India Ropeway Projects: ट्रेन-एक्सप्रेसवे छोड़िए, अब हवा में दौड़ेगी सवारी! देश के 8 शहरों में बन रहे रोपवे, खर्च होंगे करीब 1 लाख करोड़

The CSR Journal Magazine
देश में सड़क, रेलवे और एक्सप्रेसवे का नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है, लेकिन बड़े शहरों और पर्यटन स्थलों पर ट्रैफिक अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। फ्लाईओवर और सुरंग जैसे विकल्पों में ज्यादा जगह, समय और लागत लगती है। इसी वजह से अब रोपवे को वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। स्रोत के मुताबिक, देशभर में करीब 250 अर्बन रोपवे प्रोजेक्ट तैयार करने की योजना है। इन परियोजनाओं पर लगभग एक लाख करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। इनमें कुछ रोपवे शहरों में ट्रैफिक कम करने के लिए बनाए जा रहे हैं, जबकि कई धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान करने पर केंद्रित हैं।

India Ropeway Projects: वाराणसी में 16 मिनट में काशी विश्वनाथ तक सफर

इस योजना में वाराणसी रोपवे प्रोजेक्ट सबसे प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। करीब 4 किलोमीटर लंबे इस रोपवे पर 6 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है। यह रोपवे कैंट रेलवे स्टेशन से काशी विश्वनाथ तक यात्रियों को जोड़ेगा। इसके जरिए करीब 16 मिनट में सफर पूरा किया जा सकेगा। इसकी क्षमता रोजाना लगभग एक लाख यात्रियों को लाने-ले जाने की बताई गई है। पूरे रास्ते में 5 स्टेशन बनाए गए हैं। इससे सड़क के जाम में फंसे बिना यात्रियों को तेजी से सफर करने में मदद मिलेगी।

सोनप्रयाग से केदारनाथ सिर्फ 36 मिनट में

उत्तराखंड में सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे को बेहद अहम परियोजना माना जा रहा है। करीब 13 किलोमीटर लंबे इस रोपवे पर 4 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने की संभावना है। इसका सबसे बड़ा फायदा यात्रा के समय में देखने को मिलेगा। मौजूदा व्यवस्था में सोनप्रयाग से केदारनाथ तक पहुंचने में करीब 8 से 9 घंटे लगते हैं, जबकि रोपवे बनने के बाद यह सफर लगभग 36 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। परियोजना में करीब 5 स्टेशन बनाए जाने की जानकारी है।

हेमकुंड साहिब का 21 घंटे का सफर आधे घंटे में

उत्तराखंड में ही गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक एक और बड़ा रोपवे प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। इसकी लंबाई करीब 12.4 किलोमीटर होगी और लागत लगभग 3 हजार करोड़ रुपये रहने की संभावना है। इस रोपवे की क्षमता हर घंटे करीब 1,100 यात्रियों को ले जाने की होगी। रोजाना करीब 11 हजार लोग इससे सफर कर सकेंगे। फिलहाल गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक पहुंचने में करीब 21 घंटे का लंबा और जोखिमभरा सफर करना पड़ता है। रोपवे बनने के बाद यह दूरी करीब 30 मिनट में पूरी की जा सकेगी।

उज्जैन में रेलवे स्टेशन से महाकाल तक 7 मिनट

मध्य प्रदेश के उज्जैन में प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर तक पहुंचना भी आसान बनाने की तैयारी है। यहां रेलवे स्टेशन से मंदिर तक करीब 1.7 किलोमीटर लंबा रोपवे बनाया जाना प्रस्तावित है। इस परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई है। रोपवे से हर घंटे 1,000 से ज्यादा यात्रियों को सफर कराने की क्षमता होगी। मंदिर तक पहुंचने में करीब 7 मिनट लगेंगे, जबकि मौजूदा समय में रेलवे स्टेशन से मंदिर तक पहुंचने में एक घंटे से ज्यादा समय लग सकता है।

कुल्लू में बदला बिजली महादेव रोपवे का रूट

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित बिजली महादेव तक पहुंच आसान बनाने के लिए रोपवे परियोजना की योजना बनाई गई है। इस प्रोजेक्ट का रूट अब बदला गया है। पहले इसे पिरड़ी से बिजली महादेव मंदिर तक बनाने की योजना थी, लेकिन अब रूट को बदलकर पिरड़ी से काइसधार कर दिया गया है। करीब 4 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट को महाराजा रोपवे नाम दिया गया है। रूट में बदलाव के कारण इसकी अनुमानित लागत भी 250 करोड़ से बढ़कर 300 करोड़ रुपये हो गई है।

ढोसी हिल्स पर 5 से 10 मिनट में पहुंचेंगे यात्री

India Ropeway Projects: हरियाणा की ढोसी पहाड़ी पर बनने वाला रोपवे आकार में छोटा है, लेकिन इससे पहाड़ी तक पहुंचने का समय काफी कम हो सकता है। इसकी लंबाई करीब 870 मीटर है और लागत लगभग 57 करोड़ रुपये रहने की संभावना है। अभी पहाड़ी पर चढ़ने में करीब एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है। रोपवे तैयार होने के बाद यही सफर करीब 5 से 10 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। इससे ढोसी हिल्स को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

प्रयागराज में नदियों के ऊपर से होगा सफर

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज संगम क्षेत्र में भी रोपवे बनाने की तैयारी है। इसके लिए सर्वे कराया जा चुका है। प्रस्तावित रोपवे की लंबाई करीब 2.5 किलोमीटर होगी और इसकी लागत 210 करोड़ रुपये से ज्यादा रहने की संभावना है। यह रोपवे परेड ग्राउंड को त्रिवेणी पुष्प से जोड़ेगा। इसमें 14 ट्रॉली लगाए जाने की योजना है और एक बार में 112 यात्रियों को ले जाने की क्षमता होगी। खास बात यह है कि यात्रियों को गंगा, यमुना और सरस्वती के ऊपर से सफर करने का अनुभव मिलेगा।

श्रीनगर में डल झील से शंकराचार्य मंदिर तक

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में प्रसिद्ध शंकराचार्य मंदिर तक पहुंच आसान बनाने के लिए भी रोपवे परियोजना प्रस्तावित है। करीब 1 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर लगभग 147 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। फिलहाल मंदिर तक पहुंचने में 30 मिनट से ज्यादा समय लग सकता है। रोपवे बनने के बाद यह सफर करीब 5 मिनट में पूरा होने की उम्मीद है। परियोजना की शुरुआत डल झील के किनारे से होगी और इसे करीब दो साल में पूरा किए जाने की संभावना है।

शहरों और पर्यटन स्थलों की बदल सकती है तस्वीर

India Ropeway Projects: इन आठ परियोजनाओं को देखें तो रोपवे का इस्तेमाल सिर्फ पहाड़ी इलाकों तक पहुंचने के लिए नहीं, बल्कि शहरी परिवहन और धार्मिक पर्यटन दोनों के लिए किया जा रहा है। वाराणसी और उज्जैन जैसे शहरों में यह भीड़ और सड़क यातायात का दबाव कम करने में मदद कर सकता है, जबकि केदारनाथ, हेमकुंड साहिब, बिजली महादेव और शंकराचार्य मंदिर जैसे स्थानों तक पहुंच आसान हो सकती है। करीब 250 परियोजनाओं की प्रस्तावित योजना आगे बढ़ती है तो भारत के कई शहरों और पर्यटन स्थलों में जमीन के बजाय हवा में चलने वाला यह परिवहन नेटवर्क आने वाले वर्षों में यातायात का नया विकल्प बन सकता है।

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