ट्रंप की हार पर तहसीन पूनावाला का तंज, बोले- फेल्ड मार्शल और मिनी माउस शहबाज नोबेल के लिए फिर नॉमिनेट करें
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सेना के जनरलों पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘फेल्ड मार्शल’ और ‘मिनी माउस’ शहबाज शरीफ को ट्रंप के नाम की सिफारिश फिर से नोबेल समिति के पास भेजनी चाहिए। अक्टूबर 2026 में घोषित हुए नोबेल शांति पुरस्कारों की रेस से ट्रंप के बाहर होने और नवी पिल्लई को यह प्रतिष्ठित सम्मान मिलने के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बयानबाजियों का दौर गर्म है। पाकिस्तान द्वारा भारत-पाक संघर्ष विराम (सीजफायर) में ट्रंप की मध्यस्थता की कथित भूमिका को लेकर की जा रही तारीफों के बीच पूनावाला का यह बयान वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
पूनावाला ने शहबाज शरीफ को बताया ‘मिनी माउस’
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने की खीझ और उस पर होने वाली राजनीतिक बयानबाजियों ने एक नया मोड़ ले लिया है। देश के चर्चित राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल पुरस्कार की दौड़ में मिली शिकस्त के बाद पाकिस्तान प्रशासन पर बेहद चुटीला और आक्रामक हमला बोला है। पूनावाला ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी हुक्मरानों का मजाक उड़ाते हुए उन्हें सलाह दी है कि वे एक बार फिर ट्रंप के नाम को नोबेल के लिए आगे बढ़ाएं। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अक्टूबर 2026 में नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा की गई। डोनाल्ड ट्रंप को पूरी उम्मीद थी कि इस बार दुनिया भर के कई विवादों और युद्धों को रुकवाने के उनके दावों के कारण नोबेल समिति उन्हें इस सम्मान से नवाजेगी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी नोबेल की घोषणा के वक्त तक ट्रंप के दावों और भारत-पाकिस्तान के बीच शांति प्रयासों में उनकी कथित भूमिका का गुणगान कर रहे थे। हालांकि, जब नोबेल समिति ने ट्रंप को दरकिनार कर मानवाधिकार कार्यकर्ता नवी पिल्लई को यह पुरस्कार देने का फैसला किया, तो ट्रंप का गुस्सा फूट पड़ा।
तहसीन पूनावाला का सोशल मीडिया पर तीखा वार
तहसीन पूनावाला ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में पाकिस्तान के दोगले रवैये और ट्रंप की इस हताशा पर तंज कसने में बिल्कुल देर नहीं की। उन्होंने सीधे तौर पर पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अपने निशाने पर लिया। पूनावाला ने पाकिस्तानी जनरलों को ‘फेल्ड मार्शल’ (असफल सैन्य कमांडर) और शहबाज शरीफ को ‘मिनी माउस’ कहकर संबोधित किया।
उन्होंने अपने आधिकारिक बयान में लिखा, “जिस तरह से पाकिस्तान के फेल्ड मार्शल और मिनी माउस शहबाज शरीफ नोबेल शांति पुरस्कार के ऐलान तक डोनाल्ड ट्रंप की पैरवी में कसीदे पढ़ रहे थे, उससे उनकी बेबसी साफ झलकती है। अब जब ट्रंप की हार हो चुकी है, तो इन दोनों को मिलकर ट्रंप के नाम का नामांकन नोबेल समिति के पास दोबारा भेजना चाहिए, ताकि उनकी बची-कुची कूटनीतिक साख बची रहे।” पूनावाला का यह तंज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
नोबेल न मिलने पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप
गौरतलब है कि नोबेल पुरस्कार की घोषणा के बाद से डोनाल्ड ट्रंप का गुस्सा सातवें आसमान पर है। पुरस्कार न मिलने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए नोबेल देने वाली समिति और नॉर्वे सरकार पर सीधा हमला बोला। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने दुनिया भर में कम से कम आठ बड़े युद्धों को सुलझाया और खून-खराबा रोका है, लेकिन इसके बावजूद उनके योगदान को नजरअंदाज किया गया। नवी पिल्लई को नोबेल मिलने पर ट्रंप ने नॉर्वे को खुली धमकी देते हुए कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका इस पुरस्कार का असली हकदार था। उन्होंने लिखा कि नोबेल समिति ने अपने ऊपर एक ऐसा दाग लगा लिया है जो इतिहास में कभी नहीं मिटेगा। ट्रंप ने आरोप लगाया कि कुछ कट्टरपंथी और लोकतंत्र विरोधी ताकतों ने नोबेल शांति पुरस्कार की निष्पक्षता और साख को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। इस अप्रत्याशित नाराजगी के बाद ट्रंप ने अपनी नई ख्वाहिश जाहिर करते हुए कहा कि अब वे अपने उत्कृष्ट लेखन के लिए पुलित्जर पुरस्कार पाना चाहते हैं।
शहबाज शरीफ का ट्रंप प्रेम और कूटनीतिक नाकामी
विशेषज्ञों का मानना है कि तहसीन पूनावाला के इस तंज के पीछे पाकिस्तान की वह कूटनीतिक मजबूरी है, जिसके तहत वह लगातार अमेरिका के दक्षिण एशियाई झुकाव को अपनी तरफ मोड़ने की कोशिश करता रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में जब नोबेल शांति पुरस्कारों का काउंटडाउन चल रहा था, तब पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ लगातार दुनिया के सामने यह नैरेटिव सेट करने में जुटे थे कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर बनाए रखने और तनाव कम करने में अहम भूमिका निभाई थी।
पाकिस्तानी मीडिया और प्रशासन को उम्मीद थी कि अगर ट्रंप को नोबेल मिलता है, तो पाकिस्तान अमेरिका के साथ अपने संबंधों को एक नए स्तर पर ले जा सकेगा और वैश्विक मंच पर भारत के खिलाफ कूटनीतिक बढ़त हासिल कर सकेगा। लेकिन नोबेल समिति के फैसले ने ट्रंप के साथ-साथ शहबाज शरीफ की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया।
पुरस्कार या राजनीति का अखाड़ा?
तहसीन पूनावाला के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में एक पुरानी बहस को दोबारा जिंदा कर दिया है। आलोचकों और राजनीतिक विश्लेषकों का एक धड़ा लंबे समय से यह मानता रहा है कि नोबेल शांति पुरस्कार अब विशुद्ध रूप से कूटनीति और वैश्विक राजनीति का अखाड़ा बन चुका है। जब भी किसी वैश्विक नेता या संस्था के पक्ष में फैसला नहीं आता, तो वे इस पूरी प्रक्रिया को राजनीतिक और पूर्वाग्रह से ग्रसित बताने लगते हैं। ट्रंप के समर्थकों का तर्क है कि अब्राहम एकॉर्ड्स जैसे कूटनीतिक समझौतों के जरिए ट्रंप ने मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों में शांति स्थापित की, जिससे हजारों लोगों की जान बची। वहीं दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि नोबेल समिति का फैसला किसी तात्कालिक कूटनीतिक सौदेबाजी को देखकर नहीं, बल्कि मानवाधिकारों और जमीनी स्तर पर दशकों तक किए गए संघर्षों के आधार पर तय किया जाता है।
बयानबाजी के सियासी मायने
भारत के संदर्भ में तहसीन पूनावाला के इस तंज को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक और आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, जहां सेना (जिन्हें पूनावाला ने फेल्ड मार्शल कहा) और चुनी हुई सरकार के बीच हमेशा खींचतान बनी रहती है। ऐसे में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का ध्यान देश की समस्याओं को सुलझाने के बजाय अमेरिकी नेताओं की चाटुकारिता पर केंद्रित होना भारत के राजनीतिक विश्लेषकों को रास नहीं आ रहा है। पूनावाला ने अपने इस तीखे हमले से यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तान चाहे जितनी भी कोशिशें कर ले, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी खोखली कूटनीति अब किसी से छिपी नहीं है। ट्रंप की हार और उस पर पाकिस्तान की छटपटाहट को पूनावाला ने बेहद सटीक शब्दों में बयां कर वैश्विक मंच पर इस्लामाबाद की किरकिरी कर दी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नोबेल शांति पुरस्कार भले ही शांति के दूतों को दिया जाता हो, लेकिन इसके इर्द-गिर्द होने वाली राजनीति दुनिया भर के नेताओं और विश्लेषकों के बीच तीखी बयानबाजी और तंज का सबसे बड़ा जरिया बन चुकी है। अब देखना यह होगा कि तहसीन पूनावाला के इस ‘फेल्ड मार्शल’ और ‘मिनी माउस’ वाले तंज पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय या वहां के सोशल मीडिया हैंडलर्स की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है।
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