मुंबई के गरीब नगर की बची 94 झोपड़ियां हटाईं, बांद्रा टर्मिनस के विस्तार का रास्ता साफ

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मुंबई के गरीब नगर में 94 झोपड़ियों पर चला रेलवे का बुलडोजर, पुनर्वास के बाद हटाए गए मकान; बांद्रा टर्मिनस के विस्तार का रास्ता साफ

बांद्रा (पूर्व) स्थित गरीब नगर में पश्चिम रेलवे ने बची हुई 94 झोपड़ियों को हटाने की कार्रवाई पूरी कर ली है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को की गई इस कार्रवाई के साथ ही रेलवे की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने की प्रक्रिया का एक और महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ। रेलवे के अनुसार, इन झोपड़ियों को पहले इसलिए नहीं हटाया गया था, क्योंकि वहां रहने वाले पात्र परियोजना प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जानी थी। अब मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने सभी 94 पात्र परिवारों को स्थायी वैकल्पिक आवास आवंटित कर दिया है और उन्हें घरों का कब्जा भी सौंप दिया गया है। यह कार्रवाई केवल झोपड़ियां हटाने तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध बांद्रा टर्मिनस की क्षमता बढ़ाने, अतिरिक्त प्लेटफॉर्म विकसित करने, ट्रेनों के रखरखाव की सुविधाओं का विस्तार करने और यात्रियों की आवाजाही को बेहतर बनाने की रेलवे की योजना से है। मुंबई में लंबी दूरी की ट्रेनों की बढ़ती जरूरतों के बीच बांद्रा टर्मिनस के आसपास रेलवे ढांचे का विस्तार महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मई में भी हुई थी बड़ी कार्रवाई, अब अंतिम 94 ढांचे हटाए गए

गरीब नगर में अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई है। पश्चिम रेलवे ने मई 2026 में भी इस इलाके में बड़े स्तर पर अभियान चलाया था। उस दौरान रेलवे की जमीन पर बने सैकड़ों ढांचों को हटाया गया था। हालांकि, पुनर्वास के पात्र परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए 94 ढांचों को उस समय नहीं हटाया गया था। इन्हें तब तक सुरक्षित रखा गया, जब तक प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास देने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। अब MMRDA की ओर से सभी 94 पात्र परिवारों को स्थायी वैकल्पिक आवास आवंटित करने और उनका कब्जा सौंपने के बाद पश्चिम रेलवे ने शेष ढांचों को हटाने की कार्रवाई की। इस तरह पुनर्वास के लिए छोड़े गए निर्माणों को हटाने का काम भी पूरा हो गया।

बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई

गरीब नगर में बची हुई झोपड़ियों को हटाने की कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के 23 अक्टूबर 2026 के आदेश के बाद की गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला रिट याचिका (लॉजिंग) संख्या 8840/2026 से जुड़ा था। अदालत ने पात्र परियोजना प्रभावित लोगों को परिसर खाली करने के लिए एक सप्ताह का समय देने और उसके बाद रेलवे प्रशासन को 48 घंटे के भीतर संबंधित ढांचे हटाने का निर्देश दिया था। पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी होने और अदालत के निर्देशों के बाद रेलवे प्रशासन ने कार्रवाई आगे बढ़ाई। इसका उद्देश्य रेलवे की जमीन को खाली कर वहां प्रस्तावित विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराना है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि रेलवे की जमीन पर बने सभी निर्माणों को हटाने और पुनर्वास के पात्र परिवारों को वैकल्पिक आवास देने की प्रक्रिया अलग-अलग पहलू हैं। इस मामले में रेलवे ने शेष 94 ढांचों को हटाने से पहले संबंधित पात्र परिवारों के पुनर्वास का इंतजाम पूरा होने की जानकारी दी है।

बांद्रा टर्मिनस पर क्या-क्या विकास कार्य होंगे?

गरीब नगर की जमीन खाली होने से बांद्रा टर्मिनस के पूर्वी हिस्से में रेलवे सुविधाओं के विस्तार की योजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। पश्चिम रेलवे यहां एकीकृत रेलवे परिसर विकसित करना चाहता है। इसका उद्देश्य स्टेशन की परिचालन क्षमता बढ़ाना और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। प्रस्तावित विकास कार्यों में प्रमुख रूप से निम्नलिखित सुविधाएं शामिल हैं:
अतिरिक्त प्लेटफॉर्म का निर्माण: बांद्रा टर्मिनस पर आठवें प्लेटफॉर्म यानी प्लेटफॉर्म संख्या 8 के निर्माण की योजना है। इससे ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
ट्रेनों को खड़ा करने की सुविधा का विस्तार: ट्रेनों को उनके अगले परिचालन से पहले खड़ा रखने और व्यवस्थित करने की सुविधाओं को बढ़ाने की योजना है। इससे उपलब्ध रेल ढांचे का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
रखरखाव सुविधाओं में सुधार: ट्रेनों की जांच, मरम्मत और रखरखाव से संबंधित ढांचे को बेहतर बनाया जाएगा। कुछ सहायक सुविधाओं को दूसरी जगह विकसित करने या स्थानांतरित करने की योजना भी शामिल है।
यात्रियों के लिए बेहतर व्यवस्था: स्टेशन परिसर में यात्रियों की आवाजाही, प्रतीक्षा और भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त स्थान और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है। स्टेशन तक पहुंच को अधिक सुविधाजनक बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इन योजनाओं के पूरा होने से बांद्रा टर्मिनस पर लंबी दूरी की ट्रेनों के संचालन और यात्रियों के प्रबंधन की क्षमता बढ़ सकती है। हालांकि, अलग-अलग परियोजनाओं की समयसीमा और अंतिम स्वरूप के संबंध में उपलब्ध रिपोर्टों में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

मुंबई के रेल यात्रियों को क्या फायदा हो सकता है?

बांद्रा टर्मिनस मुंबई के प्रमुख लंबी दूरी के रेल टर्मिनलों में शामिल है। यहां से देश के विभिन्न हिस्सों के लिए ट्रेनें चलती हैं। त्योहारों और छुट्टियों के दौरान उत्तर भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ने से स्टेशन परिसर में भीड़ और परिचालन संबंधी चुनौतियां सामने आती हैं। ऐसे में अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, ट्रेनों को खड़ा करने की बेहतर व्यवस्था और रखरखाव सुविधाओं का विस्तार भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी हो सकता है। यदि प्रस्तावित काम समय पर पूरे होते हैं, तो रेलवे को ट्रेनों के संचालन की योजना बनाने और यात्रियों की आवाजाही व्यवस्थित करने में अधिक सुविधा मिल सकती है।

पुनर्वास और विकास के बीच संतुलन अहम

गरीब नगर की कार्रवाई मुंबई में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण हटाने और सार्वजनिक परिवहन के ढांचे को मजबूत करने से जुड़े व्यापक मुद्दे को भी सामने लाती है। महानगर में जमीन की कमी और बढ़ती आबादी के बीच रेलवे तथा अन्य सार्वजनिक संस्थाओं के लिए अपनी जमीन का उपयोग परिवहन और नागरिक सुविधाओं के विकास में करना महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर, जिन परिवारों के घर हटाए जाते हैं, उनके लिए वैकल्पिक आवास, आजीविका, बच्चों की पढ़ाई और कामकाज तक पहुंच जैसे सवाल भी महत्वपूर्ण होते हैं। पुनर्वास केवल घर आवंटित करने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि नए स्थान पर बुनियादी सुविधाओं और रोजगार तक पहुंच का प्रश्न भी इससे जुड़ा रहता है। इस मामले में पश्चिम रेलवे और एमएमआरडीए की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, सभी 94 पात्र परिवारों को स्थायी वैकल्पिक आवास आवंटित कर कब्जा सौंप दिया गया है। इससे पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शेष ढांचों को हटाने का रास्ता साफ हुआ।

पुनर्वास और निर्माण की दोहरी चुनौती

गरीब नगर में शेष 94 झोपड़ियों को हटाए जाने के बाद अब ध्यान बांद्रा टर्मिनस के पूर्वी हिस्से में प्रस्तावित रेलवे विकास कार्यों पर रहेगा। जमीन का उपयोग एकीकृत रेलवे परिसर, अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, ट्रेन रखरखाव सुविधाओं और यात्री सुविधाओं के विस्तार के लिए करने की योजना है। इन परियोजनाओं की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्माण कार्य कितनी तेजी से पूरे होते हैं और उनसे यात्रियों को कितनी अतिरिक्त क्षमता तथा सुविधाएं मिलती हैं। मुंबई जैसे महानगर में रेल परिवहन पर बढ़ते दबाव को देखते हुए बांद्रा टर्मिनस का विस्तार महत्वपूर्ण है। कुल मिलाकर, गरीब नगर में पश्चिम रेलवे की कार्रवाई के दो प्रमुख पहलू हैं—पुनर्वास के पात्र परिवारों को वैकल्पिक आवास देने के बाद रेलवे की जमीन खाली कराना और उस जमीन पर भविष्य की रेल सुविधाओं के विकास का रास्ता खोलना। अब चुनौती यह होगी कि खाली कराई गई जमीन पर प्रस्तावित परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाए, ताकि इसका लाभ मुंबई के रेल यात्रियों तक पहुंच सके।

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