कोल्हापुर में अब आपदाओं में जान बचाने के लिए आएगी प्रशिक्षित ट्रांसवुमन रेस्क्यू स्क्वाड

The CSR Journal Magazine
कोल्हापुर में कुछ दिनों से एक अनोखी कहानी चल रही है। जहां पहले किन्नरों को समाज में तिरस्कार और अपमान का सामना करना पड़ता था, वहीं अब वही लोग बाढ़ और आपदाओं के समय दूसरों की जान बचाने में जुटे हैं। ट्रांसवुमन रेस्क्यू स्क्वाड के गठन ने इनकी सामाजिक स्थिति को बदल दिया है। कोल्हापुर की डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने 15 ट्रांसवुमन को आपदा राहत कार्य के लिए प्रशिक्षित किया है। वे अब साहसी सैनिकों की तरह काम कर रही हैं, जिन्हें अब लोग इज्जत से देखते हैं।

विशेष प्रशिक्षण से मिल रही नई पहचान

हाल ही में डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने ट्रांसवुमन के लिए एक विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया। इस प्रशिक्षण में तैराकी, फर्स्ट एड और रेस्क्यू तकनीकों को शामिल किया गया। अब ये ट्रांसवुमन बाढ़ और आपदाओं के समय अपने अद्भुत कार्यों से लोगों की जान बचा रही हैं। पहले जहां इन्हें छक्का या हिजड़ा कहकर संबोधित किया जाता था, अब लोग इन्हें धन्यवाद देते हैं।

सामाजिक बदलाव की ओर एक कदम

इनमें से एक सदस्य सोनल कहती हैं, “आज लोग हमें देखकर हाथ जोड़ते हैं। पहले हमें देखकर नफरत होती थी। अब हम लोगों की जान बचा कर उन्हें जीवन देने का अनुभव कर रहे हैं।” ट्रांसवुमन समुदाय की ये सदस्य जो कठिन संघर्षों के बाद यहां तक पहुंची हैं, अब समाज में बदलाव का प्रतीक बन गई हैं।

गर्मी में की गई मेहनत रंग लाई

कई सदस्यों ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बहुत मेहनत करनी पड़ी। तैराकी सीखने के लिए उन्हें पानी में कूदना पड़ा। लेकिन आज वे गहरे पानी में भी आसानी से काम कर लेती हैं। अधिकारियों ने भी इनकी मेहनत और कार्यक्षमता की सराहना की है।

स्थायी रोजगार की आवश्यकता

हालांकि, ये सभी लोग इस क्षेत्र में काम कर रही हैं, लेकिन एक बड़ी चुनौती अभी भी बाकी है। उन्होंने बताया कि उन्हें नियमित रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता है। वे चाहती हैं कि सरकार उन्हें स्थायी रूप से आपदा राहत टीम में शामिल करे।

की जा रही है सराहना

इन ट्रांसवुमन ने हाल ही में कई राहत कार्यों में भाग लिया है। बाढ़ के दौरान उन्होंने कई लोगों को सुरक्षित निकाला और स्थानीय लोगों ने उनके इस निडरता की सराहना की। पहले इन्हें संदेह की नजर से देखा जाता था, लेकिन अब लोग इन्हें सम्मान देने लगे हैं।

नया बदलाव, नई पहचान

यह सिर्फ एक रेस्क्यू स्क्वाड की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक समुदाय की मजबूती और सम्मान हासिल करने की कहानी है। कोल्हापुर में किन्नर समुदाय को इस तरह का मौका दिया गया है, जो अन्य जगहों पर अगर लागू हो सके, तो समाज में बहुत बड़ा बदलाव लाने में मदद कर सकता है।

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