मुंबई में मेफेड्रोन तस्करी का मामला: दंपति समेत 12 लोगों के खिलाफ ED की शिकायत 

The CSR Journal Magazine

मुंबई में नशे के कारोबार का बड़ा खुलासा, डोंगरी के दंपति पर ईडी की कार्रवाई, हर महीने 80 किलो मेफेड्रोन की आपूर्ति का आरोप

मुंबई के डोंगरी इलाके से जुड़े कथित मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क की जांच ने एक बार फिर महानगर में नशे के अवैध कारोबार और उसके वित्तीय लेन-देन पर सवाल खड़े किए हैं। एक दंपति के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से शिकायत दर्ज किए जाने की खबर सामने आई है। आरोप है कि इस नेटवर्क के माध्यम से हर महीने लगभग 80 किलोग्राम मादक पदार्थ की आपूर्ति की जाती थी। मामले में मेफेड्रोन का नाम सामने आने से जांच की गंभीरता और बढ़ गई है। हालांकि, आरोपों की वास्तविक प्रकृति, कथित आपूर्ति की अवधि, जब्त किए गए पदार्थ की मात्रा, दंपति की पहचान और शिकायत में दर्ज विशिष्ट धाराओं की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से किया जाना बाकी है।

दंपति के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत, 10 अन्य लोगों के नाम भी शामिल

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ED ने डोंगरी निवासी फैसल शेख और उनकी पत्नी अल्फिया शेख के साथ 10 अन्य लोगों के खिलाफ कथित मादक पदार्थ कारोबार से अर्जित धन को वैध संपत्ति में बदलने के मामले में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। यह मामला नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की ओर से पहले दर्ज किए गए मादक पदार्थ तस्करी के मामले से जुड़ा बताया गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईडी की जांच का मुख्य उद्देश्य केवल कथित नशीले पदार्थों की आपूर्ति का पता लगाना नहीं, बल्कि इस कारोबार से अर्जित धन के स्रोत, बैंक खातों में जमा रकम, संपत्तियों की खरीद और धन के लेन-देन की पूरी कड़ी को सामने लाना भी है। एजेंसी को संदेह है कि अवैध कारोबार से हासिल रकम का इस्तेमाल मुंबई में अचल संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया। अदालत की ओर से शिकायत पर संज्ञान लिए जाने की स्थिति के बारे में उपलब्ध शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया था कि उस समय अदालत ने अभी संज्ञान नहीं लिया था। इसलिए मामले को आरोपों और जांच के स्तर पर ही समझना जरूरी है।

हर महीने 80 किलो मेफेड्रोन की आपूर्ति का क्या है आरोप?

इस मामले का सबसे गंभीर पहलू कथित तौर पर हर महीने लगभग 80 किलोग्राम मेफेड्रोन की खरीद और आपूर्ति है। रिपोर्टों के अनुसार, जांच एजेंसी का आरोप है कि दंपति वर्ष 2022 से कथित रूप से सलीम डोला से यह मादक पदार्थ प्राप्त कर रहे थे। रिपोर्ट में सलीम डोला को कथित मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क से जुड़ा व्यक्ति बताया गया है। मेफेड्रोन की खरीद लगभग सात लाख रुपये प्रति किलोग्राम की दर से और आगे बिक्री लगभग आठ लाख रुपये प्रति किलोग्राम की दर से किए जाने का आरोप है। इन आंकड़ों को जांच एजेंसी से जुड़े आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए; इन्हें अदालत में साबित तथ्य नहीं माना जा सकता। यदि जांच में बताई गई मात्रा और कीमतों को केवल आरोपों के आधार पर गणितीय रूप से देखें, तो 80 किलोग्राम की मासिक खरीद का कथित मूल्य लगभग 5.60 करोड़ रुपये और इतनी ही मात्रा की बिक्री का मूल्य लगभग 6.40 करोड़ रुपये बैठता है। इस हिसाब से दोनों मूल्यों के बीच लगभग 80 लाख रुपये का मासिक अंतर बनता है। यदि इतनी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ की आपूर्ति का आरोप साक्ष्यों से पुष्ट होता है, तो यह जांच मुंबई में नशे के अवैध कारोबार के वितरण तंत्र और उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क की गंभीरता को उजागर कर सकती है।

एनसीबी की कार्रवाई में क्या-क्या बरामद हुआ?

इस मामले की शुरुआती जांच एनसीबी की कार्रवाई से जुड़ी बताई गई है। जांच के दौरान डोंगरी स्थित अंसारी हाइट्स में दंपति के आवास से लगभग 15 किलोग्राम मेफेड्रोन और करीब 1.10 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। रिपोर्ट में अल्फिया शेख के नाम से जुड़े बैंक लॉकरों की तलाशी का भी उल्लेख है। एजेंसी की कार्रवाई में इन लॉकरों से लगभग 29.93 लाख रुपये, करीब 845 ग्राम सोने के आभूषण और चांदी मिलने की बात कही गई है। इन बरामदगियों का महत्व इसलिए है क्योंकि मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियां नशीले पदार्थों के साथ-साथ नकदी, आभूषण, बैंक खातों और अन्य संपत्तियों की भी जांच करती हैं।

बैंक खातों में नकदी जमा होने पर ईडी को संदेह

मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में वित्तीय लेन-देन एक महत्वपूर्ण कड़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, ईडी ने दंपति के बैंक खातों और उनसे जुड़े खातों में बड़ी रकम नकद जमा होने की पड़ताल की। एजेंसी ने कथित तौर पर ऐसे लेन-देन की पहचान की, जिनके लिए आय का वैध स्रोत स्पष्ट नहीं हो पाया था। ईडी की जांच का महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इतनी रकम कहां से आई, किसके खातों में जमा हुई और बाद में उसका इस्तेमाल कहां किया गया। यदि किसी खाते में जमा रकम और खाताधारक की घोषित आय के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है, तो जांच एजेंसी उस अंतर की व्याख्या और उसके समर्थन में दस्तावेज मांग सकती है। इसी तरह, यदि कथित अवैध कारोबार की कमाई को रिश्तेदारों के खातों, व्यावसायिक संस्थाओं या अचल संपत्तियों के माध्यम से घुमाया गया हो, तो जांच का दायरा उन लेन-देन तक भी बढ़ सकता है।

सलीम डोला और कथित अंतरराष्ट्रीय संपर्क की जांच

इस मामले में सलीम डोला का नाम भी सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, कथित आपूर्ति श्रृंखला में उसकी भूमिका की जांच की जा रही है और संबंधित अवधि में उसके दुबई से गतिविधियां संचालित करने का आरोप है। किसी कथित तस्करी नेटवर्क में विदेश से संचालन होने का पहलू सामने आने पर जांच एजेंसियां आपूर्ति के स्रोत, संपर्कों, धन के प्रवाह और विभिन्न व्यक्तियों के बीच संबंधों की पड़ताल कर सकती हैं। ऐसे मामलों में जांच की दिशा इस बात पर निर्भर करती है कि एजेंसियों के पास क्या दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड, बयान और अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं। यदि विदेश में मौजूद व्यक्तियों या खातों से जुड़ी जानकारी की जरूरत होती है, तो संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से भी जांच आगे बढ़ सकती है।

मेफेड्रोन क्या है और यह इतना गंभीर मामला क्यों है?

मेफेड्रोन, जिसे आम तौर पर एमडी भी कहा जाता है, एक कृत्रिम मनःप्रभावी उत्तेजक पदार्थ है। भारत में यह स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 यानी NDPS अधिनियम के तहत प्रतिबंधित पदार्थों में शामिल है। यह पदार्थ केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। इसके सेवन से बेचैनी, हृदय गति बढ़ने, रक्तचाप में बदलाव, नींद में गड़बड़ी और मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने जैसे जोखिम हो सकते हैं। अधिक मात्रा या गंभीर विषाक्तता की स्थिति में स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। मेफेड्रोन के अवैध निर्माण, भंडारण, परिवहन, खरीद-बिक्री और तस्करी से जुड़े अपराधों पर एनडीपीएस अधिनियम के तहत कार्रवाई हो सकती है। दंड की प्रकृति अपराध के प्रकार, पदार्थ की मात्रा, संबंधित कानूनी प्रावधानों और मामले में साबित तथ्यों पर निर्भर करती है। इस मामले में कथित तौर पर हर महीने 80 किलोग्राम आपूर्ति की बात इसलिए गंभीर है क्योंकि यह व्यक्तिगत सेवन से संबंधित छोटे मामले के बजाय बड़े पैमाने पर वितरण के आरोप की ओर संकेत करती है। फिर भी, कथित मात्रा और कारोबार की अवधि को अदालत में साक्ष्यों के आधार पर साबित करना होगा।

आगे की कार्यवाई अदालती स्तर पर

ईडी की अभियोजन शिकायत के बाद मामले में आगे की प्रक्रिया अदालत के स्तर पर निर्धारित होगी। अदालत शिकायत और उपलब्ध सामग्री पर विचार कर सकती है तथा कानून के अनुसार आगे की कार्यवाही तय कर सकती है। आरोपियों को अपना पक्ष रखने और आरोपों को चुनौती देने का अधिकार रहेगा। जांच में कथित आपूर्ति नेटवर्क के अन्य सदस्यों, बैंक खातों, संपत्ति खरीद और नकदी के स्रोत से जुड़े सवालों की पड़ताल महत्वपूर्ण हो सकती है। साथ ही, कुर्क की गई संपत्तियों के संबंध में भी संबंधित कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। फिलहाल इस प्रकरण से जुड़ी प्रमुख बातें हैं—हर महीने 80 किलोग्राम मेफेड्रोन की कथित आपूर्ति, दंपति और 10 अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत, एनसीबी की कार्रवाई में बताई गई बरामदगी और लगभग 5.88 करोड़ रुपये की संपत्तियों की कुर्की। इन सभी पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष जांच के साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकेगा।

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