धर्म और अध्यात्म की दुनिया में एक नई लहर देखने को मिल रही है। कथावाचकों की एक नई पीढ़ी उभर रही है, जो केवल कथा या प्रवचन तक सीमित नहीं हैं। ये कथावाचक महंगी गाड़ियों और लग्जरी चीजों के शौकीन बनते जा रहे हैं। हाल ही में प्रसिद्ध कथावाचक देवी चित्रलेखा ने इस विषय पर अपनी राय साझा की।
महंगी गाड़ियों पर ट्रोलिंग का सामना
कथावाचक जया किशोरी भी कुछ समय पहले अपने महंगे क्रिश्चियन डिओर बैग को लेकर चर्चा में थीं। इस बैग की कीमत को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बहस हुई थी। वहीं, देवी चित्रलेखा को भी महंगी कार के कारण ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। एक पॉडकास्ट में जब उनसे कथावाचकों की लग्जरी लाइफस्टाइल के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने अपनी बात बड़े ही सहज तरीके से रखी।
लोगों की सोच और चित्रलेखा का जवाब
चित्रलेखा ने कहा, “लोग हमें पूरी तरह सुनते नहीं हैं। मैंने खुद कहा है कि पैसे में सुख है। कहीं घूमने या आने-जाने के लिए पैसे की जरूरत होती है। अगर मुझे मुंबई कथा करने जाना है, तो मैं फ्लाइट से जाऊंगी।” उन्होंने आगे कहा कि इस पर लोग ट्रोल करने लगते हैं कि कथावाचक महंगी चीजों में क्यों घूमते हैं।
फरारी की फोटो और ट्रोलिंग
देवी चित्रलेखा ने कहा, “जहां तक महंगी गाड़ी की बात है, तो वो गाड़ी मेरी नहीं थी। मैंने सिर्फ उस गाड़ी के साथ एक फोटो खिंचवाया था। उस पोस्ट में मैंने लिखा था कि मैंने सिर्फ चलाई है। लेकिन लोगों को कहानियां बनाने में मजा आता है।” इस पर उन्होंने मजाक करते हुए कहा कि लोग बिना समझे ही बातें बना देते हैं।
भगवान की कृपा और जीवन का मजा
चित्रलेखा ने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं कि हम मजेदार जिंदगी जीते हैं। भगवान ने हमें दिया है और वो हम पर कृपा करते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि जब आपका बॉस इतना बड़ा हो, तो आप तो मजे में रहेंगे। उन्होंने कहा कि दुनिया की अच्छी और महंगी चीजें लोगों को मिलनी चाहिए।
सामाजिक स्वीकार्यता का मुद्दा
जब चित्रलेखा से पूछा गया कि बागेश्वर का चश्मा, उनकी गाड़ी और जया किशोरी का लग्जरी बैग समाज क्यों स्वीकार नहीं कर पा रहा है, तो उन्होंने कहा, “आपने जितने भी नाम लिए, इनमें से कोई भी यह दावा नहीं करता कि हम वैरागी हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे खुद को गृहस्थ मानते हैं और उनका जीवन साधारण है।
ध्यान केंद्रित करने की बात
चित्रलेखा ने कहा, “कुछ लोग लग्जरी चीजों को पाने के लिए मेहनत करते हैं, लेकिन हमारा इन चीजों पर कोई फोकस नहीं है। यह बस भगवान की कृपा है।” उन्होंने कहा कि लोग इस बात को समझें कि वे भी साधारण जीवन जीते हैं और यह सब भगवान की दया से है।
कथावाचकों की जिम्मेदारी
कथावाचकों की जिम्मेदारी होती है कि वे अपने अनुयायियों को सही मार्गदर्शन दें। चित्रलेखा ने कहा कि समाज को यह समझना चाहिए कि वे भी इंसान हैं और अपनी पसंद के अनुसार जीने का हक रखते हैं। इस तरह की बातें समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।
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