रिकॉर्ड पर पहुंचा कच्चे तेल और LNG का आयात, जानें बढ़ती डिमांड के पीछे की वजह

The CSR Journal Magazine
हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में काफी तेजी आई है। अमेरिका के मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान पर हमले की योजना के चलते, अक्टूबर में कच्चे तेल की कीमतों में 14 फीसदी का इजाफा हुआ है। यह कीमतें पिछले छह महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। इस बीच, भारत का LNG आयात भी अक्टूबर में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

LNG आयात में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

अक्टूबर में भारत का LNG आयात 17.4% की बढ़त के साथ 27 लाख टन तक पहुंच गया है। यह वृद्धि मुख्य रूप से पावर, फर्टिलाइजर और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में बढ़ती डिमांड के कारण हुई है। मेरिटाइम इंटेलीजेंस एंड रिसर्च फर्म Kpler के आंकड़ों के अनुसार, कतर और यूएई से LNG के अधिक कार्गो आए हैं।

कच्चे तेल का आयात भी बढ़ा, डिमांड में बढ़ोतरी के कारण

इस दौरान, कच्चे तेल का आयात भी अक्टूबर में रोजाना 56 लाख बैरल तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की तुलना में 14 फीसदी अधिक है। रूस इस समय भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है, जबकि पश्चिम एशिया और अटलांटिक बेसिन से भी आयात में वृद्धि देखी गई है। भारत में उत्पादन घटने के कारण LNG का आयात बढ़ा है। अब भारत की आयात निर्भरता 50 फीसदी से बढ़कर 52 फीसदी हो गई है। कंपनियां पावर सेक्टर के लिए गैस का स्टॉक बढ़ा रही हैं, क्योंकि सर्दियों में सोलर एनर्जी में कमी आने की संभावना है। इसके अलावा, फर्टिलाइजर सेक्टर को भी उत्पादन के लिए अधिक फीडस्टॉक की आवश्यकता है।

कतर से बढ़ी सप्लाई, अमेरिका का बढ़ता योगदान

Kpler के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में कतर से LNG का आयात काफी बढ़ा है। पिछले साल सितंबर में भारत ने करीब 21 लाख टन LNG का आयात किया था, जिसमें से 8 लाख टन कतर से आई थी। इस बार अक्टूबर में भारत को कतर से 4 लाख टन से ज्यादा LNG मिली है, जो ईरान युद्ध शुरू होने के बाद सबसे अधिक है। इस बीच, अमेरिका भारत के लिए LNG का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है। अक्टूबर के अंत तक वहां से 8 लाख टन गैस आ चुकी थी। इसके अलावा, यूएई, ओमान, अंगोला, नाइजीरिया और ऑस्ट्रेलिया भी इस महीने बड़े सप्लायर रहे हैं।

रूस से सप्लाई में गिरावट, विशेषज्ञों की राय

कच्चे तेल के मामले में, रूस से सप्लाई जुलाई के 28 लाख बैरल के मुकाबले अक्टूबर में करीब 20 लाख बैरल रह गई है। इसके बावजूद, भारत के कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी 36% बनी हुई है। खाड़ी देशों से सप्लाई रोजाना 23 लाख बैरल रही, जो सितंबर के 27 लाख बैरल के मुकाबले कम है। Kpler के लीड एनालिस्ट (रिफाइनिंग) निखिल दुबे का कहना है कि रूसी तेल की ज्यादा ढुलाई लागत से कीमत का फायदा खत्म हो गया है। इसके साथ ही, पश्चिम एशिया से सप्लाई में सुधार आया है, जिससे रिफाइनर्स को अधिक विकल्प मिले हैं। खाड़ी देशों में सबसे ज्यादा तेल सऊदी अरब से आया, जबकि इराक दूसरे नंबर पर रहा।

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