चुनाव से पहले मेलोनी ने बुर्का बैन क्यों लगाया? जानें इटली की सियासत में मुस्लिम फैक्टर

The CSR Journal Magazine

मेलोनी का बड़ा फैसला

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हाल ही में स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। यह कदम इटली में 2027 में होने वाले आम चुनावों से पहले उठाया गया है। मेलोनी का यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि चुनाव में अप्रवासी मुद्दा और मुस्लिम समुदाय का बड़ा प्रभाव हो सकता है। मेलोनी ने कहा कि नया कानून लागू होने पर विदेशी छात्रों की संख्या पर भी नियंत्रण रखा जाएगा।

क्यों है बुर्के का मुद्दा अहम?

इटली में 2022 के चुनाव में 26 प्रतिशत मतदाताओं ने बाहरी, यानी अप्रवासी मुद्दे को प्राथमिकता दी थी। वहीं, इटली में लगभग 3 प्रतिशत मुस्लिम रहते हैं। मेलोनी का यह फैसला उनके दक्षिणपंथी वोटरों को आकर्षित करने की कोशिश करता है। इटली में पिछले कुछ वर्षों में मुस्लिम और अप्रवासी समुदाय को लेकर चर्चाएँ बढ़ी हैं। ऐसे में मेलोनी चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए बुर्के को बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही हैं।

अतीत की कानूनी व्यवस्था

इटली में 2008 में एक कानून के तहत यह स्पष्ट किया गया था कि चेहरे को धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से ढकने की अनुमति हो सकती है, लेकिन पहचान सत्यापन के दौरान चेहरे को दिखाना आवश्यक है। मेलोनी की सरकार ने इस व्यवस्था को फिर से सामने लाते हुए बुर्के पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह निर्णय चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

जनमत संग्रह के बाद का परिदृश्य

साल 2026 में मेलोनी ने न्यायिक सुधार पर जनमत संग्रह कराया था, जिसमें उन्हें कड़े विरोध का सामना करना पड़ा था। इसके बाद से उन्होंने आम चुनाव के लिए रणनीति में बदलाव करने की योजना बनाई। मुस्लिम और अन्य विदेशियों के मुद्दे को उठाकर मेलोनी अपने कोर वोटरों को साधना चाहती हैं।

दुनिया में बुर्के पर बैन

इटली के अलावा, दुनिया भर के 24 देशों में बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इनमें यूरोप के कई देशों जैसे फ्रांस, पुर्तगाल, स्विट्ज़रलैंड, बेल्जियम और अन्य शामिल हैं। एशिया के 7 देशों, जैसे चीन, श्रीलंका, और उजबेकिस्तान में भी ये प्रतिबंध लागू हैं।

नवीनतम शिक्षा प्रतिशत

इटली में स्कूल जाने वाले छात्रों में लगभग 20 प्रतिशत बच्चे अप्रवासी समुदाय से हैं। ऐसे में मेलोनी इस मुद्दे को चुनावी प्रचार का हिस्सा बनाकर एक नया विवाद खड़ा करने का प्रयास कर रही हैं। चुनावी रणनीति में मुस्लिम और अप्रवासी मुद्दों को बढ़ाना मेलोनी के लिए एक चुनौती बन सकता है।

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