UP Election 2027: ओवैसी का पूर्वांचल पर बड़ा दांव, 30 सीटों पर नजर

The CSR Journal Magazine
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी बिहार में मिले सफलता को उत्तर प्रदेश में दोहराने की कोशिश में हैं। वे पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक राजनीतिक आधार बनाने में जुटे हैं। सपा और कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावनाएं खत्म होने के बाद, ओवैसी ने 200 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का प्लान बनाया है।

मुस्लिम मतदाताओं पर जोर

आजमगढ़ में एक जनसभा के दौरान ओवैसी ने मुस्लिम समुदाय से वोट बैंक की पारंपरिक राजनीति से बाहर निकलने की अपील की। उन्होंने घोषणा की कि उन्होंने ‘मिशन-2027’ की शुरुआत कर दी है। ओवैसी की नजर पूर्वांचल में आजमगढ़, जौनपुर, गाजीपुर, मऊ और बलिया जैसे मुस्लिम बहुल जिलों पर है।

समाजवादी पार्टी और बीजेपी पर सीधा हमला

आजमगढ़ रैली में ओवैसी ने सपा और बीजेपी दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं की जनसंख्या 15 से 30 प्रतिशत के बीच है। जैसे मुबारकपुर और गोपालपुर जैसी सीटों पर यह मतदाता निर्णायक साबित हो सकते हैं। उनके इस प्रयास से सपा और कांग्रेस की राजनीतिक गणित बिगड़ सकती है।

2022 के चुनावों में AIMIM का प्रभाव

2022 के विधानसभा चुनावों में AIMIM ने तीन दर्जन सीटों में से केवल 12 पर उम्मीदवार उतारे थे, फिर भी उन्हें 3 प्रतिशत वोट मिले थे। आजमगढ़ के मुबारकपुर सीट पर ओवैसी के उम्मीदवार ने 16% से अधिक वोट हासिल किए। वह भले ही चुनाव जीत न सके, लेकिन ‘वोट कटवा’ की छवि बनाकर वह सपा की संभावनाओं को सीमित करने में सफल रहे। अब AIMIM ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए प्रभावशाली स्थानीय मुस्लिम नेताओं को अपने साथ लाने की योजना बनाई है। इसके तहत, वह ऐसे नेताओं को टिकट देने की सोच रहा है जिन्हें सपा या अन्य विपक्षी दलों ने नजरअंदाज किया है। पार्टी उन नेताओं की सूची तैयार कर रही है जो आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सपा के ‘PDA’ नरेटिव को खतरा, मुस्लिम वोटों का विभाजन

पूर्वांचल में सपा का ‘MY’ (मुस्लिम-यादव) समीकरण ही उसकी ताकत है। अगर ओवैसी सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारते हैं और मुस्लिम वोटरों का एक हिस्सा AIMIM के पक्ष में जाता है, तो सपा के चुनावी भविष्य पर खतरा मंडरा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि मुस्लिम वोट बंटते हैं, तो इसका सीधा लाभ बीजेपी को होगा। यही वजह है कि अखिलेश यादव ने ओवैसी के खिलाफ कड़ी बयानबाजी से बचने की सलाह दी है, ताकि वोटों का ध्रुवीकरण AIMIM की ओर न हो। अब यह देखना होगा कि ओवैसी अपने इस ‘मिशन-पूर्वांचल’ में कितने सफल होते हैं।

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