‘जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और हम इसे वापस लेकर रहेंगे’: CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर भड़के राहुल गांधी

The CSR Journal Magazine
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन कर रहे युवाओं का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि तिरंगा लहराना किसी भी नागरिक का अधिकार है और इसे अपराध नहीं माना जाना चाहिए। राहुल ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार का युवाओं को सलाखों के पीछे डालना उसकी कायरता को दर्शाता है। उनका कहना था कि छात्र, युवा, पत्रकार और इंडिया गठबंधन भले ही अलग-अलग बैनरों तले एकत्रित हुए हों, लेकिन सबका मकसद केवल एक है- अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना।

संवैधानिक अधिकारों की मांग

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “अपने हक के लिए आवाज उठाना हर नागरिक का बुनियादी हक है। तिरंगा हाथ में लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना कानून का उल्लंघन नहीं हो सकता। सरकार युवाओं की आवाज दबाने के लिए ताकत का गलत इस्तेमाल कर रही है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी सीधे तौर पर लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है।” उन्होंने जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज लहराने को पूरी तरह जायज ठहराया।

गिरफ्तारी का प्रतीक

राहुल गांधी ने युवाओं और छात्रों की गिरफ्तारी को सरकार की कमजोरी और डर का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “छात्र, युवा और पत्रकार सभी मिलकर अपने बुनियादी हक मांग रहे हैं। ‘इंडिया’ गठबंधन भी युवाओं की इस लड़ाई में उनके साथ मजबूती से खड़ा है।” यह बयान तब आया जब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को जंतर-मंतर के पास विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया और उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

जंतर-मंतर की ऐतिहासिक पहचान

कांग्रेस नेता ने जंतर-मंतर की ऐतिहासिक पहचान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “यह जगह देश की आम जनता की है, सत्ता के हुक्मरानों की नहीं। जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और हम इसे वापस लेकर रहेंगे। लोकतंत्र में जनता की आवाज उठाने की जगह को बंद या सीमित नहीं किया जा सकता। सरकार चाहे जितनी बंदिशें लगा ले, अपने हक की लड़ाई रुकने वाली नहीं है।” राहुल गांधी के इस बयान ने जंतर-मंतर की महत्ता को एक बार फिर से उजागर किया।

गिरफ्तारी की पुष्टि

CJP के सदस्य अजिंक्य शिंदे ने 14 अक्टूबर को कहा कि कार्यकर्ता इस कार्रवाई से डरेंगे नहीं। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा, “आशु और सौरव को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। उनकी गलती क्या थी? जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना।” इस बयान ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं और युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एक मजबूत आवाज उठाई है।

सरकार की प्रतिक्रिया

हालांकि, सरकार ने इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन, इस घटना ने देश के युवाओं के बीच असंतोष को बढ़ा दिया है। कई युवा संगठनों ने इस गिरफ्तारी की निंदा की है और इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है। जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शन ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि युवा अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए तैयार हैं।

भविष्य की संभावनाएँ

इस घटना के बाद, यह देखना होगा कि क्या सरकार इस मुद्दे पर कोई सकारात्मक कदम उठाएगी या फिर युवाओं के अधिकारों को कुचलने की कोशिश जारी रखेगी। राहुल गांधी और अन्य नेताओं के समर्थन से, यह आंदोलन और भी मजबूत हो सकता है। जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शन ने यह संदेश दिया है कि युवा अपनी आवाज उठाने के लिए तैयार हैं और वे अपने अधिकारों की रक्षा करेंगे।

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