ईरान में हिजाब क्रांति का नया दौर: पाबंदियों को ठेंगा दिखा सड़कों पर उतरीं महिलाएं

The CSR Journal Magazine

हिजाब विवाद में नया मोड़: ईरान में महिलाएं बिना हिजाब सड़कों पर!सरकार और महिलाओं के बीच बढा टकराव

ईरान में हिजाब को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर बेहद संवेदनशील और हिंसक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले कुछ हफ्तों में राजधानी तेहरान सहित देश के कई बड़े शहरों से ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। मोरालिटी पुलिस (नैतिकता पुलिस) की सख्त पाबंदियों और भारी जुर्माने के प्रावधानों के बावजूद, हजारों की संख्या में ईरानी महिलाएं बिना हिजाब के सार्वजनिक स्थानों, बाजारों और मुख्य सड़कों पर उतर आई हैं। सरकार की सख्त हिदायतों को ठेंगा दिखाते हुए महिलाएं सामूहिक रूप से इस कानून का उल्लंघन कर रही हैं, जिससे शासन और आम नागरिकों के बीच टकराव अपने चरम पर पहुंच गया है।

प्रतिरोध का नया चेहरा: सड़कों पर बिना हिजाब महिलाएं

ईरान के अलग-अलग प्रांतों जैसे इस्फ़हान, शिराज, मशहद और तेहरान के वीडियो सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं। इन वीडियो में युवा लड़कियों से लेकर अधेड़ उम्र की महिलाएं बिना किसी खौफ के मेट्रो, कैफे, और व्यस्त चौराहों पर घूमती दिखाई दे रही हैं। यह केवल एक आकस्मिक विरोध नहीं है, बल्कि यह एक सुविचारित सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience) का रूप ले चुका है। कई जगहों पर महिलाएं अपने हिजाब को हवा में लहराते हुए या उन्हें आग के हवाले करते हुए शासन के खिलाफ नारेबाजी कर रही हैं। इस बार के विरोध प्रदर्शनों की खास बात यह है कि इसमें महिलाओं को पुरुषों का भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। रूढ़िवादी माने जाने वाले इलाकों में भी पुरुषों ने महिलाओं के इस कदम की सराहना की है और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के खिलाफ उनके साथ खड़े नजर आ रहे हैं।

सरकार का रुख: डिजिटल सर्विलांस और सख्त कानून

इस जमीनी विद्रोह से निपटने के लिए ईरान की इब्राहिम रईसी के बाद आई नई कट्टरपंथी सरकार और न्यायपालिका ने अत्यधिक सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सरकार ने महिलाओं को काबू में करने के लिए पारंपरिक पुलिस गश्त के बजाय अब तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
स्मार्ट कैमरों का उपयोग: सरकार ने सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर हाई-टेक फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाले) कैमरे लगाए हैं। बिना हिजाब दिखने वाली महिलाओं की पहचान कर उन्हें सीधे उनके मोबाइल पर चेतावनी के मैसेज भेजे जा रहे हैं।
व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई: यदि कोई महिला किसी दुकान, रेस्तरां या मॉल में बिना हिजाब के प्रवेश करती है, तो सरकार उस प्रतिष्ठान को तुरंत सील कर रही है। अब तक सैकड़ों कैफे और शॉपिंग सेंटर्स को बंद किया जा चुका है।
भारी जुर्माना और गाड़ियां जब्त: बिना हिजाब गाड़ी चलाने वाली महिलाओं के वाहनों को जब्त किया जा रहा है। इसके साथ ही उनके बैंक खातों को फ्रीज करने और भारी जुर्माना लगाने जैसे आर्थिक प्रतिबंध भी थोपे जा रहे हैं।
ईरान के मुख्य न्यायाधीश ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि “इस्लामी मूल्यों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। हिजाब न पहनना देश की सुरक्षा और संस्कृति पर हमला है।”

महसा अमीनी की विरासत और सुलगता गुस्सा

इस पूरे विवाद की जड़ें सितंबर 2022 में हुई महसा अमीनी की मौत से जुड़ी हैं। 22 वर्षीय कुर्द-ईरानी महिला महसा अमीनी को मोरालिटी पुलिस ने ‘गलत तरीके से हिजाब पहनने’ के आरोप में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद हिरासत में उसकी मौत हो गई थी। उस घटना ने पूरे ईरान में ‘महिला, जीवन, स्वतंत्रता’ (Woman, Life, Freedom) आंदोलन को जन्म दिया था। यद्यपि सरकार ने उस समय बल प्रयोग करके प्रदर्शनों को दबा दिया था, लेकिन महिलाओं के दिलों में सुलग रही आजादी की चिंगारी बुझी नहीं थी। आज जो सड़कों पर दिख रहा है, वह उसी संचित आक्रोश का अगला चरण है। महिलाएं अब सिर्फ हिजाब की अनिवार्यता के खिलाफ नहीं लड़ रही हैं, बल्कि वे पूरे शासन तंत्र की दमनकारी नीतियों को चुनौती दे रही हैं।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

इस टकराव ने ईरान के समाज को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक तरफ देश का युवा और आधुनिक तबका है, जो वैश्विक नागरिक अधिकारों की मांग कर रहा है। दूसरी तरफ धार्मिक और कट्टरपंथी वर्ग है, जो मानता है कि हिजाब की अनिवार्यता खत्म होने से 1979 की इस्लामी क्रांति के मूल सिद्धांत नष्ट हो जाएंगे। इस विवाद का असर ईरान की पहले से ही जर्जर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। दुकानों और व्यवसायों के बंद होने से बेरोजगारी बढ़ रही है। वहीं, सरकार विरोधी प्रदर्शनों के कारण विदेशी निवेश और पर्यटन पूरी तरह ठप हो चुका है। महंगाई दर आसमान छू रही है, जिससे आम जनता का जीवन और कठिन हो गया है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भविष्य की राह

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठन, ईरान में महिलाओं के दमन की कड़े शब्दों में निंदा कर रहे हैं। यूरोपीय संघ और अमेरिका ने ईरानी अधिकारियों और मोरालिटी पुलिस पर कई नए प्रतिबंध लगाए हैं। हालांकि, ईरानी सरकार इन प्रतिबंधों को पश्चिमी देशों की साजिश करार देकर खारिज करती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में अब स्थिति उस बिंदु पर पहुंच चुकी है जहां से पीछे हटना दोनों पक्षों के लिए मुश्किल है। महिलाएं अपने अधिकारों के लिए जान दांव पर लगाने को तैयार हैं, और सरकार को डर है कि अगर उसने इस मुद्दे पर घुटने टेके, तो उसे अन्य राजनीतिक और लोकतांत्रिक मांगों के आगे भी झुकना पड़ेगा। यह नया मोड़ यह साफ करता है कि हिजाब अब ईरान में केवल कपड़े का एक टुकड़ा नहीं रह गया है; यह सत्तावादी शासन के खिलाफ राजनीतिक प्रतिरोध का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है। आने वाले दिन ईरान के भविष्य और वहां की महिलाओं की आजादी के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।

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