‘ऊंची जातियों की सेवा करें शूद्र’… जन्माष्टमी पर IIT मंडी में लगे पोस्टर से विवाद, जांच समिति गठित

The CSR Journal Magazine
हाल ही में IIT मंडी में जन्माष्टमी के अवसर पर एक विवादित पोस्टर लगाया गया, जिसमें शूद्रों को “ऊंची जातियों की सेवा करना चाहिए” लिखा था। इस पोस्टर को लेकर संस्थान में हंगामा मच गया है। IIT मंडी के निदेशक लक्ष्मीधर बेहरा ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि संस्थान इस तरह के जातिगत भेदभाव का समर्थन नहीं करता है। उन्होंने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच के लिए एक समिति गठित कर दी है।

जांच समिति की गठन प्रक्रिया

जांच समिति का उद्देश्य यह पता लगाना है कि विवादित पोस्टर किसने बनाया और उसे क्यों लगाया गया। लक्ष्मीधर बेहरा ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए कहा, “मैंने हर मंच पर जातिगत भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ी है।” समिती में विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है, जिसमें अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के सदस्य भी शामिल हैं।

बातचीत का आनंद: छात्रों की व्याख्या

IIT मंडी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह पोस्टर कुछ छात्रों द्वारा भगवद गीता की अपनी तरह से व्याख्या का परिणाम था। लक्ष्मीधर बेहरा के अनुसार, यह छात्र कार्यक्रम का हिस्सा था, और उनसे जुड़े छात्र ISKCON से प्रभावित हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह पर्याप्त नहीं है कि व्यक्तिगत व्याख्या के नाम पर ऐसे विवादित पोस्टर लगाए जाएं।

संस्थान का प्रबंधन और विचारधारा

IIT मंडी के निदेशक लक्ष्मीधर बेहरा ने कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उन्हें उस पोस्टर को देखकर गहरा सदमा लगा। उन्होंने छात्रों को बताया कि उन्हें इस तरह के कार्यों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। बेहरा ने इस पोस्टर के ज़रिये साधारण सामाजिक सद्भाव के उल्लंघन के लिए किसी भी तरह से सहिष्णुता नहीं दिखाने का भी आश्वासन दिया।

भगवद गीता का संदर्भ

इस विवाद का केंद्र “भगवद गीता – द टाइमलेस विजडम” नामक पोस्टर है, जिसे IIT के ऑडिटोरियम के बाहर लगाया गया था। पोस्टर में समाज को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वर्गों में बांटा गया था। इसमें अलग-अलग वर्गों की भूमिकाएँ भी बताई गई थीं, जो कि धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से व्याख्यायित की गई थीं। यह स्थिति गीता के शिक्षण और उसकी व्याख्या की संवेदनशीलता को भी दर्शाती है।

आगे की राह

अब यह देखना होगा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद IIT मंडी अपने कैंपस में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाएगी। संस्थान के निदेशक का यह विश्वास है कि हर किसी को समानता और सामाजिक न्याय का सम्मान करना चाहिए। इस मामले ने दलित समुदाय के सदस्यों की भावनाओं को प्रभावित किया है, और अब व्यवस्था को सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

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