समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता 73 साल की उम्र में राम गोविंद चौधरी का निधन, पार्टी में शोक

The CSR Journal Magazine
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री राम गोविंद चौधरी का निधन शुक्रवार को हो गया। 73 वर्षीय चौधरी कई महीनों से हृदय और किडनी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनका उपचार लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) में चल रहा था, जहां रात करीब 9 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

मुख्यमंत्रियों और नेताओं का शोक संदेश

सपा के मीडिया प्रभारी सुशील पांडे ने कहा कि राम गोविंद चौधरी को लगभग दो सप्ताह पहले SGPGI में भर्ती कराया गया था। इससे पहले लखनऊ के मेदांता अस्पताल में उनकी हार्ट सर्जरी हुई थी। उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना समेत अन्य नेताओं ने शोक जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक अत्यंत दुखद घटना है और दिवंगत नेता के परिजनों के लिए साहस की कामना की।

राजनीतिक सफर की शुरुआत

राम गोविंद चौधरी का जन्म 9 जुलाई 1953 को बलिया जिले के सिकंदरपुर क्षेत्र में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त की और बाद में बलिया के सतीश चंद्र कॉलेज में दाखिला लिया। छात्राओं की समस्याओं पर सक्रियता के कारण उन्हें कॉलेज से निष्कासित किया गया। इसके बाद उन्होंने श्री मुरली मनोहर टाउन पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में दाखिला लिया और यहां से छात्र राजनीति में कदम रखा।

समाजवादी आंदोलन में सक्रियता

1972 में चौधरी टाउन कॉलेज छात्रसंघ के महामंत्री चुने गए। आपातकाल के दौरान उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष किया और बलिया में छात्र युवा वाहिनी के सह-संयोजक बने। इस संघर्ष के चलते उन्हें बाराबंकी और बलिया की जेलों में भी रहना पड़ा। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के साथ काम करते हुए चौधरी ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के करीबी सहयोगी बनने का मौका पाया।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का कार्यकाल

राम गोविंद चौधरी उत्तर प्रदेश विधानसभा में मार्च 2017 से मार्च 2022 तक नेता प्रतिपक्ष रहे। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकार में दो बार मंत्री पद का कार्यभार संभाला। अखिलेश यादव के कार्यकाल में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समाजवादी आंदोलन से जुड़े रहें चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन में कमजोर और वंचित वर्गों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

परिवार और अंतिम संस्कार

चौधरी के परिवार में उनका बेटा और अन्य परिजन शामिल हैं। उनका निधन न केवल समाजवादी पार्टी के लिए एक बड़ा नुकसान है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए भी एक बड़ी क्षति है। उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। उनके देहांत से प्रदेश ने एक अनुभवी राजनेता और समर्पित जनप्रतिनिधि खो दिया है।

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