हरमनप्रीत कौर: लड़कों के साथ क्रिकेट खेलकर मिली बड़ी सफलता

The CSR Journal Magazine
हरमनप्रीत कौर, मोगा की गलियों में खेलने वाली एक साधारण लड़की, जिसने न केवल भारतीय महिला क्रिकेट को नई दिशा दी बल्कि खुद को भी एक मिसाल के रूप में पेश किया। संघर्षों और चुनौतियों के बीच, हरमनप्रीत ने साल 2017 में महिला वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपनी अद्वितीय पारी से क्रिकेट की दुनिया में तख्ते बदल दिए। इस पारी के बाद उन्हें रातोंरात प्रसिद्धि मिली, लेकिन उनके करियर में विवादों का भी सिलसिला चला।

अभूतपूर्व उपलब्धियों के साथ-साथ विवाद

हरमनप्रीत ने भारतीय महिला टीम को 2025 में पहली बार वनडे वर्ल्ड कप जिताने वाली कप्तान बनकर इतिहास रचा। इसी के साथ, उन्होंने 2026 में एशियन गेम्स में लगातार दूसरी बार भारत को गोल्ड मेडल दिलवाया। हालांकि, उनके शैक्षणिक विवाद ने उनके करियर में कठिनाइयाँ पैदा कीं, जब उनकी ग्रेजुएशन डिग्री को लेकर पुलिस जांच की गई और यह एक विवादित मुद्दा बन गया।

मोगा में जन्म और खेल के प्रति प्यार

हरमनप्रीत कौर का जन्म 8 मार्च 1989 को पंजाब के मोगा में हुआ। उनके पिता हरमंदर सिंह भुल्लर खुद खेलों के शौकीन थे, और इसे लेकर घर में एक खेल का माहौल था। हरमनप्रीत ने पहले बैडमिंटन और हॉकी जैसे खेल खेलें, लेकिन क्रिकेट ने उन्हें पूरी तरह से आकर्षित कर लिया। वह अक्सर लड़कों के साथ गली क्रिकेट खेलती थीं, जिससे उनकी क्रिकेटिंग स्किल्स में निखार आया।

शिक्षा और संघर्ष

हरमनप्रीत ने हंस राज महिला महाविद्यालय जलांधर से अपनी पढ़ाई की। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मोगा में हुई और क्रिकेट में करियर बनाने के लिए उन्होंने ग्यान ज्योति स्कूल अकादमी में ट्रेनिंग ली। हालांकि, पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाना कभी आसान नहीं था। कई चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने अपने लक्ष्य को जारी रखा और अंततः डिस्टेंस लर्निंग के माध्यम से डिग्री हासिल की।

ग्रेजुएशन डिग्री पर विवाद

हरमनप्रीत का ग्रेजुएशन डिग्री से जुड़ा विवाद उनके करियर में एक बड़ा तनाव बन गया। 2018 में पंजाब पुलिस ने उनकी डिग्री की पुष्टि करने के लिए उसे विश्वविद्यालय भेजा, जो फर्जी पाई गई। हरमनप्रीत ने इस पर सफाई दी कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उनकी कहानी ने क्रिकेट और शिक्षा के संतुलन की महत्ता को एक बार फिर सामने ला दिया।

पुलिस की नौकरी का सफर

हरमनप्रीत को उनकी बेहतरीन खेल के बाद 2017 में पंजाब पुलिस में डीएसपी की नौकरी दी गई। मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की घोषणा के बाद, उन्हें भारतीय रेलवे से रिलीव करने की समस्या का सामना करना पड़ा। अंततः, उन्होंने पुलिस में नौकरी शुरू की, लेकिन उनकी शैक्षणिक योग्यता फिर विवाद का कारण बनी। यह विवाद उनके करियर को प्रभावित करने लगा, और यह सुनिश्चित करना पड़ा कि उन्हें अपनी नौकरी बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़े।

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