271 नदियों में पॉल्यूशन के 296 हॉटस्पॉट: क्या बिट्टू तबाही मॉडल से इसे साफ किया जा सकता है?

The CSR Journal Magazine
भारत की 271 नदियों में 296 पॉल्यूटेड स्ट्रेच का पता चला है। गंगा से यमुना तक, हर जगह जल प्रदूषण का खतरा बढ़ रहा है। इसी बीच, 21 साल के सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें बिट्टू तबाही के नाम से जाना जाता है, ने नदियों को साफ करने का एक अनोखा तरीका अपनाया है। बिट्टू ने अजनार नदी की सफाई का बीड़ा उठाया। उन्होंने जनवरी 26 से इस मुहिम की शुरुआत की और महीनों तक नदी से प्लास्टिक, बोतलें, जलकुंभी और अन्य प्रकार का कचरा निकाला। उनकी मेहनत ने न केवल स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा बल्कि अनेक उद्योगपतियों की भी सराहना प्राप्त की। आज उनकी कहानी देशभर में वायरल हो रही है।

बिट्टू का मॉडल: क्या यह स्थायी समाधान है?

बिट्टू का काम बहुत प्रेरणादायक है, लेकिन सवाल उठता है कि क्या इस तरह की सफाई का हमेशा प्रभाव रहेगा? क्या केवल एक व्यक्ति की कोशिश से नदियों की सफाई संभव है? सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 296 पॉल्यूटेड स्ट्रेच हैं। हालाँकि, 2018 में इनकी गिनती 351 थी, यानी पिछले कुछ वर्षों में कुछ सुधार हुआ है।

कच्चे आंकड़े और वास्तविकता

सबसे ज्यादा प्रदूषण महाराष्ट्र, केरल, मध्य प्रदेश, मणिपुर और उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है। जगह-जगह से आने वाले औद्योगिक कचरे और शहरी सीवेज ने नदियों पर दबाव बढ़ा दिया है। यमुना नदी में हाल की रिपोर्ट के अनुसार, ऑर्गेनिक प्रदूषण का स्तर भयावह है।

सीवेज से होने वाली समस्या

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नमामि गंगे योजना के तहत 218 सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट लगभग 35,698 करोड़ रुपये की लागत से चलाए जा रहे हैं। इनमें से 138 प्रोजेक्ट चालू हो चुके हैं। लेकिन प्रॉब्लम यह है कि गंगा से जुड़े राज्यों में रोजाना लगभग 11,785.5 एमएलडी सीवेज निकलता है, जबकि ट्रीटमेंट की क्षमता केवल 8,026.7 एमएलडी है।

बिट्टू की कहानी और सिस्टम की जरूरत

बिट्टू की कहानी एक व्यक्ति के संघर्ष की दास्तान है, लेकिन हर नदी के किनारे पर बिट्टू जैसे लोग नहीं हो सकते। नदी की सफाई के लिए जरूरी है कि सीवेज ट्रीटमेंट, इंडस्ट्रियल डिस्चार्ज की निगरानी और कचरे का प्रभावी प्रबंधन हो। एक व्यक्ति एक नदी से कचरा निकाल सकता है, लेकिन पूरे शहर का कचरा नदी में जाने से रोकने के लिए एक मजबूत सिस्टम की आवश्यकता होती है।

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