अमृतसर एयरपोर्ट के पास तीन संदिग्ध ड्रोन दिखने से हड़कंप, दिल्ली, मुंबई और कुआलालंपुर से आने वाली उड़ानें प्रभावित
पंजाब के अमृतसर स्थित श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास रविवार, 11 अक्टूबर की रात संदिग्ध ड्रोन जैसी वस्तुएं दिखाई देने के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। राजासांसी इलाके के पास हुई इस गतिविधि के कारण हवाई अड्डे पर विमानों की आवाजाही कुछ समय के लिए प्रभावित हुई और अमृतसर पहुंचने वाली तीन उड़ानों का मार्ग बदलना पड़ा। इनमें एयर इंडिया, इंडिगो और मलेशिया एयरलाइंस की उड़ानें शामिल थीं। सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और जरूरी जांच के बाद हवाई अड्डे का संचालन सामान्य कर दिया गया। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब हवाई अड्डों के आसपास बिना अनुमति उड़ने वाले ड्रोन को सुरक्षा की दृष्टि से गंभीरता से लिया जाता है। हालांकि, शुरुआती जानकारी में आसमान में दिखाई देने वाली वस्तुओं को संदिग्ध बताया गया है। उनकी वास्तविक प्रकृति, उन्हें संचालित करने वाले व्यक्ति और उनकी गतिविधि के उद्देश्य को लेकर जांच की जा रही है। इसलिए इस घटना को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
रात करीब 9:30 बजे दिखाई दीं संदिग्ध वस्तुएं
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार रात करीब 9:30 बजे हवाई अड्डे पर तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों ने राजासांसी क्षेत्र के पास आसमान में दो से तीन अज्ञात उड़ती वस्तुओं को देखा। ये वस्तुएं काफी ऊंचाई पर दिखाई दीं और उनकी गतिविधि संदिग्ध लगने पर सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल इसकी सूचना नियंत्रण कक्ष को दी। सूचना मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने स्थिति का आकलन शुरू किया। हवाई अड्डे के आसपास किसी भी संदिग्ध हवाई गतिविधि को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि विमानों के उतरने और उड़ान भरने के दौरान निर्धारित हवाई क्षेत्र की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में वस्तुओं की पहचान स्पष्ट होने तक सावधानी बरतना आवश्यक माना गया। सुरक्षा कर्मियों की सूचना के बाद हवाई यातायात से जुड़े अधिकारियों ने एहतियाती कदम उठाए। रात करीब 9:32 बजे अमृतसर आने वाली तीन उड़ानों को वैकल्पिक हवाई अड्डों की ओर भेजने का निर्णय लिया गया। इससे यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संभावित जोखिम से बचने की कोशिश की गई।
दिल्ली, मुंबई और कुआलालंपुर से आने वाली उड़ानें प्रभावित
संदिग्ध ड्रोन गतिविधि के कारण तीन उड़ानों को अलग-अलग हवाई अड्डों की ओर मोड़ना पड़ा। इनमें दो घरेलू मार्गों से आने वाली और एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान शामिल थी। दिल्ली से अमृतसर आ रही एयर इंडिया की उड़ान एआई-855 को वापस दिल्ली भेज दिया गया। मुंबई से अमृतसर पहुंचने वाली इंडिगो की उड़ान 6ई-5028 का मार्ग बदलकर उसे चंडीगढ़ भेजा गया। वहीं, कुआलालंपुर से अमृतसर आ रही मलेशिया एयरलाइंस की उड़ान एमएच-118 को दिल्ली की ओर मोड़ दिया गया। इस तरह एक ही घटना के कारण देश के अलग-अलग शहरों से अमृतसर पहुंचने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। उड़ानों के मार्ग में अचानक बदलाव होने से यात्रियों के आगे के कार्यक्रम, हवाई अड्डे से घर या होटल तक पहुंचने की व्यवस्था और अन्य यात्राओं पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, प्रभावित यात्रियों की कुल संख्या और सभी यात्रियों को हुई देरी के बारे में विस्तृत आधिकारिक आंकड़े सामने नहीं आए हैं।
चंडीगढ़ पहुंची इंडिगो की उड़ान
मुंबई से अमृतसर जा रही इंडिगो की उड़ान 6ई-5028 को चंडीगढ़ की ओर मोड़े जाने की पुष्टि चंडीगढ़ हवाई अड्डे के प्रबंधक ने की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विमान रात करीब 10:30 बजे चंडीगढ़ पहुंचा और वहां से रात 11:25 बजे अमृतसर के लिए रवाना हुआ। इस घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने के बाद उड़ानों को वैकल्पिक हवाई अड्डों पर भेजने का निर्णय तत्काल लिया गया। हालांकि, किसी विमान को दूसरे हवाई अड्डे पर उतारने का मतलब यह नहीं है कि उसके साथ कोई दुर्घटना हुई या विमान को तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ा। इस मामले में मार्ग परिवर्तन सुरक्षा संबंधी एहतियात के तौर पर किया गया था।
हवाई अड्डे की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा
संदिग्ध वस्तुएं दिखाई देने के बाद सीआईएसएफ के जवानों ने नियंत्रण कक्ष को सूचित किया और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। हवाई अड्डे पर विमानों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों ने स्थिति का आकलन किया। आवश्यक जांच और एहतियाती कार्रवाई के बाद हवाई यातायात सामान्य कर दिया गया। इस दौरान सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह रहा कि आसमान में दिखाई देने वाली वस्तुएं वास्तव में ड्रोन थीं या किसी अन्य प्रकार की उड़ती वस्तुएं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी पहचान और गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन वस्तुओं को किसने उड़ाया था, वे कहां से आई थीं और क्या उनका उद्देश्य हवाई अड्डे की गतिविधियों पर नजर रखना था। ऐसी घटनाओं में सुरक्षा एजेंसियों के लिए केवल वस्तुओं को देखना ही पर्याप्त नहीं होता। उनकी दिशा, उड़ान की अवधि, संभावित संचालन क्षेत्र और हवाई अड्डे के प्रतिबंधित क्षेत्र से उनकी दूरी जैसे पहलुओं का भी आकलन करना पड़ता है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही घटना की वास्तविक प्रकृति स्पष्ट हो सकेगी।
सितंबर में भी सामने आई थी ऐसी घटना
अमृतसर हवाई अड्डे के आसपास संदिग्ध ड्रोन जैसी वस्तुएं दिखाई देने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 6 सितंबर 2026 की रात भी हवाई अड्डे के परिचालन क्षेत्र और रनवे के आसपास संदिग्ध उड़ती वस्तुएं देखे जाने की सूचना मिली थी। उस घटना के बाद हवाई यातायात नियंत्रित करना पड़ा था और अमृतसर आने वाली सात उड़ानों का मार्ग बदल दिया गया था। उस समय भी एयर इंडिया, इंडिगो और मलेशिया एयरलाइंस सहित विभिन्न विमान सेवाओं की उड़ानें प्रभावित हुई थीं। कुछ विमानों को दिल्ली और चंडीगढ़ की ओर भेजा गया था। सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क किया गया था और यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एहतियाती कदम उठाए गए थे। सितंबर और अक्टूबर में सामने आई इन घटनाओं के कारण हवाई अड्डे के आसपास हवाई सुरक्षा को लेकर सतर्कता का महत्व और बढ़ गया है। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें एक ही साजिश या किसी संगठित गतिविधि से जोड़कर देखना फिलहाल उचित नहीं होगा।
हवाई अड्डों के पास ड्रोन उड़ाना क्यों गंभीर मामला?
ड्रोन का इस्तेमाल आज फोटोग्राफी, निगरानी, कृषि, औद्योगिक निरीक्षण और अन्य कई कार्यों के लिए किया जाता है। लेकिन हवाई अड्डों के आसपास अनधिकृत ड्रोन उड़ाना विमान संचालन के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। विमान के उतरते समय या उड़ान भरते समय पायलट को निर्धारित हवाई क्षेत्र में सुरक्षित और स्पष्ट परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। यदि कोई ड्रोन विमान के रास्ते में आ जाए, तो टक्कर का खतरा पैदा हो सकता है। छोटे ड्रोन भी विमान के इंजन, पंखों या अन्य संवेदनशील हिस्सों के लिए खतरा बन सकते हैं। इसके अतिरिक्त, संदिग्ध हवाई गतिविधि की सूचना मिलने पर अधिकारियों को एहतियात के तौर पर उड़ानों का मार्ग बदलना या कुछ समय के लिए परिचालन रोकना पड़ सकता है। इससे यात्रियों को असुविधा होती है और विमान सेवाओं के समय-सारिणी पर असर पड़ता है। भारत में ड्रोन संचालन के लिए निर्धारित नियम और प्रतिबंधित क्षेत्र लागू हैं। हवाई अड्डों के आसपास उड़ान भरने से पहले संबंधित क्षेत्र के नियमों और आवश्यक अनुमतियों का पालन करना जरूरी है। बिना अनुमति उड़ान भरने पर परिस्थितियों के अनुसार कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
यात्रियों को हुई परेशानी, लेकिन सुरक्षा को प्राथमिकता
अमृतसर हवाई अड्डे पर हुई इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। उड़ानों का मार्ग बदलने से यात्रियों को इंतजार करना पड़ सकता है, उनकी आगे की यात्रा प्रभावित हो सकती है और उन्हें वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था भी करनी पड़ सकती है। इसके बावजूद, संभावित खतरे की स्थिति में एहतियाती निर्णय विमान और यात्रियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। यात्रियों के लिए ऐसी परिस्थितियों में संबंधित विमानन कंपनी से उड़ान की नवीनतम स्थिति की जानकारी लेना उपयोगी होता है। उड़ान का समय बदलने या वैकल्पिक हवाई अड्डे पर उतरने की स्थिति में आगे की यात्रा की योजना भी उसी के अनुसार बनानी पड़ सकती है।
जांच के बाद स्थिति सामान्य
फिलहाल अमृतसर के श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर परिचालन सामान्य होने की जानकारी है। हालांकि, संदिग्ध वस्तुओं की पहचान और उनकी गतिविधियों से जुड़े सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिल सकेंगे। रविवार रात की घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलते ही सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई और तीन उड़ानों को वैकल्पिक हवाई अड्डों की ओर भेजा गया। अब जांच का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि आसमान में दिखाई देने वाली वस्तुएं क्या थीं और वे हवाई अड्डे के आसपास किस उद्देश्य से उड़ रही थीं।
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