मुंबई में पटाखों पर पुलिस का बड़ा आदेश, 4 दिसंबर तक सार्वजनिक सड़कों पर आतिशबाजी और तेज रोशनी पर रोक
मुंबई में आगामी त्योहारों के दौरान वायु और ध्वनि प्रदूषण के साथ-साथ सड़क सुरक्षा को लेकर पुलिस ने सख्त कदम उठाया है। मुंबई पुलिस ने बृहन्मुंबई पुलिस आयुक्तालय की सीमा में सार्वजनिक सड़कों, गलियों, रास्तों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे, आतिशबाजी और रॉकेट फोड़ने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर तेज क्षमता वाली लेजर लाइट, हाई-इंटेंसिटी ल्यूमेन लाइट और सर्चलाइट जैसी तेज रोशनी वाली किरणों के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। यह आदेश 6 अक्टूबर 2026 को रात 12.01 बजे से लागू हो गया है और 4 दिसंबर 2026 की मध्यरात्रि तक प्रभावी रहेगा, जब तक कि इसे इससे पहले वापस नहीं लिया जाता।
त्योहारों के मौसम से पहले पुलिस की सख्ती
मुंबई में अक्टूबर से दिसंबर के बीच नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और अन्य धार्मिक-सामाजिक आयोजनों के कारण सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ और उत्सव से जुड़ी गतिविधियां बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में सड़कों पर पटाखे फोड़ने, तेज आवाज वाले पटाखों और शक्तिशाली रोशनी के इस्तेमाल से यातायात, पैदल चलने वालों और आसपास रहने वाले लोगों के लिए परेशानी और सुरक्षा संबंधी खतरा पैदा हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने यह निवारक आदेश जारी किया है। पुलिस का आदेश विशेष रूप से सार्वजनिक सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर लागू है। यानी सड़क, गली या आम लोगों के आवागमन वाले स्थान को पटाखे फोड़ने या आतिशबाजी के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। आदेश का उद्देश्य त्योहारों की खुशी पर रोक लगाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर ऐसी गतिविधियों को नियंत्रित करना है जिनसे दूसरे लोगों की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और पर्यावरण प्रभावित हो सकता है।
आदेश किस कानूनी प्रावधान के तहत जारी हुआ?
मुंबई पुलिस का यह निवारक आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत जारी किया गया है। इसके साथ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 10(2) का भी उल्लेख किया गया है। आदेश मुंबई के पुलिस उपायुक्त (ऑपरेशंस) एवं कार्यकारी दंडाधिकारी अकबर पठान की ओर से जारी किया गया है। धारा 163 का इस्तेमाल ऐसे मामलों में निवारक प्रतिबंध लगाने के लिए किया जाता है, जहां सार्वजनिक शांति, सुरक्षा या लोगों के जीवन और संपत्ति को संभावित खतरा हो। मौजूदा आदेश भी इसी तरह की रोकथाम के उद्देश्य से लागू किया गया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद कार्रवाई
मुंबई पुलिस का यह कदम 22 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद आया है। अदालत ने त्योहारों के दौरान बढ़ने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण तथा सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े खतरों पर गंभीर चिंता जताई थी। यह मामला अदालत द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका से संबंधित था। हाईकोर्ट ने सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर पूर्ण रोक लगाने और आतिशबाजी से होने वाले वायु तथा ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने यह भी कहा था कि त्योहारों के नाम पर ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने पटाखों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण के सामूहिक प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई थी। साथ ही सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने से पैदल यात्रियों और वाहनों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ने की बात सामने रखी गई थी।
तेज लेजर और सर्चलाइट पर भी रोक क्यों?
पुलिस का आदेश सिर्फ पटाखों तक सीमित नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर लेजर लाइट, हाई-इंटेंसिटी ल्यूमेन लाइट और सर्चलाइट बीम के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है। खासकर सड़कों और यातायात वाले इलाकों में अत्यधिक तेज रोशनी वाहन चालकों की आंखों पर सीधा असर डाल सकती है, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है। त्योहारों और बड़े आयोजनों के दौरान कई बार सजावट, जुलूस, कार्यक्रम या मनोरंजन के लिए शक्तिशाली लेजर और सर्चलाइट का इस्तेमाल किया जाता है। यदि ऐसी रोशनी सड़क पर चलने वाले वाहन या लोगों की आंखों पर पड़ती है, तो कुछ क्षणों के लिए देखने में परेशानी हो सकती है। पुलिस ने इसी तरह के संभावित सार्वजनिक खतरे को देखते हुए इन पर भी रोक लगाई है।
उल्लंघन करने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई
मुंबई पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। मामले की प्रकृति के अनुसार ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, भारतीय न्याय संहिता, 2023 और विस्फोटक अधिनियम, 1884सहित अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि सार्वजनिक सड़क पर प्रतिबंधित तरीके से पटाखे चलाना या तेज रोशनी का इस्तेमाल करना केवल पुलिस की चेतावनी तक सीमित मामला नहीं रहेगा। परिस्थितियों और उल्लंघन की प्रकृति के आधार पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
आदेश को सार्वजनिक करने के भी निर्देश
पुलिस ने यह भी निर्देश दिया है कि निवारक आदेश की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाई जाए। इसके लिए सार्वजनिक स्थानों, सरकारी कार्यालयों और अदालतों में आदेश को प्रदर्शित करने के साथ-साथ लाउडस्पीकर, मेगाफोन और उपलब्ध मीडिया माध्यमों से इसकी जानकारी देने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को पहले से जानकारी रहे कि सार्वजनिक स्थानों पर किन गतिविधियों पर रोक है और अनजाने में भी कोई व्यक्ति प्रतिबंध का उल्लंघन न करे।
मुंबईकरों के लिए क्या समझना जरूरी है?
इस आदेश की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रतिबंध का केंद्र सार्वजनिक सड़कें, रास्ते और सार्वजनिक स्थान हैं। इसलिए त्योहारों के दौरान लोगों को यह ध्यान रखना होगा कि सार्वजनिक आवागमन वाले स्थानों पर पटाखे फोड़कर या आतिशबाजी करके उत्सव मनाना प्रतिबंधित है। इसी तरह सार्वजनिक स्थानों पर अत्यधिक तेज लेजर, ल्यूमेन लाइट या सर्चलाइट बीम का इस्तेमाल भी नहीं किया जा सकता। वहीं, पटाखों से जुड़े अन्य नियम और ध्वनि सीमा संबंधी कानूनी प्रावधान अलग से लागू रहते हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि निजी स्थानों पर पटाखे चलाने की स्थिति में भी निर्धारित ध्वनि मानकों और अन्य लागू नियमों का पालन जरूरी है।
4 दिसंबर तक लागू रहेगा आदेश
मुंबई पुलिस का मौजूदा निवारक आदेश 6 अक्टूबर की रात 12.01 बजे से 4 दिसंबर 2026 की मध्यरात्रि तक लागू रहेगा। हालांकि पुलिस के आदेश के अनुसार इसे आवश्यकता पड़ने पर निर्धारित अवधि से पहले वापस लिया जा सकता है। इस आदेश के जरिए मुंबई पुलिस ने त्योहारों के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, वायु गुणवत्ता और ध्वनि प्रदूषण को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। ऐसे में दिवाली और अन्य आगामी त्योहारों के दौरान मुंबईकरों को सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे और आतिशबाजी करने से बचना होगा। तेज लेजर और सर्चलाइट के इस्तेमाल पर भी विशेष सावधानी बरतनी होगी। पुलिस और प्रशासन की ओर से यह कदम त्योहारों के दौरान बढ़ने वाले प्रदूषण तथा सड़क सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए उठाया गया है।
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