Balaghat Kuposhan News : बालाघाट में कुपोषण से बचाई गई 125 बच्चों की जान, रंग लाई मध्यप्रदेश सरकार की पहल

The CSR Journal Magazine
Balaghat Kuposhan News : बालाघाट के दुर्गम और लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहे बिरसा ब्लॉक में कुपोषण और बीमारी के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार की मुहिम अब जमीन पर असर दिखा रही है। स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता से पिछले एक महीने में अस्पताल में भर्ती 169 बच्चों में से 125 बच्चे स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, जबकि 44 बच्चों का इलाज जारी है।

Balaghat Kuposhan News : बीमार बच्चों तक तुरंत पहुंच रही है मोहन सरकार

मोहन यादव सरकार का फोकस केवल अस्पताल में इलाज देने पर नहीं, बल्कि बीमारी और कुपोषण की समय रहते पहचान करने पर है। इसके लिए बिरसा क्षेत्र में 20 सर्वे टीम घर-घर जाकर बच्चों और ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच कर रही हैं। साथ ही 4 मोबाइल मेडिकल यूनिट, 10 चिकित्सा अधिकारी और 4 एंबुलेंस तैनात की गई हैं। अब तक 630 मरीजों की पहचान हुई है, जिनमें 461 लोगों का इलाज घर पर ही किया गया। यानी जिन इलाकों में कभी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बड़ी चुनौती थी, वहां अब सरकारी स्वास्थ्य अमला खुद लोगों के दरवाजे तक पहुंच रहा है।

Balaghat Kuposhan News : 980 घरों तक पहुंचा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच

सरकार के अभियान के तहत कुंडेकसा, बोंदारी, कोरका, घुम्मुर, अडोरी, मछुरदा, गठिया और मातला समेत प्रभावित गांवों में लगातार स्वास्थ्य सर्वे किया जा रहा है। करीब 980 घरों को स्वास्थ्य सुरक्षा अभियान के दायरे में लाया गया है। इस दौरान 658 बच्चों को विटामिन-A, ORS और जिंक, 597 बच्चों को आयरन सिरप और 521 बच्चों को अल्बेंडाजोल दिया गया। 63 बच्चों को मीजल्स का टीका भी लगाया गया। मलेरिया और दूसरी बीमारियों की रोकथाम के लिए फॉगिंग, कीटनाशक छिड़काव और लार्वा सर्वे भी कराया गया।

कुपोषण के साथ बीमारी की रोकथाम पर भी जोर

बालाघाट में सरकार की रणनीति स्पष्ट है बच्चा बीमार होने के बाद इलाज नहीं, बल्कि बीमारी को पहले पहचानना और रोकना। पोषण, टीकाकरण, आयरन, विटामिन-A, कृमिनाशक दवाओं और ORS-जिंक के जरिए बच्चों की सेहत मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। बिरसा क्षेत्र में स्वास्थ्य टीमों की पहुंच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इलाका लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहा है और दुर्गम क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं की नियमित पहुंच मुश्किल रही है। अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार भी हो रहा है।

125 Children Recovered from Malnutrition in MP: 125 बच्चों का स्वस्थ होकर लौटना बदलाव की तस्वीर

बालाघाट की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। लेकिन 169 बच्चों को अस्पताल तक पहुंचाना और उनमें से 125 बच्चों को स्वस्थ कर वापस घर भेजना यह जरूर दिखाता है कि सरकार बीमारी सामने आने के बाद सक्रियता से काम कर रही है। कुपोषण और आदिवासी क्षेत्रों की स्वास्थ्य समस्याएं दशकों पुरानी हैं। इन्हें खत्म करने के लिए लगातार निगरानी, पोषण, इलाज और ग्रामीणों का सहयोग जरूरी है। बालाघाट में शुरू हुआ यह अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब तस्वीर सिर्फ बीमारी की नहीं है। तस्वीर यह भी है कि जहां कभी सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पहुंचना मुश्किल था, वहां आज डॉक्टर, मोबाइल मेडिकल यूनिट और स्वास्थ्य टीमें घर-घर पहुंच रही हैं। 125 बच्चों का स्वस्थ होकर लौटना इसी बदलती तस्वीर की सबसे बड़ी मिसाल है।
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