मनमाने हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: विमान खड़े करने की चेतावनी, केंद्र को 7 दिन की मोहलत

The CSR Journal Magazine

सुप्रीम कोर्ट का आदेश- 7 दिन में तय करें हवाई किराया नियम; एयरलाइंस न मानें तो होगी सख्ती

हवाई यात्रियों को त्योहारों, छुट्टियों और आपातकालीन परिस्थितियों में एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी लूट से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाया है। देश की शीर्ष अदालत ने सोमवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह 7 दिनों के भीतर नए हवाई किराया नियमों का प्रकाशन करे। इसके साथ ही कोर्ट ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि कोई भी एयरलाइंस कंपनी इन नियमों का पालन नहीं करती है, तो उसके विमान तुरंत ग्राउंडेड (उड़ानें ठप) कर दिए जाएं। न्यायालय की इस अभूतपूर्व सख्ती के बाद केंद्र सरकार ने माना कि नए नियमों को पूरी तरह लागू करने की समय-सीमा पर तेजी से काम चल रहा है और अंतिम नियमों का खाका भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत तैयार किया जा रहा है।

अदालती आदेश की मुख्य बातें

नियमों का त्वरित प्रकाशन: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सीलबंद लिफाफे में रखे गए ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक करने और 7 दिनों के भीतर प्रकाशित करने का निर्देश दिया।
विमान खड़े करने की चेतावनी: जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने स्पष्ट कहा कि यात्रियों के शोषण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियम न मानने वाली एयरलाइंस के प्लेन सीधे खड़े कर दिए जाएंगे।
3 हफ्ते की मोहलत: केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) अनिल कौशिक ने ड्राफ्ट को पूरी तरह अंतिम रूप देने के लिए तीन हफ्ते का समय मांगा था। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 तय की है।
स्वतंत्र नियामक की मांग: कोर्ट इस बात की समीक्षा कर रहा है कि हवाई किरायों की पारदर्शी निगरानी के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र एविएशन रेगुलेटर बनाया जाए।

क्यों पड़ी कोर्ट को हस्तक्षेप करने की जरूरत?

यह पूरी कानूनी लड़ाई सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन की एक जनहित याचिका (PIL) के बाद शुरू हुई। याचिकाकर्ता ने कोर्ट के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए कि देश में घरेलू एयरलाइंस किस तरह आम नागरिकों का आर्थिक शोषण कर रही हैं।

डायनामिक प्राइजिंग और सीक्रेट एल्गोरिदम की मनमानी

निजी एयरलाइंस बेहद गोपनीय और मांग-आधारित ‘डायनामिक प्राइजिंग एल्गोरिदम’ का उपयोग करती हैं। इसके जरिए टिकटों के दाम रियल-टाइम में सेकंडों के भीतर कई गुना बढ़ा दिए जाते हैं। इसका खामियाजा उन यात्रियों को भुगतना पड़ता है जिन्हें मेडिकल इमरजेंसी, परिवार में मृत्यु या किसी अन्य जरूरी काम के कारण अंतिम समय (लास्ट मिनट) में टिकट बुक करनी पड़ती है।

त्योहारों और प्राकृतिक आपदाओं में ‘लूट’

दीवाली, छठ, ईद, या गर्मियों की छुट्टियों जैसे पीक सीजन में टिकटों की कीमतें अचानक 3 से 4 गुना तक उछल जाती हैं। कोर्ट ने स्वयं पिछली सुनवाई (मई में) संज्ञान लिया था कि एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइंस 8,000 रुपये से लेकर 18,000 रुपये तक वसूल रही थीं, जिसका कोई तार्किक आधार नहीं था।

बैगेज लिमिट में कटौती और हिडन चार्जेस

याचिका में यह भी रेखांकित किया गया कि निजी विमानन कंपनियों ने इकोनॉमी क्लास के यात्रियों के लिए मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा 25 किलोग्राम से घटाकर सीधे 15 किलोग्राम कर दी है। पहले जो सुविधाएं मूल टिकट का हिस्सा होती थीं, अब उन्हें ‘सीट चयन शुल्क’ (Seat Selection Fee) और ‘अतिरिक्त बैगेज शुल्क’ जैसे छिपे हुए टैक्स के माध्यम से कमाई का एक बड़ा जरिया बना दिया गया है।

सरकार का पक्ष और नए कानून का ढांचा

केंद्र सरकार की ओर से अदालत को आश्वस्त किया गया कि सरकार उपभोक्ताओं के हितों के प्रति गंभीर है। विमानन मंत्रालय के अनुसार, भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 (Bharatiya Vayuyan Adhiniyam) को जनवरी 2025 में लागू किया जा चुका है। इस नए कानून के तहत ही हवाई किरायों को तर्कसंगत और पारदर्शी बनाने के नियमों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। हालांकि, याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील रविंद्र श्रीवास्तव ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने संसद में नागरिक विमानन मंत्री द्वारा दिए गए उस पुराने बयान का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि “सरकार हवाई किराए की अधिकतम सीमा (अपर कैप) तय नहीं कर सकती क्योंकि यह पूरी तरह मार्केट-ड्रिवन (बाजार पर निर्भर) है”। इसी इच्छाशक्ति की कमी के कारण देश के नागरिकों के समानता, सम्मान से जीने और निर्बाध आवाजाही के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है।

क्या बदलाव आ सकते हैं नए नियमों से?

विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और सरकार नए नियमों को सख्ती से लागू करते हैं, तो निम्नलिखित बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं-
मुख्य क्षेत्र – वर्तमान स्थिति – नए नियमों के बाद संभावित बदलाव
टिकट किराया – मांग बढ़ते ही असीमित बढ़ोतरी (Dynamic Pricing) – दूरी के आधार पर किराए की ऊपरी सीमा (Maximum Cap) का निर्धारण
बैगेज शुल्क – 15 किलो के बाद प्रति किलो पर भारी जुर्माना – बैगेज शुल्क के लिए पारदर्शी और समान नीतियां
सीट बुकिंग – मनपसंद सीट के नाम पर छिपे हुए अतिरिक्त शुल्क – फ्लाइट की न्यूनतम 60% सीटों को बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के अलॉट करना
कैंसिलेशन व रिफंड – रिफंड के नाम पर नाममात्र की राशि वापस मिलना – एकतरफा रद्दीकरण पर यात्रियों को तुरंत मुआवजा और स्पष्ट रिफंड नियम

आगे क्या होगा? आम यात्रियों के लिए इसके मायने

सुप्रीम कोर्ट के इस हंटर के बाद विमानन उद्योग में खलबली मच गई है। निजी एयरलाइंस कंपनियां लगातार मुफ्त सीटों और किराए की कैपिंग का विरोध करती रही हैं, क्योंकि इससे उनके राजस्व मॉडल पर सीधा असर पड़ता है। लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया है कि व्यापारिक हितों के नाम पर आम जनता का शोषण नहीं होने दिया जाएगा। अब पूरी नजर 7 सितंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है। इस तारीख को केंद्र सरकार को अंतिम रूप से तैयार किया गया पूरा विनियामक ढांचा (Regulatory Framework) न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। यदि सरकार के ये नियम यात्रियों को प्रभावी राहत देने में सक्षम पाए जाते हैं, तो भारत के एविएशन सेक्टर में मनमाने किरायों के दौर का हमेशा के लिए अंत हो सकता है।

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