शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मांग की है कि उन्हें पद से हटाया जाए और जेल में डाला जाए। ठाकरे का यह बयान उस समय आया है जब लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप चुनाव आयोग पर लग रहा है। ठाकरे ने आगामी चुनावों में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि अब समय आ गया है कि असली लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल किया जाए।
विपक्ष के एकजुट होने का आह्वान
ठाकरे ने अपने बयान में कहा है कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष को एकजुट होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के फैसलों ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा, “हम सभी को लोकतंत्र के लिए एक साथ आना होगा। इसके बिना हमारी आवाजें सुनी नहीं जाएंगी।” यह स्पष्ट है कि ठाकरे की मांगें केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरी चुनाव प्रणाली के लिए गंभीर चिंताएं हैं।
दो अन्य चुनाव आयुक्तों की शिकायतें
हाल ही में, तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को शिकायत दी है कि ज्ञानेश कुमार की मनमानी चल रही है। इस मामले में ठाकरे ने उनके साहस की प्रशंसा की और कहा कि अब चुनाव आयोग को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “यह स्थिति अस्वीकार्य है।” उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ स्पष्ट रूप से जमीनी कार्रवाई की मांग उठाई है।
मतपत्र से चुनाव की वापसी की मांग
उद्धव ठाकरे ने मतपत्र के जरिए चुनाव कराने की भी मांग की। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र की रक्षा के लिए यह आवश्यक है कि चुनाव में पारदर्शिता हो।” ठाकरे का यह बयान उस समय आया है जब आरोप लगे हैं कि लगभग 40 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में जोड़े गए और चुनाव के बाद हटा दिए गए। उन्होंने कहा कि ये सभी मुद्दे सत्ता की लालसा से जुड़े हैं।
सुप्रीम कोर्ट का संज्ञान लेने की मांग
ठाकरे ने साफ शब्दों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा, “देश के प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी है कि ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटा दें और उन्हें जेल में डालें।” यह बयान राजनीतिक गलियारों में नए विवाद को हवा दे सकता है।
भविष्य की चुनावी प्रक्रिया पर जोर
उद्धव ठाकरे ने कहा कि चुनाव आयोग को चाहिए कि वह अपने फैसलों की पुनरावृत्ति करे। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र के चुनावों को दोबारा कराना आवश्यक है। यह बयान आने वाले चुनावों पर प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि कई विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर उनकी समर्थन में आ सकते हैं।
जनता की आवाज को सुनने की जरूरत
ठाकरे ने जनता के प्रतिनिधियों से अपील की कि उन्हें लोगों की आवाज सुननी चाहिए। उन्होंने कहा, “आज हम सभी को लोकतंत्र को बचाने के लिए एक साथ आना होगा।” यह स्पष्ट है कि उद्धव ठाकरे का यह बयान चुनावी माहौल में काफी हलचल पैदा कर सकता है।
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