Donald Trump US Midterm Election Result: डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, सीनेट और हाउस दोनों में हारी रिपब्लिकन पार्टी; अमेरिका की राजनीति में बड़ा बदलाव

The CSR Journal Magazine
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिड टर्म चुनाव 2026 में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। उनकी रिपब्लिकन पार्टी को अमेरिकी संसद के दोनों सदनों सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत गंवाना पड़ा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने दोनों सदनों में जीत दर्ज कर ट्रंप की सत्ता के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। इन नतीजों को ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती दो वर्षों के कामकाज पर जनता के फैसले के रूप में देखा जा रहा है।

दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का कब्जा, अब ट्रंप के फैसलों पर रहेगी विपक्ष की नजर

अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मिड टर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर मतदान हुआ। इसके अलावा 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी चुनाव कराए गए। चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी का दोनों सदनों में मामूली बहुमत था। डेमोक्रेट्स ने इस बहुमत को चुनौती देते हुए कई ऐसे राज्यों में जीत हासिल की, जिन्हें रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता था।

सीनेट में डेमोक्रेट्स को बहुमत

सीनेट में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने 100 सदस्यीय सीनेट में 51 सीटें हासिल कर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया, जबकि रिपब्लिकन पार्टी 39 सीटों पर रह गई। डेमोक्रेट्स ने नॉर्थ कैरोलिना, साउथ कैरोलिना, ओहायो, कंसास और टेक्सास जैसे राज्यों में महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। नॉर्थ कैरोलिना में डेमोक्रेट रॉय कूपर ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइकल व्हाटली को हराया। वहीं जॉर्जिया में जॉन ओसॉफ ने अपनी सीनेट सीट बरकरार रखी। ओहायो में शेरॉड ब्राउन ने रिपब्लिकन उम्मीदवार को हराकर जीत हासिल की। कंसास में एडम हैमिल्टन की जीत भी डेमोक्रेट्स के लिए महत्वपूर्ण रही।

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी रिपब्लिकन को झटका

सीनेट के बाद प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी रिपब्लिकन पार्टी को बहुमत गंवाना पड़ा। यहां कुल 435 सीटें हैं और बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत होती है। डेमोक्रेट्स ने कई ऐसे चुनावी क्षेत्रों में जीत हासिल की, जहां पहले रिपब्लिकन उम्मीदवार मजबूत स्थिति में थे। इसके साथ ही ट्रंप की पार्टी का कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण समाप्त हो गया। इस जीत के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी को ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाने, सरकारी कामकाज की जांच कराने और प्रशासनिक अधिकारियों को संसदीय सुनवाई में बुलाने का अधिक अधिकार मिलेगा।

ईरान युद्ध, महंगाई और टैरिफ बने चुनाव के बड़े मुद्दे

इन चुनावों में ट्रंप प्रशासन की नीतियां प्रमुख मुद्दा रहीं। ईरान के साथ युद्ध, बढ़ती महंगाई, पेट्रोल और गैस की कीमतें, इमिग्रेशन नीति और आयात पर लगाए गए टैरिफ को लेकर मतदाताओं में असंतोष की चर्चा रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी मतदाताओं के लिए रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतें और देश की आर्थिक स्थिति महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दे रहे। इन मुद्दों पर रिपब्लिकन पार्टी को जनता के सवालों का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणामों से संकेत मिला कि बड़ी संख्या में मतदाताओं ने ट्रंप प्रशासन के कामकाज को लेकर अपनी नाराजगी वोट के जरिए जाहिर की।

भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी भी चुनाव हारे

इन चुनावों में भारतीय मूल के रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी को भी हार का सामना करना पड़ा। ओहायो के गवर्नर पद के चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन ने उन्हें शिकस्त दी। रामास्वामी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन हासिल था। ऐसे में उनकी हार को भी रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। दूसरी ओर, भारतीय मूल के डेमोक्रेटिक नेता रो खन्ना ने कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल कर प्रतिनिधि सभा में अपनी सीट बरकरार रखी।

बराक ओबामा ने डेमोक्रेट्स की जीत पर जताई खुशी

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी जनता ने स्पष्ट संदेश दिया है। लोग ऐसी राजनीति चाहते हैं जो समाज को बांटने के बजाय लोगों को एक साथ लाए और उनकी समस्याओं का ठोस समाधान दे। ओबामा ने चुनाव अधिकारियों और दोनों पार्टियों के स्वयंसेवकों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन का कार्यकाल अभी दो साल बाकी है, इसलिए डेमोक्रेट्स को अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए देश में सकारात्मक बदलाव के लिए काम करना चाहिए।

अब ट्रंप के लिए आसान नहीं होगा सरकार चलाना

मिडटर्म चुनाव में दोनों सदनों का नियंत्रण गंवाने के बाद ट्रंप प्रशासन के सामने नई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। अब डेमोक्रेट्स सरकारी खर्च, बजट, नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर ज्यादा प्रभाव डाल सकेंगे। ट्रंप को कई विधायी प्रस्तावों पर विपक्ष का समर्थन हासिल करना होगा। हालांकि, राष्ट्रपति के पास कानूनों को वीटो करने का अधिकार बना रहेगा। इसका मतलब है कि डेमोक्रेट्स की जीत के बावजूद ट्रंप के सभी फैसलों को रोकना आसान नहीं होगा। लेकिन कांग्रेस में बहुमत खोने से उनके लिए अपनी नीतियों को आगे बढ़ाना पहले की तुलना में मुश्किल हो सकता है।
कुल मिलाकर, 2026 के मिडटर्म चुनाव ने अमेरिका की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। अब सबकी नजरें इस बात पर रहेंगी कि डेमोक्रेट्स कांग्रेस में मिले बहुमत का इस्तेमाल किस तरह करते हैं और ट्रंप प्रशासन अगले दो वर्षों में विपक्ष के साथ किस तरह काम करता है। इन नतीजों का असर 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की राजनीति पर भी पड़ सकता है।

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