फ्लाईदुबई विमान में ‘हाईजैक’ के झूठे अलार्म से हड़कंप: इजरायली लड़ाकू विमानों ने आसमान में घेरा, सऊदी अरब में आपातकालीन लैंडिंग
दुबई से इजरायल के तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई (Flydubai) के एक वाणिज्यिक यात्री विमान में उस समय अंतरराष्ट्रीय हड़कंप मच गया, जब विमान से अचानक ‘हाईजैक’ (विमान अपहरण) का आपातकालीन कोड प्रसारित हो गया। इस गंभीर सिग्नल के मिलते ही इजरायल, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के सुरक्षा तंत्र में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में इजरायली वायुसेना के लड़ाकू जेट विमानों (F-16/F-35) ने हवा में ही मोर्चा संभाला और विमान को सुरक्षा घेरे में ले लिया। गंभीर सुरक्षा प्रोटोकॉल और गहन तनाव के बीच, विमान को पड़ोसी देश सऊदी अरब के ताबुक क्षेत्रीय हवाई अड्डे (Tabuk Regional Airport) पर आपातकालीन स्थितियों में सुरक्षित लैंडिंग कराई गई।
शुरुआती जांच के बाद जो सच सामने आया, उसने सुरक्षा एजेंसियों को हैरान कर दिया। यह कोई आतंकवादी हमला या अपहरण की साजिश नहीं थी, बल्कि कॉकपिट के अंदर पायलटों के बीच हुआ एक गंभीर विवाद था, जिसके चलते गलती से यह ‘हाईजैक अलार्म’ एक्टिवेट हो गया था।
कैसे शुरू हुआ आसमान में हाई-वोल्टेज ड्रामा?
फ्लाईदुबई के इस नियमित यात्री विमान ने दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इजरायल के बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Tel Aviv) के लिए उड़ान भरी थी। विमान अपनी सामान्य ऊंचाई और रूट पर आगे बढ़ रहा था। जब विमान सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र को पार कर इजरायली सीमा के करीब पहुंचने वाला था, तभी अचानक विमान के ट्रांसपोंडर से ‘कोड 7500’ (Code 7500) प्रसारित हुआ। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नियमों के तहत, यह कोड केवल तभी दबाया या सेट किया जाता है जब विमान का अपहरण (Hijack) हो चुका हो। जैसे ही तेल अवीव और क्षेत्रीय एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के कंप्यूटर स्क्रीन पर यह कोड फ्लैश हुआ, चारों तरफ सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गईं। इजरायल, जो हमेशा से अपनी हवाई सुरक्षा को लेकर बेहद संवेदनशील रहता है, उसने इसे एक सीधा आत्मघाती या आतंकवादी हमला माना।
इजरायली जेटों की आक्रामक घेराबंदी
कोड 7500 मिलते ही इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने तुरंत अपना सर्वोच्च सुरक्षा प्रोटोकॉल ‘रेड अलर्ट’ लागू कर दिया। इजरायली वायुसेना के दो लड़ाकू विमानों ने तुरंत उड़ान भरी और हवा में ही फ्लाईदुबई के विमान को चारों तरफ से घेर लिया। लड़ाकू विमानों के पायलटों ने फ्लाईदुबई के कॉकपिट से संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन शुरुआती कुछ मिनटों तक कॉकपिट के भीतर से कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिससे संदेह और ज्यादा गहरा हो गया। इजरायली सुरक्षा विशेषज्ञों को डर था कि कहीं यह 9/11 जैसा कोई आत्मघाती हमला न हो, जिसमें विमान को तेल अवीव के किसी घनी आबादी वाले इलाके या महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान से टकराने की साजिश हो। लड़ाकू विमानों को निर्देश दिए गए थे कि अगर विमान इजरायली हवाई क्षेत्र में बिना अनुमति घुसने की कोशिश करे, तो सख्त कदम उठाए जाएं।
सऊदी अरब के ताबुक में कराई गई इमरजेंसी लैंडिंग
इसी बीच, सऊदी अरब के एयर ट्रैफिक कंट्रोलर और क्षेत्रीय सुरक्षा अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हस्तक्षेप किया। विमान को तुरंत इजरायली सीमा की तरफ बढ़ने से रोका गया और उसे नजदीकी सऊदी हवाई अड्डे—ताबुक क्षेत्रीय हवाई अड्डे की तरफ मोड़ने (Divert) का निर्देश दिया गया। सऊदी अरब के सुरक्षा बलों ने हवाई अड्डे को तुरंत छावनी में तब्दील कर दिया। एम्बुलेंस, दमकल गाड़ियां और कमांडो दस्ते रनवे के चारों तरफ तैनात कर दिए गए। विमान ने बेहद तनावपूर्ण माहौल के बीच ताबुक हवाई अड्डे पर सुरक्षित आपातकालीन लैंडिंग की। लैंडिंग के तुरंत बाद सऊदी कमांडो ने विमान को चारों तरफ से घेर लिया और पायलटों व क्रू से संपर्क स्थापित किया।
कॉकपिट का चौंकाने वाला सच: पायलटों के बीच हाथापाई!
सऊदी सुरक्षा एजेंसियों और एयरलाइन के तकनीकी अधिकारियों द्वारा की गई शुरुआती जांच में जो बात निकलकर सामने आई, उसने सबको स्तब्ध कर दिया। विमान के भीतर कोई भी आतंकवादी या बाहरी हमलावर मौजूद नहीं था। असल में, उड़ान के दौरान कॉकपिट के अंदर मुख्य पायलट (कमांडिंग ऑफिसर) और सह-पायलट (फर्स्ट ऑफिसर) के बीच किसी तकनीकी या व्यक्तिगत बात को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई थी। यह बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों के बीच कथित तौर पर हाथापाई की नौबत आ गई। इसी खींचतान और हाथापाई के दौरान, कॉकपिट के कंट्रोल पैनल पर मौजूद ट्रांसपोंडर का नॉब (Knob) घूम गया या गलती से ‘7500’ पर सेट हो गया। इस एक मानवीय गलती ने तीन देशों की सेनाओं और सुरक्षा विभागों को युद्ध जैसी स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया था।
एयरलाइन का आधिकारिक बयान और यात्रियों की स्थिति
इस घटना के बाद फ्लाईदुबई के प्रवक्ता ने एक आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि विमान पूरी तरह सुरक्षित है और सभी यात्री व क्रू मेंबर्स सुरक्षित हैं। एयरलाइन ने इसे एक ‘गंभीर मानवीय चूक और आंतरिक अनुशासनहीनता’ का मामला बताया। एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोनों पायलटों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है। ताबुक हवाई अड्डे पर फंसे यात्रियों के लिए एयरलाइन ने वैकल्पिक विमान और नए क्रू की व्यवस्था की, ताकि उन्हें उनकी मंजिल (तेल अवीव) तक पहुंचाया जा सके। यात्रियों ने बताया कि आसमान में जब लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को घेरा था, तो विमान के अंदर भयानक डर और चीख-पुकार का माहौल बन गया था।
अंतरराष्ट्रीय विमानन जगत में सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) और वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पायलटों का मानसिक रूप से तनावमुक्त होना उड़ान की सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी है। कॉकपिट के भीतर इस तरह की अनुशासनहीनता न केवल सैकड़ों यात्रियों की जान जोखिम में डालती है, बल्कि दो देशों के बीच भू-राजनीतिक तनाव या अनचाहे सैन्य टकराव का कारण भी बन सकती है। इस मामले की एक उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय जांच कमेटी भी गठित की जा रही है, जो इस पूरे घटनाक्रम की बारीकी से समीक्षा करेगी।
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