UP: कानपुर में जमीन धंसी तो 20 फीट नीचे समा गई यशी, शव दहलीज तक नहीं पहुंचा, परिवार सहमा

The CSR Journal Magazine
रक्षाबंधन का दिन कानपुर के महाराजपुर क्षेत्र के पुरवामीर गांव में एक परिवार के लिए जिंदगी का सबसे दुखद दिन बन गया। किसान विनोद सविता की 18 वर्षीय बेटी यशी की घर के आंगन में अचानक जमीन धंसने से मौत हो गई। करीब 20 फीट गहरे गड्ढे में समाई यशी को निकालने के लिए कई घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाना पड़ा।

शौचालय से निकलकर आंगन में पहुंची, अचानक धंस गई जमीन

घटना शुक्रवार सुबह करीब छह बजे की है। यशी शौचालय से निकलकर आंगन में पहुंची ही थी कि अचानक जमीन धंस गई और वह करीब 20 फीट नीचे बने गड्ढे में गिर गई। परिवार के लोगों ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया और पुलिस को सूचना दी। बताया गया कि जिस जगह हादसा हुआ, वहां करीब छह महीने पहले सबमर्सिबल पंप लगाने के लिए गड्ढा खोदा गया था। पानी नहीं मिलने पर गड्ढे को मिट्टी से भरकर उसके ऊपर प्लास्टर कर दिया गया था। इसी जगह की जमीन बाद में धंस गई।

आठ घंटे बाद बाहर निकाला गया शव

हादसे की सूचना मिलते ही महाराजपुर थाना पुलिस के साथ NDRF, SDRF और अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। बैकहो लोडर और पोकलेन की मदद से गड्ढे में रेस्क्यू अभियान चलाया गया। करीब आठ घंटे की मशक्कत के बाद दोपहर 2:20 बजे यशी का शव बाहर निकाला जा सका। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद जब शव गांव पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया।

बेटी का शव घर की दहलीज तक नहीं ले जा सका परिवार

शनिवार दोपहर यशी का शव घर से करीब 25 मीटर दूर नीम के पेड़ के नीचे रखा गया। शव देखते ही पिता विनोद, मां रेखा, भाई अमित और बहनें रो पड़े। मां बेटी का शव देखकर बार-बार बिलखती रही। हादसे के बाद परिवार इतना डर गया है कि वह अपने घर में जाने से भी बच रहा है। परिवार ने पड़ोसी अजय पांडेय के घर और बरामदे में शरण ली है। मां का दर्द था कि बेटी का शव भी घर की दहलीज तक नहीं पहुंच पाया।

रेस्क्यू के दौरान दो मकान भी क्षतिग्रस्त

यशी को निकालने के लिए घर के आगे की जमीन की खुदाई करनी पड़ी। घर से करीब 12 फीट दूर लगभग 25 फीट गहरा गड्ढा बनाया गया, जिसे बाद में मिट्टी से भर दिया गया। इससे परिवार को अब भी जमीन धंसने का डर बना हुआ है। रेस्क्यू के दौरान विनोद सविता के साथ पड़ोसी कल्लू का मकान भी क्षतिग्रस्त हो गया। कल्लू के घर का आगे का हिस्सा दरक गया है। परिवार ने सुरक्षा को देखते हुए घर खाली कर दिया है।

चार लाख रुपये की सहायता, मकान के लिए भी मदद

प्रशासन ने पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेखपाल ने दैवीय आपदा के तहत चार लाख रुपये की सहायता दिलाने की रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी है। इसके अलावा दोनों क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत के लिए एक-एक लाख रुपये की सहायता दिलाने की रिपोर्ट भी भेजी गई है। नर्वल के SDM सत्यपाल प्रजापति ने बताया कि चार लाख रुपये की सहायता स्वीकृत हो चुकी है और सोमवार को पीड़ित परिवार के बैंक खाते में राशि पहुंचने की बात कही गई है।

पुरवामीर के बाद सिकठिया में भी धंसी जमीन

पुरवामीर की घटना के करीब 24 घंटे बाद पास के सिकठिया गांव में भी जमीन धंसने की घटना सामने आई। शनिवार सुबह ग्रामीणों ने नीम के पेड़ के पास करीब पांच फीट गहरा गड्ढा देखा। सूचना मिलने पर पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। प्रभावित जगह के आसपास रस्सी से बैरिकेडिंग कर लोगों को वहां जाने से रोक दिया गया। लगातार दो घटनाओं के बाद ग्रामीणों में जमीन धंसने को लेकर डर का माहौल है।

अब जांच और सुरक्षा पर नजर

पुरवामीर में हुए हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल जमीन की मजबूती और पुराने गड्ढों को भरने के तरीके को लेकर उठ रहा है। प्रशासन ने प्रभावित जगहों को सुरक्षित कराया है, लेकिन ग्रामीणों में अभी भी डर है। खासकर बारिश के मौसम में ऐसी जगहों की जांच और निगरानी जरूरी हो गई है, ताकि दोबारा कोई बड़ा हादसा न हो।

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