LPG Pipeline Project 2026: देश में बिछेगी 1800 किमी LPG पाइपलाइन, यूपी समेत 6 राज्यों को मिलेगा फायदा

The CSR Journal Magazine
देश में LPG सिलेंडर की सप्लाई को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने करीब 7,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली लगभग 1,800 किलोमीटर लंबी LPG पाइपलाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं से देश के छह राज्यों में LPG पहुंचाने का नेटवर्क और मजबूत होगा।

UP समेत इन 6 राज्यों से गुजरेगी पाइपलाइन

LPG Pipeline Project 2026: नई पाइपलाइन का नेटवर्क तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक और गोवा तक फैलेगा। इन परियोजनाओं को सरकारी कंपनी GAIL (India) Limited विकसित करेगी। तीन प्रमुख पाइपलाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें तेलंगाना के चेरलापल्ली से महाराष्ट्र के नागपुर तक 556 किमी, उत्तर प्रदेश के झांसी से उत्तराखंड के सितारगंज तक 611 किमी और महाराष्ट्र के शिक्रापुर से गोवा व कर्नाटक के हुबली तक 633 किमी की पाइपलाइन शामिल है।

LPG टैंकरों की सड़क पर आवाजाही होगी कम

नई पाइपलाइन परियोजनाओं का एक बड़ा मकसद LPG की लंबी दूरी की ढुलाई में सड़क टैंकरों पर निर्भरता कम करना है। पाइपलाइन के जरिए LPG को ज्यादा सुरक्षित और लगातार तरीके से दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाया जा सकता है। PNGRB के मुताबिक पाइपलाइन के जरिए LPG परिवहन सड़क मार्ग की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और किफायती माना जाता है। इससे लंबी दूरी तक LPG टैंकरों की आवाजाही घट सकती है और सड़क हादसों का जोखिम भी कम करने में मदद मिल सकती है।

7,700 से बढ़कर 9,500 किमी होगा नेटवर्क

नई परियोजनाएं पूरी होने के बाद देश का PNGRB-अधिकृत कॉमन-कैरियर LPG पाइपलाइन नेटवर्क करीब 7,700 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 9,500 किलोमीटर हो जाएगा। यानी नेटवर्क में करीब 23.5 फीसदी का विस्तार होगा। यह विस्तार पहले मंजूर किए गए करीब 2,757 किलोमीटर लंबे कांडला-गोरखपुर LPG पाइपलाइन नेटवर्क को भी आगे बढ़ाएगा। यह परियोजना देश के LPG परिवहन ढांचे को एक बड़े नेटवर्क में जोड़ने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

LPG Pipeline Project 2026: आम लोगों को क्या फायदा होगा?

नई पाइपलाइन का असर सीधे तौर पर LPG सिलेंडर की कीमत घटने के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। इसका मुख्य फायदा सप्लाई सिस्टम को मजबूत और भरोसेमंद बनाने में होगा। सड़क के बजाय पाइपलाइन से LPG की लंबी दूरी की ढुलाई बढ़ने पर लॉजिस्टिक लागत कम करने, हाईवे पर टैंकरों की संख्या घटाने, ट्रैफिक दबाव कम करने और ईंधन परिवहन से होने वाले उत्सर्जन को घटाने में मदद मिल सकती है।

भारत के LPG नेटवर्क को मिलेगी नई मजबूती

भारत अपनी LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। समुद्र तट के पास मौजूद आयात टर्मिनलों से LPG को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया जाता है। ऐसे में मजबूत पाइपलाइन नेटवर्क से तटीय क्षेत्रों से दूर स्थित बाजारों तक LPG पहुंचाने की व्यवस्था ज्यादा बेहतर हो सकती है।

बड़ी तस्वीर

करीब 7,000 करोड़ रुपये की यह परियोजना सिर्फ पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की LPG सप्लाई चेन को सड़क आधारित परिवहन से पाइपलाइन आधारित व्यवस्था की ओर ले जाने की कोशिश है। खासकर झांसी-सितारगंज पाइपलाइन से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ने वाला नया कॉरिडोर इन दोनों राज्यों के लिए LPG परिवहन ढांचे को मजबूत कर सकता है।

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