बरेली से श्वेत क्रांति की नई शुरुआत, 1500 करोड़ से तैयार होंगी गाय की बेहतर नस्ल, देंगी 60 लीटर तक दूध

The CSR Journal Magazine
बरेली अब अपने झुमकों और सुरमे के अलावा पशुपालन के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। हाल ही में यहां आयोजित कैटल जीनोमिक्स समिट में गायों की नस्ल सुधारने और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलों का ऐलान हुआ। इस समिट में एलीट गिर बछड़ों के जन्म की बात की गई है, जिसे पशु नस्ल सुधार के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

1500 करोड़ का निवेश: नई तकनीक से गायों की नस्ल तैयार

बरेली की कंपनी बीएल एग्रो अब पशुपालन में क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में आ चुकी है। कंपनी ने अपनी बायोटेक्नोलॉजी इकाई लीड्स जेनेटिक्स में करीब 1500 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बनाई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसी गायों की नस्ल तैयार करना है, जो अधिक दूध देने में सक्षम हों। इसके तहत पशुओं के आनुवंशिक गुणों की पहचान कर उनका उपयोग किया जाएगा, जिससे बेहतर गुणवत्ता वाले भ्रूण तैयार किए जाएंगे।

धन की शक्ति, दूध की अधिकता

याद रखें, इस योजना के अनुसार, तैयार किए गए भ्रूण को गायों के गर्भ में प्रत्यारोपित किया जाएगा। इसके परिणामस्वरूप जन्‍म लेने वाली बछियों में सामान्य गायों की तुलना में अधिक दूध देने की क्षमता हो सकती है। इससे दूध उत्पादन को नया आयाम मिल सकता है।

60 लीटर दूध देने वाली गायों की उम्मीद

इस नई पहल के तहत गिर नस्ल के जेनेटिकली सेलेक्टेड एलीट बछड़ों का जन्म हुआ है। कंपनी के मुताबिक, ये गायें प्रतिदिन 40 से 60 लीटर दूध देने में सक्षम होंगी। हालांकि, असली उत्पादन पशुओं की देखभाल, पोषण और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। बीएल एग्रो के चेयरमैन डॉ. घनश्याम खंडेलवाल का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी के अवसर

बेहतर नस्ल और वैज्ञानिक पशुपालन के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाने के मौके तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही, कंपनी देशी नस्लों को मजबूत करने, एलीट बुल और भ्रूण का निर्माण भारत में ही करने पर भी ध्यान दे रही है। इसके लिए बरेली में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जा रहा है।

भविष्य की योजनाएं: भ्रूण उत्पादन का लक्ष्य

इस सेंटर में वर्ष 2027 के अंत तक हर महीने लगभग 15 हजार भ्रूण तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। यह योजना निश्चित रूप से बरेली को पशुपालन के हब के रूप में एक नई पहचान दिलाएगी। इस दिशा में उठाए गए कदम न केवल तकनीकी दृष्टि से बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साबित होंगे।

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