मुंबई-गोवा हाईवे की देरी पर नितिन गडकरी का गुस्सा, बोले-शर्मिंदा हूं! उद्घाटन समारोह से रहेंगे दूर
मुंबई-गोवा राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण में लगातार हो रही देरी से केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी बेहद नाराज हैं। उन्होंने साफ कहा है कि परियोजना के पूरा होने के बाद होने वाले उद्घाटन समारोह में वह शामिल नहीं होंगे। गडकरी ने कहा कि जिस परियोजना में इतना लंबा समय लग गया, उसके उद्घाटन में जाना उन्हें शर्मिंदगी महसूस कराता है। उन्होंने अक्टूबर में खुद मुंबई से सड़क मार्ग से गोवा जाने और पूरे हाईवे की स्थिति का जायजा लेने का फैसला किया है। साथ ही उन्होंने लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों को काली सूची में डालने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।
वर्षों से अधूरा पड़ा है मुंबई-गोवा हाईवे
मुंबई और गोवा को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-66 महाराष्ट्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण सड़क मार्ग है। यह हाईवे मुंबई से शुरू होकर रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग होते हुए गोवा तक जाता है। कोकण क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि मुंबई, कोकण और गोवा के बीच आर्थिक, सामाजिक और पर्यटन संपर्क की प्रमुख कड़ी है। मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण की योजना लंबे समय से चल रही है। परियोजना का उद्देश्य पुराने दो लेन वाले मार्ग को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक चौड़े मार्ग में बदलना था। लेकिन जमीन अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरियों, अलग-अलग निर्माण पैकेजों में ठेकेदारों की समस्याओं और काम की धीमी गति के कारण परियोजना लगातार समय से पीछे होती चली गई। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, कई हिस्सों में काम पूरा होने के बावजूद कुछ महत्वपूर्ण काम अभी भी बाकी हैं और परियोजना की कुल प्रगति लगभग 93-94 प्रतिशत बताई गई है।
2016 तक पूरा होना था काम, लेकिन अब तक इंतजार
गडकरी ने जिस देरी पर नाराजगी जताई है, उसका सबसे बड़ा कारण यही है कि यह परियोजना तय समयसीमा से कई साल पीछे चल रही है। शुरुआती लक्ष्य के मुताबिक मुंबई-गोवा हाईवे का चौड़ीकरण वर्ष 2016 तक पूरा किया जाना था, लेकिन निर्धारित समयसीमा बीतने के बाद भी अलग-अलग हिस्सों में काम चलता रहा। इस वजह से यात्रियों को वर्षों तक अधूरे मार्ग, संकरे हिस्सों, डायवर्जन, गड्ढों और यातायात जाम जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ा। परियोजना में महाराष्ट्र के हिस्से का बड़ा भाग शामिल है। विभिन्न रिपोर्टों में चौड़ीकरण की लंबाई अलग-अलग तरीके से बताई गई है, क्योंकि पूरे मार्ग और विभिन्न निर्माण पैकेजों की लंबाई अलग है। केंद्रीय मंत्री के हालिया बयान के मुताबिक अधिकारियों ने उन्हें बताया है कि मौजूदा समय में परियोजना लगभग 93-94 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों, पुलों और अन्य निर्माण कार्यों को लेकर अभी भी काम बाकी है।
‘मुझे शर्म आती है, इसलिए उद्घाटन में नहीं आऊंगा’
गोवा के पोरवोरिम में आयोजित कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने मुंबई-गोवा हाईवे की देरी पर खुलकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि हाईवे के काम में इतनी ज्यादा देरी हो चुकी है कि उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है। इसी कारण उन्होंने फैसला किया है कि जब चौड़ीकरण का काम पूरा होगा और उसका औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा, तब वह उस समारोह में शामिल नहीं होंगे।गडकरी का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के स्तर पर वह खुद इस परियोजना की प्रगति को लेकर लगातार निगरानी करते रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि केवल परियोजना को किसी तरह पूरा कर देना पर्याप्त नहीं है। सड़क की गुणवत्ता, यात्रियों की सुविधा और निर्माण की समयसीमा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अब विभाग का ध्यान सिर्फ उद्घाटन की तारीख तय करने पर नहीं, बल्कि निर्माण में हुई लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करने पर रहेगा।
ठेकेदारों और अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
गडकरी ने निर्माण कार्य में लापरवाही और खराब गुणवत्ता को लेकर ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि वह बड़ी संख्या में खराब प्रदर्शन करने वाले ठेकेदारों को काली सूची में डालने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि खराब काम करने वालों को केवल इसलिए नहीं छोड़ा जाएगा कि परियोजना सरकारी है या पहले से काफी पैसा खर्च हो चुका है। उनका संदेश यह है कि सरकारी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में समयसीमा और गुणवत्ता से समझौता करने वाले ठेकेदारों तथा अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
अक्टूबर में खुद मुंबई से गोवा जाएंगे गडकरी
गडकरी ने यह भी घोषणा की कि वह अक्टूबर में खुद सड़क मार्ग से मुंबई से गोवा की यात्रा करेंगे। उनका उद्देश्य केवल यात्रा करना नहीं, बल्कि हाईवे की वास्तविक स्थिति को अपनी आंखों से देखना और यह पता लगाना है कि आम यात्रियों को सफर के दौरान किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वह मुंबई हवाई अड्डे पर उतरने के बाद सड़क मार्ग से गोवा जाएंगे और रास्ते में हाईवे के काम, यात्रा की सुविधा तथा सड़क की गुणवत्ता का निरीक्षण करेंगे। इससे यह संकेत मिलता है कि मंत्रालय अब कागजों पर बताई जा रही परियोजना प्रगति के बजाय वास्तविक जमीनी स्थिति को प्राथमिकता देना चाहता है।
कुछ हिस्सों में काम के बाद भी सामने आईं समस्याएं
मुंबई-गोवा हाईवे को लेकर विवाद केवल देरी तक सीमित नहीं है। हालिया रिपोर्टों में चौड़ीकरण के कुछ हिस्सों में बारिश के बाद गड्ढे, सड़क की सतह को नुकसान, जलभराव और यातायात जाम जैसी समस्याओं का भी उल्लेख किया गया है। कुछ जगहों पर निर्माण कार्य के कारण यात्रियों को डायवर्जन से गुजरना पड़ता है। रिपोर्टों के अनुसार, खारपाड़ा टोल प्लाजा पर मई में टोल वसूली भी शुरू हो चुकी है, जबकि हाईवे से जुड़े कुछ निर्माण कार्य अभी जारी हैं। इससे यात्रियों के बीच यह सवाल भी उठता रहा है कि जब पूरी परियोजना अभी समाप्त नहीं हुई है तो यातायात सुविधाएं और सड़क की गुणवत्ता पूरी तरह सुनिश्चित क्यों नहीं हो पाई।
कोकण के लोगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह हाईवे?
मुंबई-गोवा हाईवे का महत्व केवल मुंबई और गोवा के बीच यात्रा को तेज करने तक सीमित नहीं है। यह पूरा मार्ग रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जैसे कोकण के जिलों को मुंबई महानगर क्षेत्र और गोवा से जोड़ता है। बेहतर सड़क संपर्क से पर्यटन, कृषि, मत्स्य कारोबार, स्थानीय उद्योग, छोटे व्यापार और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। खास तौर पर गणेशोत्सव के दौरान मुंबई और उपनगरों से बड़ी संख्या में लोग कोकण के अपने गांवों की ओर जाते हैं। उस समय मुंबई-गोवा मार्ग पर वाहनों का दबाव अचानक कई गुना बढ़ जाता है। इसी वजह से इस वर्ष भी गणेशोत्सव के दौरान भारी वाहनों के आवागमन पर विशेष प्रतिबंध लगाए गए हैं, ताकि यात्रियों को जाम से राहत मिल सके।
गणेशोत्सव के दौरान फिर बढ़ता है दबाव
मुंबई-गोवा हाईवे पर गणेशोत्सव के समय यातायात प्रबंधन बड़ी चुनौती बन जाता है। महाराष्ट्र सरकार ने इस साल 16 टन या उससे अधिक वजन वाले भारी वाहनों की आवाजाही पर अलग-अलग चरणों में प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह प्रतिबंध मूर्ति आगमन, गणपति विसर्जन और अनंत चतुर्दशी के दौरान लागू किए जा रहे हैं। हालांकि दूध, ईंधन, दवाइयां, खाद्यान्न, सब्जियां, ऑक्सीजन जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले वाहनों तथा एंबुलेंस, पुलिस और अग्निशमन जैसी आवश्यक सेवाओं को छूट दी गई है।
पोरवोरिम एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्घाटन
गडकरी ने मुंबई-गोवा हाईवे की देरी पर नाराजगी उस समय जाहिर की, जब वह गोवा में पोरवोरिम के छह लेन वाले एलिवेटेड कॉरिडोर के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे थे। यह करीब 5.15 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड मार्ग उत्तर गोवा में भारी यातायात वाले हिस्से को बायपास करने में मदद करेगा। इस कॉरिडोर का उद्देश्य पोरवोरिम और पणजी के आसपास यातायात दबाव कम करना है। परियोजना के पूरा होने से मुंबई-गोवा मार्ग पर गोवा में प्रवेश करने वाले वाहनों के लिए भी यात्रा अधिक सुगम होने की उम्मीद है।
गडकरी का संदेश साफ- सिर्फ सड़क बनाना काफी नहीं
नितिन गडकरी के ताजा बयान से यह साफ है कि अब सरकार बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में केवल निर्माण पूरा होने को सफलता का पैमाना नहीं मानना चाहती। सड़क कब पूरी हुई, किस गुणवत्ता की बनी, कितने समय तक टिकती है और यात्रियों को वास्तविक सुविधा मिलती है या नहीं, इन सभी पहलुओं पर ध्यान देने की जरूरत है। मुंबई-गोवा हाईवे के मामले में भी यही सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। अगर परियोजना का 93-94 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, तो शेष हिस्से को जल्द पूरा करने के साथ-साथ पहले से बने हिस्सों की गुणवत्ता और सुरक्षा की भी जांच जरूरी होगी। अक्टूबर में गडकरी की प्रस्तावित सड़क यात्रा इस लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।
अब नजर अंतिम चरण के काम पर
मुंबई-गोवा हाईवे को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे यात्रियों और कोकणवासियों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शेष काम कब पूरा होगा और कब उन्हें पूरी तरह चौड़े, सुरक्षित और सुविधाजनक मार्ग का लाभ मिलेगा। गडकरी की नाराजगी के बाद ठेकेदारों और अधिकारियों पर कार्रवाई तथा लंबित काम को गति देने की उम्मीद बढ़ी है। केंद्रीय मंत्री का उद्घाटन समारोह से दूरी बनाने का फैसला भी राजनीतिक या औपचारिक संदेश से अधिक प्रशासनिक चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। उनका कहना है कि वर्षों की देरी और खराब क्रियान्वयन को सामान्य नहीं माना जा सकता। अब अक्टूबर में उनके प्रस्तावित निरीक्षण और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।
समयसीमा, निर्माण गुणवत्ता और जवाबदेही की चुनौती
कुल मिलाकर, मुंबई-गोवा हाईवे की कहानी देश की बड़ी सड़क परियोजनाओं में समयसीमा, निर्माण गुणवत्ता और जवाबदेही की चुनौती को सामने लाती है। जिस हाईवे से मुंबई, रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग और गोवा के बीच संपर्क और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है, उसके लंबे समय तक अधूरे रहने पर खुद केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री का ‘शर्मिंदगी’ जताना मामले की गंभीरता को दर्शाता है। अब परियोजना के अंतिम चरण के साथ यह भी देखना होगा कि जिम्मेदार ठेकेदारों और अधिकारियों पर वास्तव में कितनी कार्रवाई होती है और आम यात्रियों को कब इस लंबे इंतजार का स्थायी समाधान मिलता है।
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