“स्कूल चोरी” का निकला फर्जीवाड़ा: ChatGPT से बने दस्तावेजों ने मचाया हड़कंप

The CSR Journal Magazine
बिहार के कटिहार जिले के प्राणपुर प्रखंड में एक अजीब मामला सामने आया है। स्थानीय निवासी यह दावा कर रहे हैं कि उनका पूरा प्राथमिक विद्यालय “चोरी” हो गया है। ग्रामीणों ने पहले बैठक की और फिर कटिहार जिला मुख्यालय पहुंचकर अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत दर्ज कराई। गांव के आदिवासी लोगों ने अनुमंडल पदाधिकारी और अन्य अधिकारियों के सामने आवेदन देकर मामले का निपटारा करने की मांग की।

बनाने के लिए मिले थे करोड़ों के टेंडर

ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय के भवन के निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई थी और इस कार्य के लिए 44 लाख 85 हजार रुपये की राशि भी जारी की गई थी। सरकारी दस्तावेज के अनुसार, 2024 में इस निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू हुई थी। ग्रामीणों का कहना है कि इस धनराशि का भुगतान तीन किस्तों में किया गया था।

जांच में सब बात सामने आई

जब मामला अधिकारियों के पास पहुँचा, तो उनकी जांच से पता चला कि जिस जगह विद्यालय बनना था, वहां केवल एक नदीनुमा टापू थी। ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण के नाम पर एक भी ईंट नहीं जोड़ी गई थी। स्थानीय प्रतिनिधियों ने बिना निर्माण के इतनी बड़ी राशि जारी किए जाने की शिकायत की। इस मामले में जांच का आश्वासन देते हुए सदर एसडीएम सूरज कुमार ने व्यक्तिगत रूप से मामले की तफ्तीश करने का निर्णय लिया।

बिना टेंडर के हुआ घोटाला?

एसडीएम और जिला शिक्षा पदाधिकारी की संयुक्त जांच में यह स्पष्ट हुआ कि विद्यालय निर्माण से संबंधित कोई भी टेंडर जारी नहीं हुआ था, और न ही कोई धनराशि निकाली गई थी। यानी 44 लाख 85 हजार रुपये की जो राशि दी गई थी, वह पूरी तरह से फर्जी थी। अधिकारियों ने दस्तावेजों का गहनता से जांचा और ग्रामीणों को वास्तविकता बताई।

ChatGPT की मदद से बने फर्जी दस्तावेज

इस पूरे मामले में और भी नया मोड़ आया जब प्रधानाध्यापक भानुप्रताप सिंह ने बताया कि गांव के कुछ लड़कों ने ChatGPT की सहायता से फर्जी दस्तावेज तैयार किए और इसे अफवाह के रूप में फैलाया। यह जानकारी मिली कि जांच में किसी तरह की अनियमितता नहीं पाई गई है।

जिलाधिकारी ने दी स्थिति स्पष्ट

कटिहार के जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने भी इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि एसडीओ और डीईओ ने मामले की जांच की है। उनके मुताबिक, जिस टेंडर का हवाला दिया जा रहा था, वह पहले ही रद्द हो चुका था। डीएम ने कहा कि कुछ लोगों ने भ्रम फैलाने की कोशिश की थी, लेकिन जांच के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है।

भ्रामक जानकारी ने बढ़ाई मुश्किलें

जिस शिकायत को लेकर ग्रामीण ढोल-नगाड़े के साथ प्रशासन के दरवाजे पहुंचे थे, वह जांच में फर्जी निकली। अब प्रशासन यह भी देखेगा कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने और फैलाने में किसकी भूमिका थी। इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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