सोनिया गांधी ने साझा की राजीव गांधी के साथ प्यार की यादें, किताब ‘Belonging’ का किया ऐलान

The CSR Journal Magazine
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने हाल ही में X पर अपने पहले पोस्ट में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ अपने प्यार की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे इंग्लैंड में एक ग्रीक रेस्तरां में उनकी पहली मुलाकात हुई थी। सोनिया ने कहा, “यहीं से प्यार की शुरुआत हुई, हमने साथ मिलकर यादों की एक दुनिया बनाई।” इस पोस्ट के साथ उन्होंने अपनी नई किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ का भी जिक्र किया, जो 10 नवंबर को लॉन्च होगी।

पहली मुलाकात की यादें

सोनिया गांधी ने बताया कि जब वह पहली बार राजीव से मिलीं, तो उन्हें तुरंत लगा कि वह ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके साथ वह रहना चाहेंगी। उन्होंने कहा, “बाद में मुझे पता चला कि वह भी ऐसा ही महसूस करते थे।” दोनों ने दोस्ती की शुरुआत की और कई मौकों पर एक साथ समय बिताया। सोनिया ने राजीव की सौम्य स्वभाव की तारीफ करते हुए कहा, “वह बहुत अच्छे दिखते थे, लेकिन उनका सौम्य स्वभाव साफ नजर आता था।”

किताब में जीवन के अनुभव

सोनिया की किताब ‘Belonging’ में उनके बचपन के दिनों से लेकर राजीव गांधी से मुलाकात तक के अनुभवों का जिक्र है। इसमें नेहरू-गांधी परिवार में शादी और परिवार में हुई त्रासदियों का भी वर्णन किया गया है। किताब की शुरुआत सोनिया के युद्ध के बाद इटली के वेनेटो क्षेत्र में बचपन से होती है और इसमें उनके कैम्ब्रिज जाने का भी जिक्र है।

गांधी परिवार की त्रासदियाँ

किताब में गांधी परिवार की कई बड़ी त्रासदियों का जिक्र है, जैसे संजय गांधी की विमान हादसे में मौत, इंदिरा गांधी की हत्या और राजीव गांधी की हत्या। सोनिया ने इन घटनाओं के बाद अपने जीवन में आए बदलावों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने भारतीय संस्कृति को अपनाया, हिंदी सीखी और साड़ी पहनना सीखा।

राजनीतिक सफर का वर्णन

सोनिया ने अपनी आत्मकथा में 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद के राजनीतिक घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत हुई और वह प्रधानमंत्री बनने से इनकार कर दिया। इसके बाद सोनिया ने पार्टी का नेतृत्व किया और कांग्रेस अगले 10 साल तक सत्ता में रही।

पति की हत्या के बाद की स्थिति

राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया राजनीति से दूर रहीं। हालांकि, 1997 में कांग्रेस को एकजुट करने के लिए उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ली और 1998 में कांग्रेस अध्यक्ष बनीं। सोनिया का कार्यकाल पार्टी के इतिहास में सबसे लंबा रहा।

2004 में प्रधानमंत्री बनने का प्रस्ताव

2004 में कांग्रेस ने UPA का गठन किया और चुनाव के बाद कई दलों के समर्थन से UPA को 335 सांसदों का समर्थन मिला। सहयोगियों ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया, लेकिन उन्होंने यह पद ठुकरा दिया। इसके बाद मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। सोनिया का नाम हमेशा पर्दे के पीछे सरकार की बागडोर संभालने के लिए लिया जाता रहा है।

संजय बारू की किताब का जिक्र

डॉ. मनमोहन सिंह के मीडिया एडवाइजर संजय बारू ने ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ नाम से एक किताब लिखी थी, जिसमें सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री बनने से पीछे हटने के बाद का घटनाक्रम बताया गया है। यह किताब बाद में एक फिल्म में भी तब्दील हुई।

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