Maharashtra CSR Authority: सीएसआर के लिए महाराष्ट्र में बनेगा महा CSR प्राधिकरण

The CSR Journal Magazine
Maharashtra CSR Authority: महाराष्ट्र में कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR in Maharashtra) के तहत मिलने वाली राशि के इस्तेमाल को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने CSR से जुड़े अलग-अलग स्तरों पर चल रहे कामों को एक मंच पर लाने के लिए ‘महा CSR प्राधिकरण’ (Maharashtra CSR Authority) स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मुंबई के सह्याद्री अतिथिगृह में हुई बैठक में CSR के जरिए राज्य के विकास और सामाजिक क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने पर विस्तार से चर्चा हुई।

Maharashtra CSR Authority: महाराष्ट्र में सीएसआर के लिए बनेगा एक साझा मंच

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि राज्य में CSR के तहत कई संस्थाएं, कंपनियां और स्वयंसेवी संगठन अलग-अलग स्तरों पर काम कर रहे हैं। इन सभी प्रयासों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने के लिए प्रस्तावित महा CSR प्राधिकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्राधिकरण के जरिए CSR फंड का समन्वय, निगरानी और उचित इस्तेमाल सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा। इसका उद्देश्य यह भी होगा कि कंपनियों की CSR राशि सही जरूरत वाले क्षेत्रों और परियोजनाओं तक पहुंचे।

Maharashtra CSR Authority: कंपनियों के लिए तैयार होगी ‘प्रोजेक्ट बैंक’

सरकार की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं की एक गुणवत्तापूर्ण ‘प्रोजेक्ट बैंक’ तैयार करने की योजना है। यह प्रोजेक्ट बैंक कंपनियों और स्वयंसेवी संस्थाओं को उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे अपनी CSR राशि के लिए उपयुक्त परियोजना का चयन कर सकें। इसके अलावा CSR के लिए पात्र छोटे और मध्यम उद्योगों को भी सही परियोजना और स्वयंसेवी संस्था चुनने के लिए मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य में अच्छे और प्रभावी CSR कार्यों को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी प्राधिकरण काम करेगा।

सिर्फ नई परियोजनाएं नहीं, पुरानी योजनाओं पर भी फोकस

मुख्यमंत्री ने CSR से बनने वाली परियोजनाओं के रखरखाव और मरम्मत को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कई बार CSR के माध्यम से परियोजनाएं तो बन जाती हैं, लेकिन बाद में उनके रखरखाव के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं होती। इससे कुछ वर्षों के बाद ये परियोजनाएं निष्क्रिय हो जाती हैं। प्रस्तावित प्राधिकरण के जरिए पुरानी CSR परियोजनाओं की स्थिति की निगरानी कर उनके रखरखाव और मरम्मत को प्राथमिकता देने की योजना है। इससे CSR से तैयार संपत्तियों का लंबे समय तक इस्तेमाल सुनिश्चित किया जा सकेगा।

विदेशों में बसे महाराष्ट्र से जुड़े लोगों को भी जोड़ने की तैयारी

बैठक में मुख्यमंत्री ने ‘डायस्पोरा कनेक्ट’ की अवधारणा का भी अध्ययन करने का सुझाव दिया। इसके तहत विदेशों और महाराष्ट्र के बाहर रहने वाले महाराष्ट्र से जुड़े लोगों की भागीदारी के जरिए CSR और सामाजिक विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य महाराष्ट्र से भावनात्मक और सामाजिक रूप से जुड़े लोगों को राज्य की विकास परियोजनाओं से जोड़ना हो सकता है।

मुख्यमंत्री होंगे प्राधिकरण के अध्यक्ष

प्रस्तावित महा CSR प्राधिकरण की संरचना में मुख्यमंत्री अध्यक्ष होंगे। इसके गवर्निंग काउंसिल में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को गवर्निंग काउंसिल का सदस्य-सचिव बनाया जाएगा। साथ ही वह कार्यकारी परिषद के प्रमुख की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। सरकार का मानना है कि उद्योग जगत, सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय से CSR फंड का इस्तेमाल केवल राशि खर्च करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे राज्य की वास्तविक सामाजिक और विकास संबंधी जरूरतों से जोड़ा जा सकेगा।

देश के इन राज्यों में पहले से CSR प्राधिकरण?

महाराष्ट्र का प्रस्तावित ‘महा CSR प्राधिकरण’ देश में अपनी तरह की पहली पहल नहीं होगी। गुजरात में Gujarat CSR Authority पहले से काम कर रही है। गुजरात सरकार ने इसे CSR फंड के समन्वय, निगरानी और बेहतर उपयोग के लिए स्थापित किया है और इसके जरिए कंपनियों, सरकारी संस्थाओं तथा स्वयंसेवी संगठनों को CSR परियोजनाओं से जोड़ा जाता है। वहीं राजस्थान में Rajasthan Corporate Social Responsibility Authority का गठन 5 नवंबर 2019 को किया गया था और मई 2022 में इसका पंजीकरण भी हुआ। राजस्थान की व्यवस्था का उद्देश्य CSR गतिविधियों के लिए मार्गदर्शन और राज्य की प्राथमिकताओं के अनुरूप CSR संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। इस लिहाज से महाराष्ट्र का प्रस्ताव गुजरात और राजस्थान के मॉडल से सीख लेते हुए अपना संस्थागत ढांचा तैयार करने की दिशा में कदम माना जा सकता है।

महाराष्ट्र में कितना CSR फंड खर्च होता है?

महाराष्ट्र देश में CSR खर्च के सबसे बड़े केंद्रों में शामिल है। FY 2023-24 में महाराष्ट्र में कंपनियों की ओर से करीब ₹8,939 करोड़ का CSR खर्च दर्ज हुआ, जो उस वर्ष देश के कुल ₹19,208 करोड़ के CSR खर्च का लगभग 46.53% था। वहीं केंद्र सरकार के CSR डेटाबेस के अनुसार देशभर में कंपनियों का कुल विकास संबंधी CSR खर्च FY 2023-24 में ₹34,908.75 करोड़ रहा। महाराष्ट्र में CSR की इतनी बड़ी राशि को देखते हुए राज्य सरकार का ‘महा CSR प्राधिकरण’ बनाने का प्रस्ताव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकार का लक्ष्य इस फंड को अलग-अलग कंपनियों और संस्थाओं के बिखरे हुए खर्च से निकालकर राज्य की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं, सामाजिक विकास और लंबे समय तक चलने वाली योजनाओं से जोड़ना है।
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