर 52 बताई गई है।
चार नाबालिग भी अस्पताल में भर्ती
अस्पताल में भर्ती लोगों में चार नाबालिग भी बताए गए हैं। शुरुआती रिपोर्टों में कुछ मरीजों को ICU में रखे जाने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि बाद की जानकारी के मुताबिक भर्ती मरीजों की हालत स्थिर है और 12 लोगों को उपचार के बाद छुट्टी भी दी जा चुकी है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना और आसपास के इलाके में गैस की सांद्रता को कम करना रही।
पुलिस ने 200 मीटर का इलाका कराया खाली
गैस के फैलने की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन ने संयंत्र के आसपास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर करीब 200 मीटर के दायरे में लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी। प्रभावित क्षेत्र को घेरकर लोगों को वहां जाने से रोक दिया गया। पुलिस ने स्थानीय लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की।
NDRF और दमकल टीम ने संभाला मोर्चा
घटना की गंभीरता को देखते हुए नागपुर नगर निगम के दमकल विभाग ने दो पानी के टैंकर और सांस लेने के लिए विशेष उपकरणों से लैस कर्मचारियों को मौके पर भेजा। NDRF की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची। राहत एवं बचाव कर्मियों ने सुरक्षात्मक उपकरणों के साथ संयंत्र में प्रवेश किया। OCW की टीम ने भी बचाव अभियान में सहायता की और Self-Contained Breathing Apparatus (SCBA) जैसे विशेष श्वसन उपकरणों का इस्तेमाल किया। हालांकि बाद में OCW की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह संयंत्र उसके या नागपुर नगर निगम के संचालन में नहीं था, बल्कि गोधनी ग्राम पंचायत द्वारा संचालित जल संयंत्र था। OCW की टीम आपात स्थिति में मदद के लिए मौके पर पहुंची थी।
करीब साढ़े पांच बजे रिसाव पर काबू
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार सुबह करीब 5:30 बजे रिसाव को नियंत्रित करने के बाद NDRF, दमकल और OCW के कर्मचारियों ने क्लोरीन सिलेंडर को पानी और कास्टिक सोडा मिश्रित घोल वाले टैंक में रखा, ताकि बचे हुए रिसाव को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित किया जा सके। इसके बाद इलाके में गैस की सांद्रता धीरे-धीरे कम होने लगी। सुबह तक स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में बताई गई, हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों को तत्काल प्रभावित क्षेत्र में लौटने से बचने की सलाह दी।
छह महीने से परिसर में रखा था 900 किलो का टैंक
हादसे के कारण को लेकर अभी जांच जारी है। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि करीब 900 किलो क्षमता वाला क्लोरीन टैंक लगभग छह महीने से परिसर में रखा हुआ था और उसकी दीवार में रिसाव विकसित होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि गैस रिसाव का वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। नागपुर कलेक्टर कुमार आशीर्वाद ने संयंत्र में 900 किलो के क्लोरीन सिलेंडर को खुले स्थान में रखे जाने को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। घटना की तकनीकी जांच के लिए समिति गठित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। जांच में यह देखा जाएगा कि क्लोरीन के भंडारण और संचालन के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं।
पुलिस ने दर्ज की स्टेशन डायरी, जांच शुरू
मानकापुर पुलिस के अनुसार घटना को लेकर फिलहाल स्टेशन डायरी में एंट्री की गई है। पुलिस ने कहा है कि घटना की जांच की जाएगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सोमवार सुबह तक इस मामले में कोई अपराध दर्ज नहीं किया गया था। जांच में टैंक की स्थिति, रखरखाव, क्लोरीन भंडारण की व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल सहित विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जा सकती है।
क्लोरीन गैस कितनी खतरनाक?
क्लोरीन एक अत्यधिक प्रतिक्रियाशील रसायन है और पानी को कीटाणुरहित करने के लिए जल शोधन संयंत्रों में नियंत्रित तरीके से इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अधिक मात्रा में इसके संपर्क में आने पर यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। गैस के संपर्क में आने पर आंखों, नाक और गले में जलन, खांसी, सांस लेने में परेशानी तथा छाती में जकड़न जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अधिक गंभीर एक्सपोजर में फेफड़ों पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए क्लोरीन रिसाव की स्थिति में प्रभावित क्षेत्र से तुरंत दूर जाना और प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण होता है।
संयंत्र की जिम्मेदारी को लेकर भी स्थिति साफ
घटना के बाद कुछ शुरुआती रिपोर्टों में इसे नागपुर नगर निगम और OCW से जुड़े संयंत्र के रूप में बताया गया था। हालांकि बाद में OCW अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रभावित जल संयंत्र गोधनी ग्राम पंचायत द्वारा संचालित है और यह NMC या OCW का संचालन वाला संयंत्र नहीं है। OCW की टीम ने आपात स्थिति में बचाव और रिसाव नियंत्रित करने में सहायता की। यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हादसे की जिम्मेदारी और सुरक्षा मानकों की जांच संबंधित संचालन एजेंसी तथा नियामकीय व्यवस्था के संदर्भ में की जानी होगी।
सोशल मीडिया पर अफवाहों से बचने की अपील
घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की तस्वीरें और वीडियो प्रसारित हुए। कुछ वीडियो में इलाके में आवारा कुत्तों के मरने का दावा भी किया गया, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में इन मौतों के कारण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए ऐसे दावों को तथ्य के रूप में प्रसारित करना उचित नहीं होगा। पुलिस और प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर विश्वास नहीं करने तथा केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।
बड़ा सवाल—क्लोरीन भंडारण में सुरक्षा कितनी पुख्ता?
गोधनी की घटना ने जल शोधन संयंत्रों में इस्तेमाल होने वाले क्लोरीन जैसे खतरनाक रसायनों के भंडारण और संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर 900 किलो क्षमता वाले सिलेंडर के भंडारण, उसकी नियमित जांच, रिसाव की शुरुआती पहचान और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था की समीक्षा जरूरी हो जाती है। तकनीकी जांच यह स्पष्ट कर सकती है कि रिसाव अचानक हुआ या टैंक में पहले से कोई खराबी मौजूद थी। इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संयंत्र में गैस डिटेक्शन सिस्टम, सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षित कर्मचारी और आपातकालीन निकासी योजना जैसी व्यवस्थाएं कितनी प्रभावी थीं।
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में
सोमवार सुबह तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार गैस की सांद्रता घट रही थी और स्थिति नियंत्रण में बताई गई। संयुक्त राहत अभियान के बाद प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई। अस्पताल में भर्ती मरीजों की हालत स्थिर बताई गई है और कुछ लोगों को उपचार के बाद छुट्टी मिल चुकी है। फिलहाल इस घटना का सबसे अहम पहलू यह है कि गैस रिसाव को नियंत्रित कर लिया गया है, लेकिन हादसे की वजह और सुरक्षा चूक की वास्तविक तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। 900 किलो के क्लोरीन टैंक के भंडारण और रखरखाव को लेकर उठे सवालों के कारण तकनीकी जांच की रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण होगी।
नोट: शुरुआती समाचार बुलेटिनों में अस्पताल में भर्ती लोगों की संख्या करीब 40 बताई गई थी, जबकि बाद की रिपोर्टों में यह संख्या 52 तक पहुंची। इसलिए इस खबर में नवीनतम उपलब्ध आंकड़े को प्राथमिकता दी गई है।
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