UP: ग्रेटर नोएडा में अस्पताल की गलत रिपोर्ट ने बढ़ाई मुश्किलें, टाइफाइड बुखार के मामले में किडनी खराब होने की झूठी जानकारी

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक अस्पताल पर बच्चे की गलत मेडिकल रिपोर्ट बनाने का गंभीर आरोप लगा है। बच्चे को बुखार की शिकायत पर अस्पताल में एडमिट कराया गया था। परिजनों का कहना है कि अस्पताल की रिपोर्ट में बच्चे की किडनी खराब होने की बात कही गई। डॉक्टरों ने डायलिसिस की जरूरत बताई और बच्चे की जान को खतरा होने की आशंका भी जताई। यह मामला तब सामने आया जब परिवार ने दूसरे अस्पताल में जांच करवाई, जहाँ बच्चे को टाइफाइड बुखार निकला।

दूसरे अस्पताल में मिली सच्चाई

परिजनों ने बताया कि पहले अस्पताल की रिपोर्ट देखकर वे चिंतित हो गए थे। डॉक्टरों ने कहा कि बच्चे का क्रिएटिनिन, पोटेशियम और सोडियम काफी बढ़ा हुआ है। इसके बाद डॉक्टरों ने बच्चे को आईसीयू में रखने की सलाह दी। परिवार ने रिपोर्ट की पुष्टि के लिए दूसरी लैब में भी सैंपल भेजा, जहाँ से भी पहले जैसी रिपोर्ट आई। इसके बाद डॉक्टरों ने इलाज की मंजूरी वाले कागज पर दस्तखत करने और पैसे जमा करने को कहा।

डॉक्टरों की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता

वकील सचिन बिधूड़ी का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि उनके बेटे की किडनी खराब हो चुकी है और उसे डायलिसिस की जरूरत है। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि डायलिसिस के दौरान बच्चे का हार्ट फेल हो सकता है। परिवार के लोग यह सुनकर घबरा गए। इसी बीच उनके रिश्तेदार अस्पताल पहुंचे और बच्चे को किसी दूसरे अस्पताल में दिखाने की सलाह दी।

कैलाश अस्पताल में इलाज शुरू

परिजन बच्चे को लेकर कैलाश अस्पताल पहुंचे। वहाँ डॉक्टरों ने दूसरी जांच की, जिसमें टाइफाइड की बात सामने आई। कैलाश अस्पताल के डॉक्टरों ने ग्रीन सिटी अस्पताल की रिपोर्ट देखने के बाद बच्चे को हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी। इसके बाद बच्चे को एंबुलेंस से नोएडा के कैलाश अस्पताल पहुंचाया गया। वहाँ डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज शुरू हुआ।

गलत रिपोर्ट का बड़ा असर

सचिन बिधूड़ी का कहना है कि दोबारा जांच कराने पर बच्चे को टाइफाइड बुखार होने की बात सामने आई। टेस्ट में किडनी से जुड़ी वैसी समस्या नहीं मिली, जैसी पहली रिपोर्ट में बताई गई थी। परिवार का आरोप है कि ग्रीन सिटी अस्पताल की रिपोर्ट गलत थी। उनका कहना है कि अगर उसी रिपोर्ट के आधार पर बच्चे का इलाज किया जाता तो उसकी सेहत को नुकसान पहुंच सकता था।

कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज

इस मामले में सूरजपुर थाना प्रभारी संजय सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि मेडिकल विभाग की टीम पूरे मामले की जांच करेगी। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले में अस्पताल और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच होनी है। जांच के बाद ही यह साफ होगा कि मेडिकल रिपोर्ट में गलती कैसे हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

स्वास्थ्य विभाग की भूमिका

स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में गंभीरता से संज्ञान लिया है। विभाग की टीम अस्पताल की जांच करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए यह जरूरी है कि मरीजों को सही और सटीक जानकारी मिले।
यह मामला न केवल एक परिवार के लिए बल्कि पूरे स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक चुनौती है। गलत रिपोर्टिंग से मरीजों की जान को खतरा हो सकता है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जरूरत है ताकि भविष्य में किसी और को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

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