चीनी के दाम में नरमी, लेकिन महंगाई बरकरार

The CSR Journal Magazine
त्योहारों के मौसम नजदीक है और इस बीच चीनी के दाम में थोड़ी राहत मिली है। देश में औसत चीनी का खुदरा रेट लगातार चार दिन से 60 रुपये प्रति किलो के नीचे बना हुआ है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को चीनी का औसत रेट 59.57 रुपये प्रति किलो रहा। बीते दिन की तुलना में ये रेट थोड़ा बढ़ा है, लेकिन राहत इतनी बड़ी नहीं है क्योंकि यह अगस्त के मुकाबले अभी भी महंगा है।

दामों में अंतर की तस्वीर

देशभर में चीनी के दामों में भारी अंतर देखने को मिल रहा है। सोमवार को न्यूनतम खुदरा रेट 40 रुपये प्रति किलो और अधिकतम 85 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। ऐसे में, जबकि औसत कीमत 60 रुपये से नीचे है, कई जगहों पर उपभोक्ताओं को इससे भी अधिक दाम चुकाने पड़ रहे हैं। त्योहारों के दौरान मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने से कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बढ़ सकता है।

दक्षिण में अलग-अलग रखी गई दामों की ताल

दक्षिण भारत के राज्यों में चीनी के दाम एकजुट नहीं हैं। आंध्र प्रदेश में औसत रेट 21 अगस्त के 49.58 रुपये से बढ़कर 55.56 रुपये प्रति किलो हो गया है। कर्नाटक में भी कीमतों में इजाफा हुआ है, वहीं तमिलनाडु में हल्की गिरावट देखी गई। केरल में भी रेट बढ़कर 57.80 रुपये प्रति किलो हो गया है।

महक में छिपा मौलिक खेल

भारत के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में हालात कुछ अलग हैं। महाराष्ट्र में औसत खुदरा रेट 21 अगस्त के 59 रुपये से घटकर 58.22 रुपये प्रति किलो हो गया। उत्तर प्रदेश में भी कीमतों में थोड़ी नरमी आई है, वहां औसत रेट 59.64 रुपये से घटकर 57.88 रुपये प्रति किलो हो गया। वहीं मध्य प्रदेश में दामों में गिरावट और स्पष्ट रही, जहां औसत रेट 56.57 रुपये प्रति किलो हो गया।

सरकार के बड़े कदम

सरकार ने चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। 21 अगस्त को चीनी के आयात की इजाजत दी गई और थोक विक्रेताओं के लिए स्टॉक रखने के नियम भी सख्त किए गए। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करना और कीमतों पर नियंत्रण रखना है। हालांकि, 2025-26 मार्केटिंग ईयर के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है, जबकि घरेलू मांग लगभग 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है।

त्योहारों की चुनौतियाँ

त्योहारों के दौरान मिठाई, बेकरी और घर में पकवानों की मांग बढ़ने से चीनी की खपत में इजाफा होता है। ऐसे में आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव फिर से बढ़ सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां त्योहारों का खास महत्व है, वहां खुदरा कीमतें औसत से ऊपर रह सकती हैं। हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए अच्छी बात ये है कि देश का औसत चीनी रेट लगातार चौथे दिन 60 रुपये प्रति किलो के नीचे बना हुआ है।

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