UP Allahabad High Court: हर गवाह के बयान की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अब अनिवार्य

The CSR Journal Magazine
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में गवाहों के बयान की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को अनिवार्य बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यूपी के DGP को इस संबंध में कार्रवाई करने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने से आपराधिक मामलों की जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ेगी। जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने यह महत्वपूर्ण आदेश दिया। यह आदेश आगरा के एक दहेज से जुड़े मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया था।

कोर्ट की चिंता और दिशा-निर्देश

कोर्ट ने कहा कि कई बार जांच अधिकारियों ने गवाहों के बयान की रिकॉर्डिंग नहीं की। जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान, जांच अधिकारी ने यह स्वीकार किया कि उसने पहली शिकायतकर्ता का बयान दर्ज करते समय उसकी ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने BNSS के नियमों का जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि जांच अधिकारियों को गवाह का बयान रिकॉर्ड करने की अनुमति है। ऐसे में यह साफ है कि पुलिस के पास यह सुविधा पहले से मौजूद है।

DGP के सर्कुलर की भूमिका

कोर्ट ने DGP के 21 जुलाई 2025 और 4 अगस्त 2026 के सर्कुलर का भी उल्लेख किया। इन सर्कुलरों में गवाहों के बयानों की रिकॉर्डिंग के लिए निर्देश दिए गए हैं। हाईकोर्ट ने यह भी बताया कि कई जांच अधिकारी इस प्रक्रिया से बचते हैं, क्योंकि उन्हें आरोप लगने का डर होता है। आरोप यह होता है कि गवाह का बयान जांच अधिकारी ने खुद लिखा है, जिससे पूरे मामले में पेचिदगी बढ़ जाती है।

गवाहों के बयान की रिकॉर्डिंग का महत्व

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि गवाहों के बयान की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग से जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। DGP के सर्कुलर में रेप पीड़िता के बयान की रिकॉर्डिंग अनिवार्य है, जबकि अन्य गवाहों के बयानों को ऑप्शनल रखा गया है। कोर्ट ने कहा कि कई बार इस विकल्प का गलत इस्तेमाल होता है, जिससे जांच में असंगतता आती है। इसीलिए कोर्ट ने DGP को सभी बयानों की रिकॉर्डिंग अनिवार्य करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने DGP से कहा है कि सभी जांच अधिकारियों को नियमों का पालन करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए जाएं। उनका मुख्य लक्ष्य असली आरोपी को न्याय के सामने लाना होना चाहिए, जबकि निर्दोष लोगों को गलत जांच से परेशान नहीं होना चाहिए। पिछले मामलों में रिकॉर्डिंग की कमी से उठे सवालों को देखते हुए, हाईकोर्ट ने इस कदम को बेहद आवश्यक बताया है। अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट की नजर गवाहों के बयान की रिकॉर्डिंग पर रहेगी।

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