नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के कारण हालात गंभीर बने हुए हैं। पिछले 13 दिनों में, 5,500 से अधिक लोग लापता हो चुके हैं। नेपाल के बचाव दल ने 900 हाइड्रोपावर कर्मचारियों की खोज पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया है, जिनमें से लगभग 121 के सुरंगों में फंसे होने का अनुमान है।
बचाव कार्यों में जुटे दल
अधिकारियों का कहना है कि इन पनबिजली परियोजनाओं में लापता लोगों में से सभी सुरंगों में नहीं हो सकते। कुछ लोग पावर प्लांट के अन्य हिस्सों में कार्यरत हो सकते हैं। लेकिन सुरंगों में फंसे कुछ लोगों के जीवित रहने की संभावना अभी भी बनी हुई है।
सरकारी प्रयास और उम्मीदें
बचाव कार्यों में शामिल सांसद श्री राम न्यूपाने ने बताया कि रसुवा जिले की चिलिमे पनबिजली परियोजना के लापता छह कर्मचारियों में से चार के जीवित होने की उम्मीद है। इसके लिए आवश्यक खास उपकरण भी जुटाए जा चुके हैं।
सुरंगों में क्या स्थिति है?
बचाव दलों का मानना है कि सुरंगों में हवा की जेब, रहने की जगह और कमरे की संभावनाएं मौजूद हैं। जबकि, यह स्थिति स्पष्ट नहीं है कि सुरंगों में कितने लोग फंसे हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति क्या है।
चिंताजनक, लेकिन सफल बचाव
चार लोगों के सफल बचाव से राहतकर्मियों में एक नई उमंग आई है। हाल ही में एक चीनी नागरिक और दो नेपाली पनबिजली कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला गया है। इन बचाव अभियानों ने प्रभावित परिवारों में थोड़ी उम्मीद जगाई है।
आपदा का बड़ा खतरा
26 अगस्त को नेपाल और चीन की सीमा पर बाढ़ और भूस्खलन की शुरुआत हुई। ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद मिट्टी और चट्टानों का ढेर नदी में गिर गया। इस परिदृश्य ने कई गांवों को तबाह कर दिया और कई जगहों पर पहुंचना मुश्किल बना दिया है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुंरत मदद मांगी है। इसमें उच्च क्षमता वाले ड्रोन और डीएनए जांच किट जैसी आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। नेपाल के कुछ लापता लोग भारतीय या भारतीय मूल के नागरिक हैं, जो तिब्बत की यात्रा पर गए थे।
चीन की भूमिका और जानकारी
चीन ने हाल ही में बताया कि तिब्बत में लापता लोगों की खोज के दौरान 12 और शव मिले हैं। विदेशी पर्यटकों के परिवार अब चीन से जानकारी देने की मांग कर रहे हैं।
दुखद दिन और राष्ट्रीय शोक
सोमवार को नेपाल में शोक का 13वां दिन मनाया गया, जो हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार होता है। इस मौके पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया गया, लेकिन सरकार ने कोई बड़ा कार्यक्रम आयोजित नहीं किया।
बचाव कार्रवाई की चल रही स्थिति
नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर के फनिंद्र पौडेल ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव अभियान जारी है। राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने भी प्रभावित इलाकों का दौरा किया। बाढ़ के दौरान 923 कैदियों की जान बचाई गई है, जिससे एक और राहत की खबर आई है।
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