मुंबई के स्कूल, अस्पताल और रेलवे स्टेशन से हटेंगे आवारा कुत्ते, 10 हजार कुत्तों पर BMC की नजर

The CSR Journal Magazine

मुंबई में 10,000 आवारा कुत्तों पर BMC की बड़ी कार्रवाई, स्कूल, अस्पताल और रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील इलाकों से होंगे बाहर

मुंबई में आवारा कुत्तों को लेकर बीएमसी ने अब तक की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक तैयार की है। नागरिक निकाय की योजना के तहत स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस डिपो, हवाई अड्डे, खेल परिसरों और अन्य संवेदनशील या प्रतिबंधित क्षेत्रों में मौजूद करीब 10,000 आवारा कुत्तों को पकड़कर निर्धारित आश्रय स्थलों में रखने की तैयारी है। यह कदम केवल कुत्तों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने की कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे सार्वजनिक सुरक्षा, कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं, नसबंदी-टीकाकरण और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की कोशिश भी जुड़ी है।

संवेदनशील इलाकों से वापस उसी जगह नहीं छोड़े जाएंगे कुत्ते

बीएमसी के नए प्रस्ताव में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि प्रतिबंधित अथवा संवेदनशील स्थानों से पकड़े गए कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी जगह वापस छोड़ने के बजाय निर्धारित आश्रय में रखा जाएगा। इनमें विशेष रूप से स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और डिपो, हवाई अड्डे, खेल परिसर तथा ऐसे अन्य स्थान शामिल हैं जहां बड़ी संख्या में नागरिकों की आवाजाही होती है। महाराष्ट्र सरकार ने भी स्थानीय निकायों को निर्देश दिया है कि नसबंदी और टीकाकरण किए गए आवारा कुत्तों को ऐसे संवेदनशील स्थानों पर दोबारा न छोड़ा जाए। यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के आवारा कुत्तों से जुड़े निर्देशों के बाद सामने आया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उसी स्थान पर छोड़ने का नियम संवेदनशील और नियंत्रित प्रवेश वाले संस्थागत परिसरों पर उसी तरह लागू नहीं किया जा सकता। ऐसे स्थानों पर सार्वजनिक सुरक्षा और संस्थान के सुचारु संचालन को भी ध्यान में रखना होगा।

मुंबई में करीब 90,757 आवारा कुत्ते

बीएमसी और ह्यूमेन सोसाइटी इंटरनेशनल/इंडिया की ओर से किए गए सर्वेक्षण के अनुसार 2024 में मुंबई में आवारा कुत्तों की अनुमानित संख्या 90,757 थी। वर्ष 2014 में यह संख्या करीब 95,172 आंकी गई थी। यानी एक दशक में संख्या में कुछ कमी आई है, लेकिन महानगर में आवारा कुत्तों की आबादी अभी भी काफी बड़ी है। बीएमसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल कुत्तों को पकड़ना नहीं, बल्कि उन्हें रखने के लिए पर्याप्त और वैज्ञानिक तरीके से संचालित आश्रय उपलब्ध कराना है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 1,000 कुत्तों को रखने के लिए लगभग 28,067 वर्ग फुट जगह की जरूरत हो सकती है। इस हिसाब से 10,000 कुत्तों के लिए बहुत बड़े क्षेत्र की आवश्यकता होगी। मुंबई जैसे जमीन की कमी वाले शहर में इतने बड़े आश्रय के लिए जगह उपलब्ध कराना बीएमसी के लिए आसान नहीं है।

आश्रय स्थलों की क्षमता सबसे बड़ी चुनौती

बीएमसी ने पहले भी शहर से बाहर बड़े स्तर पर कुत्ता आश्रय स्थापित करने के लिए एजेंसियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए थे। फरवरी 2026 में निकाय ने बड़े आश्रयों के लिए रुचि-पत्र आमंत्रित किया था। बाद में कम से कम 3,000 कुत्तों को रखने की क्षमता वाले आश्रय के लिए जमीन तलाशने की प्रक्रिया भी शुरू हुई, लेकिन जमीन की उपलब्धता बड़ी बाधा बनी हुई है। बीएमसी ने ऐसे आश्रयों के संचालन में निजी संस्थाओं और पशु कल्याण संगठनों की भागीदारी का विकल्प भी तलाशा है। प्रस्तावित व्यवस्था में आश्रय की व्यवस्था और संचालन संबंधित एजेंसी के जिम्मे हो सकता है, जबकि भोजन, टीकाकरण, चिकित्सा उपचार और अन्य आवश्यक देखभाल पर बीएमसी खर्च करेगी।

दो साल के लिए ₹13.35 करोड़ की योजना

संवेदनशील स्थानों से हटाए जाने वाले कुत्तों की देखभाल के लिए बीएमसी ने ₹13.35 करोड़ के प्रस्ताव पर भी काम किया है। इसके तहत दो साल की अवधि में कुत्तों के लिए आश्रय, भोजन और चिकित्सा देखभाल की व्यवस्था की जानी है। प्रस्ताव में करीब ₹155 प्रति कुत्ता प्रतिदिन भोजन, आश्रय और देखभाल के लिए निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस व्यवस्था का मतलब यह है कि बीएमसी के सामने एक तरफ सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ पकड़े गए कुत्तों को लंबे समय तक मानवीय और वैज्ञानिक परिस्थितियों में रखने की भी जिम्मेदारी होगी।

कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण भी जारी रहेगा

बीएमसी की रणनीति केवल कुत्तों को आश्रय में रखने तक सीमित नहीं है। आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी, टीकाकरण और कृमिनाशक उपचार कार्यक्रम को भी मजबूत करने की योजना है। बीएमसी ने हाल में तीन साल में करीब 33,671 कुत्तों की नसबंदी के लिए लगभग ₹23.31 करोड़ की योजना मंजूर की है। आंकड़ों के अनुसार मुंबई में 1994 से अगस्त 2025 तक करीब 4.34 लाख कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी थी, जबकि 2017 के बाद से ही 1.53 लाख से अधिक कुत्तों की नसबंदी होने की जानकारी बीएमसी के आंकड़ों में सामने आई है।

कुत्तों के काटने की घटनाएं भी चिंता का कारण

बीएमसी के लिए यह मुद्दा केवल आवारा कुत्तों की संख्या से जुड़ा नहीं है। मुंबई में कुत्तों के काटने की घटनाएं भी बड़ी चिंता बनी हुई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2025 में मुंबई में 1,54,017 डॉग-बाइट मामले दर्ज हुए। ऐसे में स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी को लेकर सार्वजनिक सुरक्षा का सवाल लगातार उठता रहा है। सरकार ने स्थानीय निकायों को यह भी निर्देश दिया है कि सार्वजनिक अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-रेबीज वैक्सीन और आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडार उपलब्ध रहे, ताकि कुत्ते के काटने की स्थिति में लोगों को समय पर उपचार मिल सके।

हर आवारा कुत्ते को उठाकर कहीं भी नहीं छोड़ा जा सकेगा

यहां यह समझना जरूरी है कि बीएमसी की योजना का मतलब मुंबई की सड़कों से सभी आवारा कुत्तों को हटाना नहीं है। कार्रवाई मुख्य रूप से उन कुत्तों पर केंद्रित है जो संवेदनशील, प्रतिबंधित अथवा नियंत्रित प्रवेश वाले स्थानों में पाए जाते हैं। बीएमसी की अपनी पशु चिकित्सा संबंधी जानकारी में भी कहा गया है कि सामान्य परिस्थितियों में नसबंदी किए गए कुत्तों को उनके क्षेत्र से स्थायी रूप से हटाना नियमों के अनुरूप नहीं है। इसलिए नई व्यवस्था का केंद्र संवेदनशील स्थानों से कुत्तों को हटाकर उनके लिए अलग आश्रय उपलब्ध कराना है।

पशु अधिकार संगठनों ने उठाए सवाल

बीएमसी की योजना को लेकर पशु कल्याण कार्यकर्ताओं की ओर से भी सवाल उठाए जा रहे हैं। उनका मुख्य तर्क है कि 10,000 कुत्तों को लंबे समय तक आश्रय में रखने के लिए पर्याप्त जमीन, प्रशिक्षित कर्मचारी, पशु चिकित्सक, भोजन और चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होगा। यदि आश्रय क्षमता पर्याप्त नहीं हुई तो योजना व्यवहारिक स्तर पर कठिनाइयों में फंस सकती है। पशु कल्याण क्षेत्र से जुड़े लोगों का यह भी कहना है कि केवल कुत्तों को एक जगह से हटाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए नसबंदी कार्यक्रम को लगातार और प्रभावी तरीके से चलाना, टीकाकरण बढ़ाना, कचरा प्रबंधन सुधारना और लोगों के लिए निर्धारित भोजन क्षेत्रों की व्यवस्था करना भी जरूरी है।

निर्धारित फीडिंग जोन भी बनाए जाएंगे

महाराष्ट्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों में आवारा कुत्तों के लिए निर्धारित भोजन क्षेत्र बनाने पर भी जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि सार्वजनिक रास्तों, अस्पतालों, स्कूलों या प्रवेश-नियंत्रित परिसरों में अनियंत्रित तरीके से कुत्तों को खाना खिलाने की स्थिति पैदा न हो। स्थानीय निकायों को शिकायतों के लिए हेल्पलाइन बनाने और लोगों में जागरूकता बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस व्यवस्था से एक तरफ पशु प्रेमियों को कुत्तों को खाना खिलाने की सुविधा मिल सकती है, वहीं दूसरी तरफ भीड़भाड़ वाले स्थानों पर कुत्तों और लोगों के बीच टकराव कम करने की कोशिश होगी।

आक्रामक और बीमार कुत्तों को लेकर भी प्रावधान

सरकारी दिशा-निर्देशों में यह भी कहा गया है कि रेबीज से संक्रमित, गंभीर रूप से बीमार या बेहद आक्रामक कुत्तों के मामले में पशु चिकित्सकीय विशेषज्ञों की सलाह के बाद और कानून के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि ऐसी कार्रवाई को पशु क्रूरता निरोधक कानून और संबंधित पशु जन्म नियंत्रण नियमों के अनुरूप ही किया जाना होगा।

आगे की चुनौती—योजना जमीन पर कैसे उतरेगी?

मुंबई में 10,000 कुत्तों को संवेदनशील इलाकों से हटाने की योजना सामने आने के बाद अब असली चुनौती इसके क्रियान्वयन की होगी। बीएमसी को पहले पर्याप्त जमीन और आश्रय क्षमता तैयार करनी होगी। इसके बाद कुत्तों को पकड़ने, उनकी पहचान दर्ज करने, नसबंदी और टीकाकरण, चिकित्सा जांच तथा सुरक्षित परिवहन की पूरी व्यवस्था करनी होगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि आश्रय केवल नाममात्र के केंद्र न बनें, बल्कि वहां पर्याप्त जगह, साफ-सफाई, भोजन, पानी, पशु चिकित्सक और नियमित स्वास्थ्य निगरानी की व्यवस्था हो। यदि यह व्यवस्था मजबूत तरीके से लागू होती है तो स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में आवारा कुत्तों से जुड़े विवाद और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को कम किया जा सकता है।

आवारा कुत्तों की समस्या पर BMC का जोर

कुल मिलाकर, बीएमसी का प्रस्ताव मुंबई में आवारा कुत्तों के प्रबंधन की नीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है। करीब 10,000 कुत्तों को प्रतिबंधित और संवेदनशील स्थानों से हटाकर आश्रयों में रखने की योजना के साथ-साथ नसबंदी, टीकाकरण, निर्धारित भोजन क्षेत्र और शिकायत निवारण व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है। हालांकि योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बीएमसी पर्याप्त जमीन, आश्रय क्षमता और दीर्घकालिक वित्तीय व पशु चिकित्सा व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से तैयार कर पाती है।

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