महिला आरक्षण बिल पर PM मोदी की संभावित टिप्पणियाँ
PM नरेंद्र मोदी आज रात एक बार फिर से राष्ट्र के नाम संबोधन करने जा रहे हैं। यह संबोधन 8:30 बजे होगा, जिसमें माना जा रहा है कि वह महिला आरक्षण बिल पर अपनी बात रख सकते हैं। विपक्ष के विरोध को लेकर उन्होंने जो समय लगाया है, उससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वह इस मुद्दे पर पूरी मजबूती से अपनी बात रखेंगे। पिछले दिनों महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को पास करने के प्रयास में हुए नाकामयाबियों के बाद उनका यह संबोधन और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का मामला गर्म
महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक पिछले शुक्रवार को लोकसभा में पारित नहीं हो सका। बीजेपी ने इसे ‘काला दिन’ करार दिया और विपक्ष की पार्टियों सहित कांग्रेस पर महिलाओं के समर्थन में विश्वासघात का आरोप लगाया। इसके विपरीत, कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों का कहना था कि इस कानून को तात्कालिक रूप से लागू किया जाना चाहिए और सरकार इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है।
बीजेपी का आक्रामक रुख
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि उन्हें महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह विधेयक महिला सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, और इसका असफल होना कांग्रेस के लिए एक बड़ा दाग बन गया है। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्ष के कदमों को और भी कड़ी आलोचना की।
विपक्षी दलों का पलटवार
आपसी तकरार के बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने आरोप लगाया कि यह विधेयक संघीय ढांचे को बदलने की एक साजिश थी। उनका कहना था कि यह गिरावट संविधान और विपक्ष के संघर्ष की एक जीत थी। विपक्ष ने बार-बार कहा है कि इस विधेयक से महिलाओं को अवसर देने का वादा किया गया था, और उसकी असफलता से जनता को काफी नुकसान हुआ है।
महिला सशक्तिकरण का क्षति
कई विपक्षी नेताओं ने बताया कि यह विधेयक न केवल महिलाओं के सशक्तिकरण में सहायक था, बल्कि भारत के राजनीतिक परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण था। समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव ने विधायी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बिल पास होने का कोई मौका नहीं था, तो इसे लाने की क्या जरूरत थी। यह राजनीति की चालों का स्पष्ट संकेत है।
कांग्रेस का समर्थन
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसकी परिसीमन से जोड़ने पर उन्हें असहमति है। उन्होंने कहा कि अगर इस विधेयक को सही तरीके से पेश किया जाता, तो पारित हो जाता। इस मुद्दे पर अब पीएम मोदी का संबोधन देश की राजनीतिक स्थिति को और सुगठित कर सकता है।
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