शिवराज सिंह चौहान लखनऊ में ट्रैफिक जाम में फंसकर शादी में शामिल हुए बिना लौटे, घटना ने प्रबंधन पर उठाए सवाल

The CSR Journal Magazine
भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार को लखनऊ में अपनी पत्नी के साथ भाजपा नेता की बेटी की शादी में शामिल होने आए। लेकिन उन्हें भारी ट्रैफिक जाम के चलते बिना शादी में शामिल हुए ही लौटना पड़ा। यह घटना सरकार और संगठन के लिए एक शर्मिंदगी का कारण बन गई। दो प्रमुख भाजपा नेताओं की शादियों के कारण जाम बढ़ गया, जिससे सभी मेहमान प्रभावित हुए।

शादियों में जुटे थे हजारों मेहमान

20 अप्रैल को लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में भाजपा के दो दिग्गज नेताओं की शादियां थीं। एक समारोह में भाजपा एमएलसी महेंद्र सिंह की बेटी की शादी थी, जबकि दूसरे समारोह में योगी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह की भतीजी का विवाह हो रहा था। दोनों कार्यक्रमों में लगभग 10,000 मेहमान शामिल हुए, जिनमें सीएम योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम और अनेक मंत्री शामिल थे।

शिवराज का समय पर न पहुंच पाना

शिवराज सिंह चौहान का निजी विमान शाम 7:30 बजे लैंड होना था, लेकिन यह 30 मिनट देर से पहुंचा। यहां से उन्होंने पहले दिनेश प्रताप सिंह की शादी में हिस्सा लिया और वर-वधु को आशीर्वाद दिया। इसके बाद, जब वे महेंद्र सिंह की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए निकले, तभी उनका काफिला जाम में फंस गया।

जाम में फंसे करीब 15 मिनट तक

शिवराज का काफिला जाम में लगभग 15 मिनट तक फंसा रहा। ट्रैफिक पुलिसकर्मी जाम को खुलवाने की कोशिश करते रहे, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इस बीच, शिवराज सिंह को अपनी उड़ान की समय सीमा के कारण वक्त पर एयरपोर्ट पहुंचने के लिए जल्द लौटना पड़ा। उससे पहले ही उन्होंने महेंद्र सिंह की बेटी के लिए लाए उपहार को ब्रजेश सिंह को सौंप दिया।

ट्रैफिक प्रबंधन पर सवाल उठे

भाजपा एमएलसी महेंद्र सिंह की बेटी की शादी में शिवराज का ना पहुंच पाना एक चर्चा का विषय बन गया है। तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने जाम स्थिति को लेकर अपने कार्यों की जिम्मेदारी लेते हुए बताया कि वीवीआईपी मेहमानों की अधिकता के कारण जाम बढ़ गया।

पिछले मामलों की याद दिलाई

यह पहली बार नहीं है जब किसी वीवीआईपी को लखनऊ में जाम में फंसना पड़ा हो। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शपथ ग्रहण समारोह के दौरान जाम में फंसे थे और उन्हें पैदल चलकर समारोह तक पहुंचना पड़ा था। इस तरह की स्थितियों ने स्थानीय प्रशासन की आलोचना को जन्म दिया है।

ट्रैफिक व्यवस्था की जिम्मेदारी

लखनऊ समेत कई जिलों में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह से स्थानीय पुलिस के हाथ में होती है। छोटे जिलों में ट्रैफिक व्यवस्था का जिम्मा कुछ अधिकारियों पर होता है, जबकि बड़े जिलों में अतिरिक्त एसपी इस काम की निगरानी करते हैं। ऐसे में यह देखना जरूरी होगा कि अगले समय में इस तरह की घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है।

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