वंदे मातरम् विवाद पर Dharmendra Pradhan का कांग्रेस पर हमला

The CSR Journal Magazine
कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वंदे मातरम् को लेकर विवाद और बढ़ गया है। कांग्रेस की कार्यसमिति ने 1937 में पारित प्रस्ताव का पालन करने का फैसला किया है, जिसके अनुसार वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो पद गाए जाएंगे। इस निर्णय ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

धर्मेंद्र प्रधान का तंज: वोट बैंक की राजनीति का आरोप

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस फैसले को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने एक बार फिर ‘तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति’ का रास्ता अपनाया है। धर्मेंद्र ने यह भी कहा कि वंदे मातरम् देश के गौरव का प्रतीक है और इसके पूर्ण गान से पीछे हटने का फैसला कांग्रेस की पुरानी राजनीति की पुनरावृत्ति है।

वंदे मातरम् का महत्व: राहुल गांधी को संदेश

धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि वंदे मातरम् ने स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान की लौ जगाई थी। उन्होंने कहा, “कांग्रेस का तुष्टीकरण फिर सामने है और वंदे मातरम् का अपमान देश की एकता को कमजोर करने की एक कोशिश है।” उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को चुनौती दी कि वे देश के राष्ट्रीय गौरव और वोट बैंक में से क्या चुनेगा।

इतिहास से सीखने की जरूरत

धर्मेंद्र ने 1937 में कांग्रेस द्वारा वंदे मातरम् को सीमित करने के निर्णय को याद करते हुए बताया कि उस वक्त की तुष्टीकरण की राजनीति ने देश का बंटवारा कर दिया। उन्होंने कहा कि आज जब वंदे मातरम् के 150वें वर्ष का जश्न मनाया जा रहा है, तब कांग्रेस का वही देशविरोधी चरित्र सामने आ रहा है।

राष्ट्रीय सम्मान पर कोई समझौता नहीं

धर्मेंद्र ने कांग्रेस के नेताओं को स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सम्मान और एकता किसी भी वोट बैंक से बड़े हैं। उन्होंने कहा कि देश वंदे मातरम् के सम्मान से कोई समझौता नहीं करेगा। इसके अलावा, उन्होंने राहुल गांधी को भी आगाह किया कि क्या कांग्रेस के लिए राष्ट्रगौरव महत्वपूर्ण है, या केवल वोट बैंक की राजनीति।

कांग्रेस का असली चेहरा

धर्मेंद्र ने बताया कि कांग्रेस की हालिया कार्रवाई देश को जोड़ने के बजाय तोड़ने वाली है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के लिए यह आवश्यक है कि वह इतिहास से सबक लें और ऐसे निर्णय न लें जो देश की एकता को नुकसान पहुंचाएं।

राजनीतिक विवाद बढ़ता गया

कांग्रेस और भाजपा के बीच यह विवाद अब एक नए स्तर पर पहुंच चुका है। जहां कांग्रेस अपने निर्णयों का बचाव कर रही है, वहीं भाजपा इसे तुष्टीकरण की राजनीति के रूप में देख रही है। अब देखने वाली बात होगी कि इस मुद्दे पर राजनीतिक दल किस प्रकार अपनी रुख अपनाते हैं।

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