महाराष्ट्र में दवा कारोबार पर FDA का बड़ा शिकंजा, 880 प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई; ₹11.41 करोड़ की अवैध दवाएं और सौंदर्य प्रसाधन जब्त
महाराष्ट्र में दवाओं की गुणवत्ता, वैध बिक्री और नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की है। जून से अगस्त 2026 के बीच तीन महीनों में राज्यभर में 2,902 दवा निर्माण और बिक्री प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। नियमों का उल्लंघन मिलने पर 880 लाइसेंसधारियों के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई की गई। इस अभियान के दौरान अवैध दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों का करीब ₹11.41 करोड़ मूल्य का भंडार जब्त किया गया।
महाराष्ट्र FDA के आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान में केवल दवा दुकानों और निर्माताओं तक कार्रवाई सीमित नहीं रही, बल्कि दवा निर्माण, बिक्री और उससे जुड़े विभिन्न प्रतिष्ठानों की नियामकीय जांच की गई। विभाग के अनुसार कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ऐसे उत्पादों की बिक्री और निर्माण पर रोक लगाना है, जो नियमों के अनुरूप नहीं हैं और जिनसे लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा पैदा हो सकता है।
तीन महीने में 2,902 प्रतिष्ठानों की जांच
FDA के अनुसार जून, जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान कुल 2,902 निरीक्षण किए गए। इनमें 607 विनिर्माण प्रतिष्ठान और 2,295 बिक्री प्रतिष्ठान शामिल थे। यानी कुल निरीक्षणों में करीब 79 प्रतिशत जांच दवा बिक्री से जुड़े प्रतिष्ठानों की हुई। निरीक्षण के दौरान लाइसेंस, दवाओं की वैधता, उनके भंडारण, बिक्री से जुड़े नियमों और नियामकीय मानकों का परीक्षण किया गया। जहां गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, वहां संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ लाइसेंस संबंधी कार्रवाई की गई। FDA के आंकड़ों के मुताबिक, कार्रवाई की जद में आए 880 प्रतिष्ठानों में 140 विनिर्माण प्रतिष्ठान और 740 बिक्री प्रतिष्ठान थे।
677 लाइसेंस निलंबित, 203 रद्द
इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा लाइसेंस पर हुई कार्रवाई रही। विभाग ने 677 लाइसेंस निलंबितकिए, जबकि 203 लाइसेंस रद्द किए गए। इस तरह कुल 880 लाइसेंसधारियों के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई हुई। लाइसेंस निलंबन या रद्द होना किसी दवा निर्माण अथवा बिक्री प्रतिष्ठान के लिए गंभीर कार्रवाई मानी जाती है। इसका सीधा अर्थ है कि संबंधित प्रतिष्ठान को नियामकीय नियमों का पालन करने और अपनी व्यवस्था में सुधार करने की आवश्यकता है, जबकि लाइसेंस रद्द होने की स्थिति में संबंधित अनुमति समाप्त हो जाती है।
₹11.41 करोड़ का अवैध दवा-सौंदर्य प्रसाधन भंडार जब्त
FDA की कार्रवाई के दौरान 104 तलाशी और जब्ती अभियान चलाए गए। इन कार्रवाइयों में अवैध दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों का कुल ₹11.41 करोड़ मूल्य का भंडार जब्त किया गया। यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बिना वैध अनुमति के दवाओं की बिक्री, गलत तरीके से रखी गई दवाएं अथवा नियमों के विपरीत उत्पादों का बाजार में पहुंचना सीधे उपभोक्ता स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। सौंदर्य प्रसाधनों के मामले में भी भ्रामक दावे, बिना अनुमति वाले उत्पाद और गुणवत्ता संबंधी अनियमितताएं उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं। FDA ने हाल के महीनों में ऐसे उत्पादों पर भी कार्रवाई तेज की है।
20 FIR दर्ज, 21 गिरफ्तारियां
अवैध दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों से जुड़े मामलों में FDA की कार्रवाई केवल जब्ती तक सीमित नहीं रही। विभाग ने इस तीन महीने के अभियान के दौरान 20 प्राथमिकी दर्ज कीं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इन मामलों में 21 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई। इससे संकेत मिलता है कि विभाग अब केवल प्रशासनिक कार्रवाई के बजाय गंभीर मामलों में आपराधिक कानून की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ा रहा है।
दवा निर्माण से लेकर बिक्री तक निगरानी
FDA के अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि निगरानी दवा आपूर्ति श्रृंखला के अलग-अलग स्तरों पर की गई। दवा बनाने वाली इकाइयों के साथ-साथ खुदरा बिक्री प्रतिष्ठानों का भी निरीक्षण किया गया। दवा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए केवल निर्माण इकाई की जांच पर्याप्त नहीं होती। निर्माण के बाद दवा के भंडारण, परिवहन और बिक्री के दौरान भी निर्धारित नियमों का पालन जरूरी होता है। इसलिए 2,295 बिक्री प्रतिष्ठानों की जांच इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
पहले भी बढ़ाई गई थी नमूना जांच
तुकाराम मुंढे के FDA आयुक्त बनने के बाद विभाग ने दवाओं और खाद्य पदार्थों के नमूने लेने तथा उनकी जांच की प्रक्रिया भी तेज की है। जून से अगस्त 2026 के बीच FDA ने कुल 37,604 नमूने जांच के लिए लिए, जिनमें 34,584 खाद्य पदार्थों और 3,020 दवाओं एवं सौंदर्य प्रसाधनों के नमूने शामिल थे। विभाग के अनुसार इस अवधि में नमूना संग्रह और जांच की गति पिछले वित्त वर्ष की तुलना में काफी बढ़ी। दवाओं के नमूनों की जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि बाजार में उपलब्ध औषधियां निर्धारित गुणवत्ता और मानकों के अनुरूप हैं या नहीं। यदि किसी नमूने में गुणवत्ता संबंधी गंभीर कमी मिलती है तो संबंधित निर्माता अथवा विक्रेता के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
नकली और अवैध दवाओं का खतरा क्यों गंभीर?
दवा ऐसी वस्तु है जिसका सीधे मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए नकली, अवैध या घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं का बाजार में पहुंचना सामान्य उपभोक्ता वस्तुओं की तुलना में कहीं अधिक गंभीर मामला है। गलत संरचना वाली दवा, निर्धारित मात्रा में सक्रिय घटक न होने वाली दवा या गलत तरीके से रखी गई औषधि मरीज के इलाज को प्रभावित कर सकती है। गंभीर स्थिति में इससे बीमारी बढ़ने, उपचार विफल होने या स्वास्थ्य संबंधी अन्य जटिलताएं पैदा होने का खतरा रहता है। इसी कारण दवा निर्माण और बिक्री के लिए लाइसेंस, गुणवत्ता मानक, भंडारण नियम और निरीक्षण व्यवस्था महत्वपूर्ण हैं।
तुकाराम मुंढे की कार्यशैली पर भी नजर
FDA आयुक्त के तौर पर तुकाराम मुंढे की कार्यशैली पिछले कुछ महीनों में चर्चा का विषय रही है। खाद्य सुरक्षा से लेकर दवा और सौंदर्य प्रसाधन क्षेत्र तक विभाग की कार्रवाई को तेज किया गया है। हाल में उन्होंने खाद्य सुरक्षा के मामलों में भी बड़े स्तर पर निरीक्षण और कार्रवाई कराई है। हालांकि नियामकीय कार्रवाई में सख्ती के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया का सही पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हाल ही में एक दवा कंपनी से जुड़े मामले में मुंबई उच्च न्यायालय ने FDA की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। इसके बाद मुंढे ने कहा कि यदि कानूनी प्रक्रिया में कोई गलती हुई है तो उसे सुधारा जाएगा और विभाग कानून के अनुसार पारदर्शी तरीके से कार्रवाई करेगा।इससे यह भी स्पष्ट होता है कि नियामक विभाग के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर अवैध और घटिया दवाओं पर तेजी से कार्रवाई करना और दूसरी ओर हर कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप रखना।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
जून से अगस्त के दौरान हुई कार्रवाई से साफ है कि महाराष्ट्र FDA ने दवा कारोबार की निगरानी को प्राथमिकता दी है। 2,902 निरीक्षण, 880 प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई, 677 लाइसेंस निलंबित, 203 लाइसेंस रद्द, 104 तलाशी एवं जब्ती अभियान और ₹11.41 करोड़ की अवैध दवाओं व सौंदर्य प्रसाधनों की जब्ती इस अभियान के पैमाने को दर्शाते हैं। आम नागरिकों के लिए इसका महत्व इसलिए भी बड़ा है क्योंकि बाजार में मिलने वाली दवाओं की गुणवत्ता सीधे उनके स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। ऐसे में नियामक संस्थाओं की नियमित जांच और दोषी प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई उपभोक्ताओं के विश्वास को मजबूत करने में मदद कर सकती है।
महाराष्ट्र FDA की महा-निगरानी
हालांकि, किसी प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई को अंतिम रूप से दोष सिद्ध होना नहीं माना जाना चाहिए। लाइसेंस निलंबन, रद्दीकरण, जब्ती और प्राथमिकी जैसी कार्रवाइयां नियामकीय अथवा कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। संबंधित पक्षों को कानून के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार रहता है और अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्राधिकारी या अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होता है। कुल मिलाकर, महाराष्ट्र FDA का यह तीन महीने का अभियान दवा बाजार में नियमों के अनुपालन और नागरिक स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर सरकार की सख्त निगरानी का संकेत देता है।
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