₹11 का IV सेट ₹325 में: अस्पतालों की MRP पर तुकाराम मुंडे का सवाल

The CSR Journal Magazine
अस्पतालों में इलाज करवा रहे मरीज अक्सर बिल की चिंता में रहते हैं। महाराष्ट्र में मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों का सर्वेक्षण बताते हैं कि ट्रेड प्राइस और प्रिंटेड मैक्सिमम रिटेल प्राइस (MRP) के बीच बड़ा अंतर है। तुकाराम मुंडे ने अपने X हैंडल पर ऐसे ही आंकड़े साझा किए हैं। उनकी पोस्ट में बताया गया है कि कई प्रोडक्ट्स की खरीद मूल्य और MRP में कई गुना का फर्क है।

क्या डॉक्टर भी इस खेल का हिस्सा हैं?

उदाहरण के लिए, IV इन्फ्यूजन सेट जिसकी कीमत ₹11.05 है, उस पर ₹325 का MRP लिखा है। इसी तरह, सिरिंज की लागत ₹6.75 के बजाय ₹57.20 है। मरीजों के लिए यह जानना मुश्किल होता है कि असली कीमत क्या है। तुकाराम मुंडे ने कहा है कि यह मरीजों के लिए एक बड़ा सवाल बन गया है।

मरीज के पास विकल्प नहीं

तुकाराम मुंडे के अनुसार, अस्पताल में भर्ती मरीजों के सामने कोई विकल्प नहीं होता। IV सेट, सिरिंज और कैथेटर जैसी चीजें उनकी तुरंत जरूरत होती हैं। मरीज इलाज के बीच में और विकल्प नहीं चुन सकते। इस स्थिति में मरीज को बोझिल मेडिकल बिल का सामना करना पड़ता है।

MRP और ट्रेड प्राइस का भिन्नता: कारण जानिये

तुकाराम मुंडे ने कहा कि कई बार प्रोडक्ट्स पर लिखी गई MRP मैन्युफैक्चरर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स द्वारा पहले से निर्धारित होती है। इससे ट्रेड प्राइस और MRP के बीच बड़ा अंतर बनता है। मरीजों को इन कीमतों का अंदाजा लगाना अपने लिए संभव नहीं होता, जिसके कारण पारदर्शिता की कमी सामने आती है।

क्या बदलेंगे नियम?

महाराष्ट्र FDA के कमिश्नर ने मेडिकल सामान की कीमतों पर मौजूदा रेगुलेटरी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर, 2013 के तहत कुछ दवाओं पर प्राइस सीलिंग का प्रावधान है, लेकिन ज्यादातर मेडिकल डिवाइसेज और कंज्यूमेबल्स इससे बाहर हैं। इसीलिए, इसकी उचित कीमतों को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

प्रस्ताव की तैयारी

FDA के सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर, ट्रेड प्रोक्योरमेंट प्राइस और घोषित MRP के बीच स्वीकार्य विभाजन के लिए स्पष्ट गाइडलाइन बनाने की सिफारिश की गई है। इसे डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स और NPPA को भेजा गया है। इसका उद्देश्य मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों में उपस्थित अंतर को कम करना है।

मरीजों के लिए यह क्या मतलब रखता है?

मरीजों को अस्पतालों के बिल में शामिल किसी भी मेडिकल प्रोडक्ट की MRP से असली खरीद कीमत का पता लगाना बेहद मुश्किल हो सकता है। Maharashtra FDA के सर्वेक्षण के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि MSRP और ट्रेड प्राइस के बीच के अंतर को पहचानना आवश्यक है। अब यह देखना है कि संबंधित केंद्रीय विभाग और NPPA इस पर क्या कदम उठाते हैं।

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