अगर आप खेती के साथ-साथ पशुपालन करके अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं, तो बकरी पालन एक शानदार विकल्प हो सकता है। भारत के विभिन्न राज्यों में बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए कई सरकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं के तहत छोटी बकरी इकाइयों की स्थापना के लिए आर्थिक सहायता से लेकर बड़े व्यवसायों के लिए सब्सिडी का भी प्रावधान है।
राज्य सरकारों की अलग-अलग योजनाएं
देशभर में बकरी पालन के लिए कोई एकीकृत योजना नहीं है। विभिन्न राज्यों में इकाइयों का आकार, सब्सिडी, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया में भिन्नता है। उदाहरण के लिए, केंद्र सरकार के राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत भेड़-बकरी पालन से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट के लिए पूंजीगत सब्सिडी उपलब्ध है।
गुजरात की 10+1 योजना
गुजरात में बकरी पालन के लिए 10+1 योजना चल रही है। इस योजना के तहत 10 मादा बकरियों और 1 नर बकरे की इकाई स्थापित करने के लिए 90,000 रुपये की लागत निर्धारित की गई है। पात्र लाभार्थी को इसकी 50 फीसदी यानी अधिकतम 45,000 रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है।
लाभार्थियों की सफलता की कहानियां
जामनगर जिले के तमाचल गांव के पशुपालक हथाभाई छावालिया ने भी इस योजना का लाभ उठाया है। वह बताते हैं कि सरकारी मदद और लोन के चलते उन्होंने बकरी पालन शुरू किया और अब उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।
अन्य राज्यों में भी योजनाएं
बकरी पालन को बढ़ावा देने वाली योजनाएं सिर्फ गुजरात में ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी उपलब्ध हैं। इन योजनाओं की जानकारी संबंधित पशुपालन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर देखी जा सकती है।
केंद्र सरकार की उद्यमिता योजना
केंद्र सरकार की राष्ट्रीय पशुधन मिशन की भेड़-बकरी पालन उद्यमिता योजना सामान्य 10+1 बकरी इकाई से भिन्न है। इस योजना के तहत उद्यमियों को कम से कम 500 मादा और 10 नर बकरियों की इकाई स्थापित करने की अनुमति है। इस परियोजना पर 50 फीसदी तक बैक-एंडेड सब्सिडी मिलती है, जिसकी अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये तक है।
राज्य अनुसार सहायता का व्यवस्थित वितरण
राज्यों के अनुसार सहायता के प्रावधान भी अलग-अलग हैं। जैसे: गुजरात में 10+1 योजना, मध्य प्रदेश में 10+1 इकाई के लिए अनुदान और उत्तराखंड में 70 हजार रुपये में से 63 हजार रुपये की सरकारी सहायता उपलब्ध है।
बकरी पालन की लागत और मार्केट
बकरी पालन के जरिए मिलने वाली सहायता को सीधे मुनाफे के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसमें पशुओं की खरीद, चारा, शेड, पानी, दवा, बीमा और देखभाल का खर्च शामिल होता है। इसके अलावा बकरियों की नस्ल, बीमारी, मृत्यु दर और स्थानीय बाजार में कीमत भी आमदनी को प्रभावित करती हैं।
कैसे करें आवेदन?
हर राज्य में आवेदन प्रक्रिया अलग हो सकती है। कुछ स्थानों पर ग्राम सभा और पशुपालन विभाग के जरिए चयन होता है, जबकि अन्य में ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया जाता है। बकरी पालन छोटे किसानों के लिए खेती के साथ अतिरिक्त आय का विकल्प हो सकता है।
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