तोते के नाम पर क्यों किया जाता है Chhattisgarh का सुआ नृत्य? गौरा-गौरी विवाह से जुड़ी है अनोखी परंपरा

The CSR Journal Magazine
भारत की लोक परंपराएं अपनी विविधता और अनोखी मान्यताओं के लिए जानी जाती हैं। छत्तीसगढ़, जिसे धान का कटोरा कहा जाता है, की सांस्कृतिक विरासत में सुआ लोकनृत्य का विशेष स्थान है। सदियों से चली आ रही यह परंपरा मुख्य रूप से महिलाओं से जुड़ी है। सुआ का अर्थ तोता होता है और इसी पक्षी को इस लोकनृत्य में प्रतीक के रूप में शामिल किया जाता है।

दीपावली से शुरू होती है परंपरा

सुआ नृत्य का आयोजन दीपावली के आसपास शुरू होता है और अगहन मास तक इसकी परंपरा निभाई जाती है। इसका संबंध नई फसल से भी माना जाता है। गांव की महिलाएं अलग-अलग घरों से पहली फसल का थोड़ा-थोड़ा धान एकत्र करती हैं। इसके बाद इस धान को बांस की टोकरी में रखा जाता है और उसके ऊपर मिट्टी से बना तोता स्थापित किया जाता है।

मिट्टी का तोता क्यों होता है खास?

सुआ नृत्य में तोते को महिलाओं की भावनाओं और मन की बातों का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जिस तरह तोता सुनी हुई बात को दोहरा सकता है, उसी तरह महिलाएं उसके माध्यम से अपने मन की भावनाएं अपने प्रिय तक पहुंचाने की कल्पना करती हैं। सुआ गीतों में प्रेम, विरह और जीवन से जुड़ी भावनाओं की अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।

तालियों की थाप पर होता है नृत्य

सुआ नृत्य की सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी वाद्य यंत्र की आवश्यकता नहीं होती। महिलाएं मिट्टी के तोते वाली टोकरी के चारों ओर घेरा बनाकर बैठती या खड़ी होती हैं और सुआ गीत गाते हुए तालियों की थाप पर नृत्य करती हैं। पारंपरिक साड़ी पहनकर किया जाने वाला यह नृत्य सामूहिकता और उत्सव की भावना को दर्शाता है।

गौरा-गौरी विवाह से है गहरा संबंध

छत्तीसगढ़ में दीपावली के अगले दिन गौरा-गौरी विवाह का विशेष लोक उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी की प्रतिमाएं बनाकर उनका विवाह कराया जाता है। इसी धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के बाद सुआ गीत और नृत्य की शुरुआत होती है।

गोंड समुदाय से जुड़ी है परंपरा

सुआ नृत्य का विशेष संबंध छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के गोंड आदिवासी समुदाय से माना जाता है। हालांकि समय के साथ यह परंपरा पूरे छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का हिस्सा बन गई। सुआ गीतों में महिलाओं की भावनाओं और अपनी पसंद के जीवनसाथी को लेकर उनकी अभिव्यक्ति भी दिखाई देती है। यही वजह है कि यह नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि लोकजीवन और महिलाओं की भावनाओं का जीवंत प्रतीक भी माना जाता है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos